अमरीकी राजदूत की स्पष्ट बयानी

विगत सप्ताह बुधवार को अमरीका के राजदूत सर्जियो गोर की ओर से किया गया श्रीनगर का दौरा कई पक्षों से महत्त्वपूर्ण और भावपूर्ण था, जिसमें गोर द्वारा दिया गया बयान बड़े अर्थ रखता है। श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिलने के बाद गोर ने कहा कि कश्मीर भारत का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। यह भी कि वह घाटी के हालात देखते हुए अमरीकी यात्रियों के लिए नई एडवाइजरी (परामर्श) जारी कर रहे हैं क्योंकि यहां के हालात बहुत सीमा तक सुधर चुके हैं। गोर द्वारा दिया गया यह बयान इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि उनकी अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ बहुत निकटता है। भारत में राजदूत के पद पर होने के साथ-साथ उन्हें दक्षिण और केन्द्रीय एशिया का भी विशेष राजदूत बनाया गया है।
 इस बयान के बाद पाकिस्तान की गुस्से में आई सरकार ने अमरीका के इस्लामाबाद में स्थित अमरीकी दूतावास के समक्ष कड़ा रोष प्रकट किया तथा गोर की जम्मू-कश्मीर यात्रा पर भी भारी एतराज़ प्रकट किया। जहां तक इस बयान का संबंध है, चाहे यह अमरीकी राष्ट्रपति की ओर से तो नहीं दिया गया, परन्तु अमरीका के प्रशासन द्वारा ऐसा कुछ पूरी तरह सोच-समझ के बाद ही किया गया प्रतीत होता है। अब तक अमरीकी प्रशासन ने कश्मीर विवाद संबंधी दोनों देशों के बीच एक तरह का संतुलन बनाने का ही यत्न किया था। वर्ष 2000 में अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए थे। उस समय 21 मार्च को नई दिल्ली में उन्होंने कहा था कि मैं जम्मू-कश्मीर में दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा के पक्ष में हूं और यह भी कि इस प्रदेश के संबंध में दोनों देशों को आपस में बातचीत करके इसका हल निकालना चाहिए। ट्रम्प ने अब तक कश्मीर मामले पर ऐसी ही नीति धारण किए रखी थी। अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटा दी गई थी और इस क्षेत्र को केन्द्र शासित राज्य का दर्जा दिया गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लगातार यह यत्न करते रहे हैं कि इसे पुन: राज्य का दर्जा दिया जाए, तो उस समय गोर का यह बयान और भी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। हम समझते हैं कि  पाक अधिकृत कश्मीर में गत वर्ष से जो हालात बने हुए हैं, जिस तरह वहां लाखों लोगों ने सड़क पर उतर कर पाकिस्तान के विरुद्ध रोष प्रदर्शन किए हैं, जिस तरह पाकिस्तान की सेना ने उन पर लगातार अत्याचार किया है और अब तक सैकड़ों ही कश्मीरियों को गोलियों से निशाना बनाया है। उससे पाक अधिकृत कश्मीर में हालात और भी बिगड़ चुके हैं और लगातार वहां के नेताओं द्वारा पाकिस्तान से अलग होने के बयान दिए जा रहे हैं। उनसे प्रतीत होता कि अब बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रदेश की तरह पाक अधिकृत कश्मीर भी उसकी गिरफ्त से निकलता जा रहा है। 
इन हालात ने पाकिस्तान के भारतीय जम्मू-कश्मीर पर उसके दावे को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बेहद कमज़ोर कर दिया है। जिस तरह की आंतरिक नीतियां पाकिस्तान की सेना अपने देश में अपना रही है, उससे पाकिस्तान का भविष्य और भी धूमिल होता दिखाई देता है। इससे भारत का पूरे जम्मू-कश्मीर पर अधिकार और भी मज़बूत हो गया है। चाहे पाकिस्तान ऐसा होते हुए भी भारत के जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा हिंसा फैलाने की नीति पर ही चलता रहे, परन्तु यह स्पष्ट है कि इस मामले पर वह अपनी लड़ाई हार चुका है जिससे उसकी निराशा में और भी वृद्धि ही होगी।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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