कैसे बेफिक्र होकर सोते हैं आसमान में उड़ते पक्षी
ज़मीन से मीलों ऊपर उड़ते हुए पक्षी जब हजारों किलोमीटर की अपनी लंबी यात्रा पर होते हैं, तो हर समय जगे हुए नहीं होते, बीच-बीच में सोते भी हैं। फिर चाहे वे जिस आसमान में उड़ रहे हों, उसके नीचे चारों तरफ हजारों मील तक समुद्र ही क्यों न पसरा हो। यही नहीं अगर सैकड़ों किलोमीटर तेज आंधी भी चल रही होती है, तो भी उनकी सेहत पर फर्क नहीं पड़ता। वे उस समय भी उड़ते हुए अपनी ज़रूरी नींद ले लेते हैं। इंसान को धरती का सबसे तेज दिमाग वाला जीव समझा जाता है, लेकिन इंसान ने अभी तक ऐसी कामयाबी नहीं हासिल कर सका। कामयाबी तो दूर अभी तो इंसान की कल्पना के लिए भी यह असंभव लगता है, जो पक्षी हजारों साल से कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने आसमान में हजारों मील की लंबी उड़ान भरते समय पक्षियों की नींद लेने की तरकीब को लगातार इन पर नजर रखकर समझा है, लेकिन अभी तक वह नहीं समझ पाए कि आखिर पक्षी यह कौशल कर कैसे लेते हैं?
ग्रेट फ्रिगेटबर्ड पर लगातार नज़र रखते हुए वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह कई-कई दिनों तक आसमान में उड़ते हुए जमीन पर नहीं उतरता और बिना रुके अपनी यात्रा जारी रखता है। सवाल है आखिर वह ऐसा करता कैसे है? वैज्ञानिकों के विभिन्न अनुसंधानों के मुताबिक ऐसा करते हुए इसके शरीर का आधा हिस्सा सोता है, जबकि आधा हिस्सा जगा होता है। अब तक की खोज के मुताबिक यह चमत्कारिक कौशल सिर्फ पक्षियों में ही होता है कि जब वो लंबी उड़ान पर जमीन से मीलों ऊपर आसमान में हों, तब उनके मस्तिष्क का एक हिस्सा घंटों-घंटाें आराम करता है और दूसरा हिस्सा ज़रूरी काम यानी उड़ान को सम्पन्न करता है। यही वजह है कि पक्षी न सिर्फ आसमान में हजारों किलोमीटर की उड़ान भरते समय आराम से सो लेते हैं बल्कि इसी तरकीब का इस्तेमाल करके पानी में रहने वाले पक्षी भी तैरते समय सो लेते हैं। ऐसा करते समय पक्षियों की एक आंख बंद हो सकती है मस्तिष्क का विपरीत हिस्सा आराम कर सकता है, जबकि दूसरी आंख और मस्तिष्क का दूसरा हिस्सा सजग रहता है और अपनी परिस्थितियों तथा वातावरण पर लगातार नजर रखता है।
हालांकि अभी तक वैज्ञानिक यह कह पाने की स्थिति में नहीं हैं कि सभी पक्षियों के पास यह कौशल होता है। दरअसल यह चमत्कार अभी तक कुछ विशेष प्रजातियों के पक्षियों को ही करते देखा गया है या दूसरे शब्दों में कहें तो वैज्ञानिकों ने इन्हें ऐसा करते पाया है। साल 2016 में प्रकाशित एक चर्चित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ग्रेट फ्रिगेटबर्ड की नींद का लंबे अध्ययन के बाद यह चमत्कारिक रहस्य खोला कि वह कैसे उड़ते समय काफी-काफी देर तक झपकी जैसी नींद लेते पाया गया। वास्तव में वैज्ञानिकों ने ग्रेट फ्रिगेटबर्ड के समूहों को हजारों मील समुद्र के ऊपर उड़ते हुए ट्रैक किया और उनके मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि तथा सिर की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया। इन रिकॉर्ड से पता चला कि कैसे ये पक्षी बीच-बीच में काफी-काफी देर तक सोते हैं। हालांकि यह भी बात जान लीजिए कि पक्षी जमीन पर रहते हुए जितना सोते हैं, उससे बहुत कम आसमान में उड़ते हुए सोते हैं यानी डर और चिंता तो उन्हें भी रहती है। भले उनके पास सोते हुए भी उड़ने का कौशल हो।
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि पक्षी उड़ान के मामले में बेहद चतुर होते हैं। वह उड़ते समय हवा को अपने एक सहारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं। यही कारण है कि जब वह ऊंचे आसमान में लंबी उड़ान पर होते हैं, तब बार-बार पंख नहीं फड़फड़ाते। वास्तव में समुद्र के ऊपर उठने वाली गर्म हवा और वातावरण में मौजूद हवा की धाराओं का बड़ी चतुराई से इस्तेमाल करते हुए पक्षी उसमें ग्लाइडिंग (तैरना) करते हैं। कहने का मतलब यह कि पंख फैलाकर हवा के सहारे आगे बढ़ते रहते हैं। यह ऊर्जा बचाने और लगातार उड़ान के बावजूद न थकने का एक सीक्रेट तरीका भी है। ऊंची उड़ान भरते हुए भी पक्षियों को मौसम, भोजन और शिकारियों से सतर्क रहना पड़ता है; क्योंकि ये उनके लिए खतरा होते हैं। यही नहीं जब पक्षी अपनी ऐसी लंबी यात्रा पूरी करके अपने ठिकाने पर पहुंचते हैं, तो वह कई-कई दिनों तक अपनी ‘स्लीप रिकवरी’ करते हैं। इसके लिए वे अपनी नींद की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ा देते हैं। वैज्ञानिकों ने अपने लंबे अध्ययन में इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पक्षी ऐसे जीव होते नहीं कि जिन्हें नींद की जरूरत न पड़ती हो, उन्हें भी नींद चाहिए होती है। उनका शरीर भी थकता है। बस, फर्क सिर्फ इतना है कि उन्होंने थकान और खतरे के बीच संतुलन साधना सीख लिया है। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



