पहला थिएटर कहां बना था ?
‘दीदी, आजकल यह बहस राष्ट्रव्यापी हो गई है कि थिएटर में किन एटिकेट का पालन किया जाना चाहिए, विशेषकर मोबाइल फोन को लेकर। इससे मेरे दिमाग में यह सवाल आया कि पहला थिएटर कहां बना होगा?’
‘थिएटर, जैसा कि हम आज जानते हैं, को विकसित होने में बहुत समय लगा। वैसे नाटक के विचार की बुनियाद ही धर्म में है।’
‘किस तरह से?’
‘सबसे पहले चीनी नाटक-रुपी नृत्य अपने मन्दिरों में किया करते थे। बाद में इसके लिए प्लेहाउस प्रयोग किया जाने लगा। वह मात्र मंच था बिना पर्दों या बदलती हुई लाइट्स के, जिसकी छत मन्दिर की छत की तरह सजी हुई होती थी। प्राचीन समय में जापानियों ने भी एक प्रकार का थिएटर विकसित किया। उनके एक प्रकार के नाटक को ‘नो’ कहते थे और अधिक विख्यात नाटक ‘काबुकी’ कहलाता था। उनका मंचन एक चबूतरे पर होता था, जिस पर मन्दिर की छत होती थी।’
‘भारत की भी तो प्राचीन संस्कृति है...।’
‘हां, प्राचीन भारत में भी नाटकों का मंचन होता था विशेष प्रकार के बने हुए चबूतरों पर जिनमें पृष्ठभूमि के लिए पर्दों का प्रयोग किया जाता था। लेकिन नाटक का ज़बरदस्त रूप प्राचीन यूनान में विकसित किया गया।’
‘वहां क्या होता था?’
‘दर्शकों को पहाड़ी पर बैठा दिया जाता था और घास युक्त घेरे में नाटक खेला जाता था। एक बिल्डिंग होती थी जिसे ‘स्केने’ कहते थे। इसे कलाकारों के प्रवेश, ड्रेसिंग और सुंदर पृष्ठभूमि के लिए प्रयोग किया जाता था।’
‘आपने कहा कि थिएटर की बुनियाद धर्म में है, लेकिन मैंने सुना है कि मध्य युग में ईसाई चर्च ने सभी प्रकार के नाटकों की निंदा की थी।’
‘तुमने सही सुना है, लेकिन बाद में धार्मिक नाटक चर्च जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गये। चर्च सेवा के रूप में पादरी बाइबिल की कहानियों का मंचन किया करते थे।’
‘इन सबसे आधुनिक थिएटर की नींव कैसे रखी गई?’
‘एलिजाबेथ-1 के दौर में इंग्लैंड में थिएटर ने ज़बरदस्त कदम उठाया। 1576 में जेम्स बुर्बगे नामक एक्टर ने पहला प्लेहाउस बनाया जिसे ‘द थिएटर’ नाम दिया गया और उसका मंच सराय के आंगनों में प्रयोग होने वाले स्टेज की तरह था। जल्द ही अन्य थिएटर भी बनने लगे, जिनमें ‘द ग्लोब’ भी था जिसमें शेक्सपियर के नाटक खेले जाते थे। दर्शक स्टेज के सामने या साइड में गड्ढे में खड़े होते थे या स्टेज से ऊपर बॉक्स में बैठते थे। यही इंग्लिश थिएटर हमारे आधुनिक थिएटर की शुरुआत हैं।’
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



