क्या आप जानते हैं सांपों की बोली
आपने तरह-तरह के सांपों के क्रियाकलापों से परिचित होंगे मगर आपने कभी सोचा है कि सांप बोलते हैं या नहीं। क्या आपने सांपों के बोलने के बारे में कभी कल्पना की है कि सांप भी बोलते हैं। उसकी बोली किस प्रकार की होगी। वे कब और किस स्थिति में बोलते होंगे। क्या आपने कभी उनकी बोली को सुना है।
आश्चर्य में मत पड़िए। यदि आपको नज़दीक किसी झाड़ी में छिपे सांप के बोलने की आवाज़ आई होगी तो आप उसे पहचान नहीं पाए होंगे या उनकी बोली को किसी कीड़े मकौड़े की बोली समझकर अनसुना कर दिया होगा।
मगर जनाब चौंकिये मत। सांप भी बोलते हैं। वे भी अपनी बोली बोलकर सुख-दुख प्रकट करते हैं। इसका पता आपको तब लगेगा जब आप खपड़ैल वाले किसी मकान में रह रहे हों और उस घर में आपके साथ सांप भी रह रहे हों।
सांप के क्रियाकलापों पर कड़ी नज़र रख कर उसके बारे में अध्ययन करना होगा। तब आपको अच्छी तरह विश्वास हो जाएगा कि सांप भी बोलता है वरना मेरी बातों पर आपको विश्वास नहीं होगा।
वैसे तो वैज्ञानिक मान रहे हैं कि सांप मूक होते हैं मगर नहीं, यहां वैज्ञानिकों की सारी बात फेल है। सांप मूक नहीं होते। हर तरह के सांप हर तरह की अपनी अपनी बोली बोलते हैं। कई लोगों ने सांपों को बोलते हुए देखा सुना है। जो सांप अपने आप में खूब विशाल होता है, वही सांप बोलते हैं।
करैत नामक सांप को जब आहार नहीं मिलता है, तब अति भूख की स्थिति में बोलकर अपना दुख प्रकट करता है। कू.कू.कू.कू.कू ति.ति.ति.ति.ति वे तीन सेकेंड में इतने शब्द बोलकर निकालते हैं।
अजगर सांप को अति भूख लगने पर कर्र.कर्र.कर्र, टींह.टींह, टींह करके बोली बोलते हैं। धामन सांप भी किसी के कराहने जैसी विचित्र बोली बोलता है मगर कराहने में और उसकी बोली में काफी भिन्नता होती है।
ये हु उहू उहुहू उहुहू की बोली बोलकर विचित्र आवाजें निकालते हैं मगर जनाब सांप सिर्फ बरसात और ज्येष्ठ के महीने में ही बोलते हैं। (उर्वशी)



