संतोषजनक है समझौते की घोषणा
दुनिया भर के लिए यह समाचार संतोषजनक है कि अमरीका और ईरान के बीच लगभग 4 माह पहले शुरू हुए युद्ध संबंधी समझौता हो गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शऱीफ के अनुसार 19 जून को दोनों देशों के बीच स्विट्ज़रलैंड में इस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। विगत काफी दिनों से अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार यह घोषणा की थी कि जल्द ही ऐसा समझौता होने जा रहा है। परन्तु इस संबंधी कुछ भी निश्चित रूप में सामने नहीं आया था। 28 फरवरी को जब अमरीका और इज़रायल ने ईरान पर हमला किया था और उसके प्रमुख नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ उसके बहुत सारे रिश्तेदारों और जनरलों को मार दिया था, तभी उसके बाद लड़ाई बेहद तेज़ हो गई थी।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्ज़ा करके खाड़ी देशों में से भेजे जाते तेल और गैस वाले जहाज़ों को पूरी तरह रोक दिया था, तेल की भारी किल्लत होने से इसकी कीमतें आसमान छूने लगी थी, जिससे भारत सहित हर तरफ ज़रूरी वस्तुएं बेहद महंगी हो गई थीं। इस युद्ध की शुरुआत तो काफी पहले उस समय ही हो गई थी जब हमास के गोरिल्लों ने इज़रायल पर हमला करके सैकड़ों ही लोगों को मार दिया था और बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों सहित लोगों का अपहरण भी कर लिया था। इसके बाद इज़रायल ने गाज़ा पट्टी, जिस पर हमास का कब्ज़ा था, और हमला करके हज़ारों ही लोगों को मार दिया था और वहां के प्राथमिक ढांचे को भी बर्बाद कर दिया था, जिस कारण लाखों ही लोग शरणार्थी बन गये थे। ईरान क्योंकि हमास और हिज्बुल्लाह आदि संगठनों की इज़रायल के विरुद्ध पूरी मदद करता रहा है, इसलिए प्रतिक्रिया के रूप में उस पर किए अमरीकी-इज़रायली हमले ने एक तरह से उसका बहुत बड़ा नुकसान कर दिया था। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्ज़ा करने के बाद अमरीका ने उसकी सभी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी थी और विश्व भर में उसकी अरबों रुपये की सम्पत्ति को भी जाम कर दिया था। एक अनुमान के अनुसार उसकी 25 अरब डॉलर की सम्पत्ति तथा ईरान के बाहर बैंकों के खाते बंद कर दिए गए थे। अब घोषित किए गए समझौते की शर्तों का पूरा विवरण तो अभी सामने आना शेष है, परन्तु अमरीका ईरान का परमाणु कार्यक्रम बंद करवाने के लिए दृढ़ है और कहा जा रहा है कि ईरान इसके लिए तैयार भी हो गया है और इसके बदले अमरीका ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पुन: खोलने पर उस पर तेल निर्यात करने की लगाई गई पाबंदी हटा लेगा, परन्तु दूसरी ओर इज़रायल ने लेबनान के बड़े क्षेत्र तथा गाज़ा पर किए कब्ज़े को छोड़ने से इन्कार कर दिया है। इसके साथ ही उसने लेबनान तथा सीरिया में मौजूद हिज़बुल्लाह तथा हमास के बारे में भी स्पष्ट कहा है कि यदि उन्होंने इज़रायल के खिलाफ कार्रवाइयां न रोकीं तो वह अपने हमले जारी रखेगा।
एक ओर समझौते के समाचार से विश्व भर के देशों ने राहत की सांस ली है, दूसरी ओर इज़रायल की इस घोषणा के कारण युद्ध खत्म होने संबंधी अनिश्चितता बनी दिखाई देती है। भारत ने भी समझौते की घोषणा का स्वागत किया है, परन्तु यह बात अभी स्पष्ट नहीं हुई कि अपनी पहली घोषणाओं के अनुसार ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले तेल के जहाज़ों पर कर लगाएगा या नहीं? यदि ईरान कर लगाने पर दृढ़ रहता है तो भी स्थिति नहीं सुधरेगी, क्योंकि आज चीन तथा भारत सहित विश्व के अधिकतर देश हर हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के लिए बेहद उत्सुक दिखाई देते हैं। यह बात भी सुनिश्चित है कि यदि ईरान ऐसी नाकाबंदी को हटाने को लेकर अपनी हिचकिचाहट दिखाता है तो उसे विश्व भर के देशों के गुस्से का भी शिकार होना पड़ सकता है, परन्तु इसके साथ-साथ अमरीका को भी इज़रायल को हर हाल में अपने विश्वास में लेना पड़ेगा। दक्षिण एशिया की दशकों से बनी इस जटिल स्थिति को हर हाल में अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सुलझाने की ज़रूरत है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

