पाकिस्तान में सेना का अधिक ताकतवर होना

एक समाचार के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अपनी सबसे बड़ी शक्ति तब खो देनी पड़ी जब वहां के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को एक नए कानून के तहत परमाणु हथियारों व रणनीतिक मिसाइलस प्रणालियों की कमान सौंप दी है। इस कानून के तहत नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड अर्थात् राष्ट्रीय रणनीतिक कमांड (एन.एस.सी.) की स्थापना की गई है, जिसका नेतृत्व सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर करेंगे। समाचार के अनुसार एन.एस.सी. के 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद किया गया है, जिसके तहत परमाणु हथियारों व अन्य महत्त्वपूर्ण रणनीति सम्पत्तियों का संचालन अब सीधे तौर पर केन्द्रीय सेना कमांड के अधीन होगा। बताया गया कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने लेफ्टीनेंट जनरल अमीर रज़ा को चार-सितारा जनरल के रूप में तरक्की देकर उनको इस कमांड का पहला कमांडर नियुक्त किया है। इससे पहले पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय कमांड अथॉरिटी (एन.सी.ए.) के अधीन था। परमाणु हथियारों का इस्तेमाल या तैनाती संबंधी अंतिम फैसला पाकिस्तान द्वारा ही लिया जा सकता था। जबकि अब नए सेना पुनर्गठन के तहत एन.एस.सी. ने असल कमांड सम्भाल ली है।
दिखने में यह समाचार ऐसा महत्त्वपूर्ण नहीं लगता, परन्तु गौर से देखने पर इसके प्रभाव गहरे हैं और क्योंकि भारत पाकिस्तान का पड़ोसी देश है तथा भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते अतीत के कई शांतिपूर्ण यत्नों के बावजूद शत्रुतापूर्ण रहे हैं। इसलिए भी सोचना पड़ सकता है। तनावपूर्ण समय में सैन्य शक्तियों का संतुलन और मिजाज बिगड़ा रहता है। आप कहेंगे कि भारत भी परमाणु शक्ति सम्पन्न देश है, परन्तु सोचने की बात है कि तनावपूर्ण स्थितियों में कोई भी पैनिक बटन दबा सकता है।  जहां तक आसिम मुनीर का सवाल है वह पी.ओ.के. में निर्दयी होकर जन-प्रदर्शन कर रही जनता पर बेकाबू होकर गोलियां बरसाने का आदेश देने से बाज नहीं आते। हाल ही में पाकिस्तान में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पी.ओ.के. संबंधी टिप्पणी से पाक में घबराहट बनी हुई है। पाक सरकार ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (पी.ओ.के.) के संबंध में भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा की गई टिप्पणी को भड़काऊ और ़गैर-ज़िम्मेदाराना बताते हुए आलोचना की है। दरअसल कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर कारगिल युद्ध यादगार में अपने सम्बोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाने के लिए पाक की निंदा करते हुए कहा था कि गैर-कानूनी तौर पर कब्ज़े वाले भारत के हिस्से पी.ओ.के. के अतिरिक्त पाकिस्तान से कोई बातचीत नहीं होगी। रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए साफ-साफ यह भी कह दिया कि भारत पाक द्वारा किसी भी दुर्व्यवहार का जवाब उनकी कल्पना से परे हो सकता है। पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ को इस बयान पर एतराज़ था।
राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कश्मीर के द्रास सैक्टर में शहीद-जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए पाकिस्तान के साथ बातचीत की कोई भी संभावना रद्द कर दी। स्मरण होगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह युद्ध 1999 में हुआ था। युद्ध दो महीने चला था। पाकिस्तानी सेना और घुसपैठियों ने जम्मू-कश्मीर की कारगिल, द्रास, बटालिक और तोलोलिंग सैक्टर की ऊंची पहाड़ियों पर घुसपैठ करके कब्ज़ा कर लिया था। भारत ने इस चुनौती का सामना करते हुए एक बहुत कठिन अभियान में दुश्मन को भागने पर विवश कर दिया था।

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