अमेरिका ने फिर से नाकेबंदी के बाद हमले तेज किये, तेहरान की ऊर्जा निर्यात रोकने की धमकी   


  दुबई, 15 जुलाई (एपी) अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में बुधवार को तेहरान पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लगा दी और उसके खिलाफ अपने हवाई हमले तेज कर दिये।     ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों में ईरानी सेना की एक बैरक को निशाना बनाया गया, जिसमें कम से कम सात सैनिक मारे गए और देशभर में 260 से अधिक लोग घायल हो गए।     पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से जारी जवाबी हमलों तथा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर फिर से  धमकियों के बढऩे से संघर्ष समाप्त करने के लिए हुआ अंतरिम समझौता लगभग निष्प्रभावी हो गया है और क्षेत्र एक बार फिर पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ सकता है।   

  अमेरिका ने पहली बार अप्रैल में ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू की थी, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर 60 दिनों तक बातचीत करने के लिए हुए पिछले महीने हुए अंतरिम समझौते के बाद इसे हटा लिया था। अंतरिम समझौते के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हो गय था।  हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संघर्ष तेज होने के कारण ये वार्ताएं ठप पड़ गई हैं।जब अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, तब तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री यातायात के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इस कदम से तेल, उर्वरक और कई अन्य वस्तुओं की कीमतें न केवल क्षेत्र में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तेजी से बढ़ गई थीं और इससे वार्ता में ईरान की स्थिति मजबूत हो गई। बढ़ती कीमतें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए विशेष चुनौती बन गई हैं, क्योंकि पार्टी नवंबर में होने वाले चुनाव में कांग्रेस पर अपना नियंत्रण बरकरार रखना चाहती है। हालांकि, वाङ्क्षशगटन इस जलमार्ग को सफलतापूर्वक फिर से खोलने में संघर्ष करता दिखा है।ईरान के अद्र्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बुधवार को चेतावनी दी कि नाकेबंदी जारी रहने पर वह पूरे पश्चिम एशिया से ऊर्जा निर्यात रोक देगा।  रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा,''क्षेत्र से तेल और गैस का निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं होगा।''    

     नाकेबंदी दोबारा लागू होते ही अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर हमले किए।      अमेरिकी सेना के मध्य कमान ने बुधवार को कहा कि अमेरिका ने रातभर कई ठिकानों पर हमले किये और फिर दिन के समय भी ईरान पर हवाई हमले जारी रखे। दिन के उजाले में हमले करना एक असामान्य कदम है, जो हमलों की बढ़ती तीव्रता का संकेत देता है।     ईरानी बंदरगाहों पर दोबारा नौसैनिक नाकेबंदी लागू किए जाने के 17 घंटे के भीतर अमेरिकी सेना के मध्य कमान ने कहा कि अमेरिकी बलों ने नाकेबंदी तोडऩे की कोशिश कर रहे दो वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदलवा दिया।     उसने सोशल मीडिया पर कहा,''अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क है और नाकेबंदी का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।'     अमेरिकी सेना के निशानों में ग्रेटर तुंब द्वीप भी शामिल था, जिसे होर्मुज जलडमरूमध्य में एक रणनीतिक ²ष्टि से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। अमेरिकी सेना के मध्य कमान ने कहा कि इस हमले में ईरान के रक्षा प्रतिष्ठानों और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया।     ईरान ने 1971 में तीन द्वीपों -अबू मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब पर नियंत्रण कर लिया था जब आज का संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) अस्तित्व में आने वाला था। यूएई तब से इन द्वीपों पर अपना नियंत्रण फिर से स्थापित करने की कोशिश करता रहा है।      कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका इन द्वीपों पर कब्जा कर लेता है, तो इससे उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिल सकती है।     ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया कि एक हमले में सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत के बामपुर में स्थित'388वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री ब्रिगेड के बैरक को निशाना बनाया गया। खबर के अनुसार, अमेरिका ने हमले के दौरान कम से कम 13 मिसाइल दागीं। मरने वालों में अनिवार्य सैन्य सेवा के तहत भर्ती किए गए सैनिक और नियमित सैन्यकर्मी शामिल हैं। कई अन्य सैनिक घायल भी हुए।   

  ईरानी सरकार प्रवक्ता फातिमाह मोहाजेरानी ने कहा कि बैरक में मारे गए लोगों समेत हाल के दिनों में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने इस बारे में अधिक जानकारी नहीं दी।      इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपोर ने कहा कि केवल रातभर हुए हमलों में ही 260 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हुई किसी भी अन्य ङ्क्षहसक घटना की तुलना में यह संख्या कहीं अधिक है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि रातभर के हमलों में कितने लोगों की मौत हुई।     सरकारी टेलीविजन के अनुसार, ईरानी सेना ने कहा कि वह''अमेरिकी दुश्मन की इस आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक जवाब देगी।'Ó    बुधवार तड़के बहरीन और कुवैत में ईरानी मिसाइल हमले की चेतावनी वाले सायरन बज उठे। हाल के दिनों में यह लगभग रोज होने वाली घटना बन गई है। जॉर्डन ने कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइल मार गिरायीं। ईरान ने इन तीनों देशों पर हमले करने का दावा किया। इन तीनों देशों में अमेरिकी सैन्य बल तैनात हैं।

    अमेरिकी की मध्य कमान का नेतृत्व करने वाले नौसेना एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक बयान में कहा कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी देशों की ओर दर्जनों मिसाइल और ड्रोन दागे।      अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार रात फॉक्स न्यूज चैनल से कहा कि अगले दो दिनों में ईरान पर अमेरिका के और हमले किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि वार्ता फिर से शुरू नहीं हुई तो अगले सप्ताह तक पुलों और बिजली संयंत्रों को भी निशाना बनाया जा सकता है। अमेरिका पहले ही कम से कम एक पुल पर हमला कर चुका है।     ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा,''बेहतर होगा कि समझौता कर लो, नहीं तो तुम्हारे पास कुछ भी नहीं बचेगा।'    संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अमेरिका के हमलों की आलोचना की।   

 सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख को लिखे पत्र में कहा,''अमेरिका पीडि़त नहीं, बल्कि हमलावर है।'    ताजा संघर्ष का केंद्र हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरान द्वारा इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से अवरुद्ध किए जाने के बाद से अमेरिका के लिए इसे दोबारा खोलना बड़ी चुनौती बना हुआ है।   

 अंतरिम समझौते के दौरान कुछ जहाजों ने ओमान के निकट स्थित उस मार्ग से आवागमन शुरू किया, जिसकी निगरानी अमेरिकी सेना करती है और जो तेहरान के नियंत्रण से बाहर है।     हाल के दिनों में ईरान ने इसी मार्ग से गुजर रहे जहाजों पर हमले किए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जवाबी हमलों का सिलसिला शुरू हो गया। अमेरिका ने जलडमरूमध्य को बलपूर्वक फिर से खोलने की धमकी दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए हजारों जमीनी सैनिकों की नहीं तो कहीं अधिक बड़े नौसैनिक बेड़े की आवश्यकता होगी। ऐसे में ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नौसैनिक नाकेबंदी लागू करना एक वैकल्पिक उपाय माना जा रहा है।   

 इस बीच, तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड का भाव बुधवार को 85 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। यह युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है, हालांकि संघर्ष के चरम के दौरान पहुंचे लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से अभी भी काफी कम है।     अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के विश्लेषकों ने बुधवार को आगाह किया कि अब तक तेल की अधिक उपलब्धता के कारण कीमतें नियंत्रण में थीं, लेकिन''अब उस गुंजाइश का बड़ा हिस्सा समाप्त हो चुका है।'    इस बीच, क्षेत्रीय मध्यस्थ अब भी अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।   
 

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