पंजाब में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की चुनौतियां
मतों का ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) भारतीय चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के संशोधन के लिए की जाने वाली एक समय-बद्ध व्यापक शक्तिशाली प्रशासनिक प्रक्रिया है जो भारतीय संविधान की धारा 324 तथा जन प्रतिनिधित्व एक्ट, 1950 की धारा 21 (3) के तहत करवाई जाती है। भारतीय चुनाव आयोग के पास इसका कानूनी अधिकार है कि वह देश के किसी भी राज्य में अथारिटी से अनुमति लिए बिना मतदाता सूचियों का संशोधन करवा सकता है। इस संशोधन प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य घर-घर जाकर मतदाता सूची में देश के 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी योग्य नागरिकों को शामिल करने तथा किसी भी गलत, फर्जी नाम, मृतक मतदाता या रिहायश बदल कर स्थानांतरित हो चुके नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटा कर स्वतंत्र तथा निष्पक्ष चुनाव के लिए सही, त्रुटि-रहित तथा विश्वसनीय मतदाता सूचियों की तसदीक करना होता है। गत वर्ष नवम्बर में बिहार तथा हाल ही में अप्रैल में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान मतदाता सूचियों की ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया संबंधी पैदा हुए विवादों ने भारत की लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण चिन्ता पैदा कर दी है, क्योंकि मतदाता सूचियों में असली मतदाताओं के नाम कथित तौर पर हटाने, फर्जी एंटरियों की मौजूदगी, गैर-कानूनी प्रवासियों तथा मृतक व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची संशोधन के बाद सूचिबद्ध होने के बारे में आरोप लग रहे हैं। परिणामस्वरूप प्रभावशाली मतदाता संशोधन प्रक्रिया की जरूरत बारे नई बहस शुरू हुई है।
देश में पहली बार मतदाता सूचियों के संशोधन का काम पूरा करवा कर, जो ड्राफ्ट मतदाता सूची 15 नवम्बर, 1951 को जारी की गई थी, उसके अनुसार (जम्मू-कश्मीर को छोड़ कर) पूरे देश में कुल 17.3 करोड़ के लगभग मतदाता थे। उसके बाद समय-समय पर अलग-अलग तरीकों से मतों का संशोधन होता आ रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं की संख्या जो बढ़ कर विश्व भर में सबसे अधिक 100 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है, का ‘विशेष गहन पुरनीक्षण’ अंतिम बार वर्ष 2002 में 20 राज्यों में 1 जनवरी, 2002 को आधार तिथि मान कर करवाया गया था, जबकि शेष रहे पंजाब सहित सात राज्यों में 2003 के दौरान यह कार्रवाई पूर्ण की गई। देश-व्यापी मौजूदा चल रहे दूसरे ‘विशेष गहन पुरनीक्षण’ तथा पहली बार विवादपूर्ण बन रही संशोधन प्रक्रिया की घोषणा 24 जून, 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की थी। इसके पहले चरण में सिर्फ बिहार में ही मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया जबकि दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल सहित 9 राज्यों तथा तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों में संशोधन किया गया। भारतीय चुनाव आयोग द्वारा 14 मई, 2026 को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ के तीसरे चरण के अधीन अब 15 जून, 2026 से पंजाब सहित 16 राज्यों में विशेष गहन मत-संशोधन का कार्य आरम्भ किया जा चुका है।
चुनाव आयोग द्वारा समय-सारिणी के अनुसार पंजाब में 25 जून से 24 जुलाई तक बी.एल.ओ. घर-घर जाकर गणना फार्म भरवा कर मतदाताओं की तस्दीक करेंगे। 24 जुलाई तक ही पोलिंग बूथों की संख्या को तर्कसंगत बनाया जाएगा। मतों की तस्दीक के बाद 03 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूचियां प्रकासित की जाएंगी, जो पोलिंग बूथों, चुनाव रजिस्ट्रेशन कार्यालय तथा आनलाईन वोटर पोर्टलों पर उपलब्ध होंगी। मतदता अपने बने वोट के बारे में जांच कर सकेंगे कि क्या उनका नाम सही ढंग से नई मतदाता सूची में शामिल किया गया है या नहीं? उपरांत 3 अगस्त के बाद 2 सितम्बर तक लोक दावे और एतराज दायर करके अपने नये नाम शामिल करने, गलत नाम हटाने, एंटरियों में सुधार करने तथा क्षेत्र के भीतर पता बदलने आदि के लिए आवेदन जमा करवा सकते हैं। इन दावों की चुनाव अधिकारी दस्तावेजी जांच, बी.एल.ओ. द्वारा फील्ड जांच या विवादित मामलों में सुनवाई के ज़रिये सभी आवेदनों का 3 अगस्त से 28 सितम्बर, 2026 तक निपटान करेंगे। सभी दावों तथा एतराजों का निपटान करने के बाद एक अक्तूबर, 2026 को पंजाब के लिए अंतिम संशोधित मतदाता सूचियां प्रकाशित होंगी जिनका इस्तेमाल फिर आगामी विधानसभा चुनाव में किया जाएगा।
राज्य में होने जा रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान बी.एल.ओ. प्रत्येक मतदाता के घर जाकर प्रति मतदाता दो-दो गणना फार्म देकर उन्हें भरवाने में मदद करेगा। प्रत्येक मतदाता, बेशक उसका वोट 2003 की मतदाता सूची में दर्ज है या नहीं, को अपना नाम नई मतदाता सूची में शामिल करवाने के लिए अपनी रंगीन फोटो लगाने तथा मोबाइल नम्बर अपडेट करने के बाद गणना फार्म भर कर निश्चित समय में बी.एल.ओ. के देना ज़रूरी होगा। जिन नागरिकों का वोट 2003 की मतदाता सूची में उपलब्ध नहीं है, उन्हें गणना फार्म जमा करवाने के बाद चुनाव रजिस्ट्रेशन अधिकारी नोटिस जारी करके आवश्यक दस्तावेज़ों की मांग करेगा। मतदाता द्वारा नोटिस तय समय के भीतर चुनाव आयोग द्वारा जारी अपने मतदाता होने के उपलब्ध 12 किस्म के दस्तावेज़ों की सूची में से ज़रूरी सबूत जमा करवाने के बाद ही मतदाता का नाम नई सूची में दर्ज हो सकेगा। आधार कार्ड केवल पहचान के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकेगा, न कि देश का नागरिक होने के सबूत के रूप में।
इस विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान आम लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि चुनाव आयोग द्वारा संशोधन प्रक्रिया बारे स्पष्ट दिशा-निर्देश व्यापक स्तर पर सार्वजनिक न करना, वोट बनाने की स्वीप प्रक्रिया की भांति आम लोगों को जागरूक न करना, परिणामस्वरूप वोट काटने या शामिल करने के बारे आम जन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं। जिन व्यक्तियों के नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं हैं, इसके बारे में दावे तथा एतराज दाखिल करने के लिए बहुत कम समय देना, मतदाताओं के नाम/स्पैलिंग की छोटी-छोटी गलतियों के कारण वोट जानबूझ कर काटना, विदेशों तथा दूसरे राज्यों में रह रहे लाखों युवा पंजाबियों की वोटों की स्थिति बारे असमंजस, चुनाव आयोग द्वारा लोगों की पहचान करके वोट काटने के लिए जारी दिशा-निर्देश, पंजाब में रह रहे लाखों प्रवासियों, जिनमें बहुत-से लोग अभी भी अपने-अपने राज्यों के मतदाता हैं, की जांच-पड़ताल के बारे कोई दिशा-निर्देश सार्वजनिक न करना आदि। परिणामस्वरूप, बिहार तथा पश्चिम बंगाल के अनुभव के दृष्टिगत बहुत से बुद्धिजीवी तथा जागरूक लोग संदेह व्यक्त कर रहे हैं कि मतदाता सूचियों के संशोधन के बहाने केन्द्र सरकार चुनाव आयोग के माध्यम से इनके साथ खिलवाड़ करके अपने विरोधियों या विशेषकर अल्पसंख्यक वर्गों से संबंधित मतदाताओं की छंटनी कर रही है। ऐसे प्रतीत होता है कि मतदाता सरकार चुनने की बजाय सरकार मतदाताओं का चुनाव कर रही है। इसलिए समूह पंजाबियों, विशेषकर वार्ड/गांव स्तर के सभी राजनीतिक नेताओं, समाज-सेवी संस्थाओं, बुद्धिजीवियों तथा पंजाब-परस्त लोगों को सचेत रह कर यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि प्रत्येक योग्य नागरिक का वोट अवश्य बन सके और दूसरे राज्यों से आए प्रवासी नागरिकों, जिनके वोट उनके अपने राज्यों में बने हुए हैं, उनके वोट पंजाब में न बन सकें।
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