दुनिया में कितनी कीट प्रजातियां हैं
जीव वैज्ञानिकों ने पिछली तीन सदियों के प्रयासों से अब तक करीब 10 लाख कीट प्रजातियां पहचानकर उनका वर्णन किया है। कीट पृथ्वी पर जीवों का सबसे अधिक विविधतापूर्ण समूह है। इनमें आधे मीटर साइज़ की ततैया से लेकर अनाज के दाने के बराबर कीट भी हैं, और पानी में रहने वाले कीटों से लेकर ज़मीन में बिल बनाकर रहने वाले और हवा में उड़ने वाले कीट भी हैं।
अब प्रोसीडिंग्स ऑफ दी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज़ (यूएस) में प्रकाशित एक नया अध्ययन बताता है कि वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए कीट शायद वास्तविक संख्या का एक छोटा-सा अंश ही हैं। इस अध्ययन में सांख्यिकी की विधियों का उपयोग करके यह अद्भुत आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है कि पृथ्वी पर कीट प्रजातियों की संख्या संभवत: 2 करोड़ तक हो सकती है। यह पूर्व अनुमानों (60 लाख प्रजातियां) से 3 गुना से भी अधिक है। एक बेहतर अनुमान लगाने के लिए कनेक्टिकट विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिक रॉबर्ट कोलवेल और उनके साथियों ने कोस्टा रिका गुआनाकास्टे राष्ट्रीय उद्यान में पिछले कई वर्षों में किए गए कीट सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन किया और फिर इन आंकड़ों पर रोग-प्रसार विज्ञान में प्रयुक्त की जाने वाली सांख्यिकीय विधियों को लागू किया। शुरुआत में उन्होंने पैरासिटॉइड ततैयों के एक उपकुल (माइक्रोगैस्ट्रीने) पर गौर किया। पैरासिटॉइड उन कीटों को कहते हैं जो अपने जीवन चक्र की अपरिपक्व अवस्था में किसी अन्य पर परजीवी होते हैं। इन ततैयों का काफी विस्तृत व बारीकी से अध्ययन किया गया है। वैज्ञानिकों ने कोस्टा रिका में पाई जाने वाली ऐसी 3000 प्रजातियों का वर्णन किया है। तो कोलवेल की टीम ने यह जांच करने की ठानी कि उद्यान में किए गए कीट सर्वेक्षण इन ततैयों की विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं या नहीं। पिछले कई वर्षों में उद्यान में उड़ने वाले कीटों का सर्वेक्षण करने के लिए वैज्ञानिकों ने जो ट्रैप (शिकंजे) लगाए थे उनमें से मुख्य सेट में माइक्रोगैस्ट्रिने की 388 प्रजातियों का ब्यौरा दिया गया। इसके अलावा कुछ अतिरिक्त शिकंजों में 578 प्रजातियों को पहचाना गया। जब वैज्ञानिकों ने उन इल्लियों (कैटरपिलर) पर गौर किया जो परजीवी प्रकोप का शिकार हुई थीं तो उन्हें 889 ततैया प्रजातियों का पता चला।
रोचक बात यह रही कि जब कोलवेल की टीम ने इन दो समूहों को एक साथ देखा, तो पाया कि शिकंजों में कैद हुई प्रजातियां और कैटरपिलर की जांच से दिखी प्रजातियां एकदम अलग-अलग थीं। यानी इन दो समूहों के बीच ओव्हरलैप (अतिव्याप्ति) बहुत कम था। इसका एक ही मतलब हो सकता है कि ये दोनों विधियां उद्यान में उपस्थित माइक्रोगैस्ट्रिने प्रजातियों के एक-एक अंश को ही देख पा रही थीं। यदि दोनों तरीकों को जोड़कर सांख्यिकीय विधियां लागू की जाए, तो पता चलता है कि उद्यान में पूरी-पूरी 2394 माइक्रोगैस्ट्रिने प्रजातियां मौजूद हैं।
यदि यह सही है तो इसका मतलब है कि सर्वेक्षणों ने उद्यान के केंद्रीय भाग की माइक्रोगैस्ट्रिने प्रजातियों के मात्र छठे भाग (लगभग 16 प्रतिशत) को उजागर किया है। यदि इस प्रतिशत को पूरे उद्यान (53,945 ज्ञात प्रजातियां) पर लागू किया जाए, गुआनाकास्टे उद्यान में 3,32,846 प्रजातियां मौजूद हैं जिनमें से अधिकांश का अवलोकन ही नहीं किया गया है। इसके बाद शोधकर्ताओं ने इन गणनाओं को एक अन्य समूह (वृक्षों) पर लागू करके देखा। पूरी पृथ्वी पर वृक्षों की 73,000 प्रजातियां पाई जाती हैं और गुआनाकास्टे उद्यान में 1200 से 1500 प्रजातियां। अर्थात उद्यान में कुल वैश्विक वृक्ष प्रजातियों का लगभग 1.6 से 2.1 प्रतिशत पाया जाता है। यदि यही प्रतिशत कीटों पर भी लागू होता हो, तो पृथ्वी पर 1.33 करोड़ से 2.47 करोड़ कीट प्रजातियां होनी चाहिए। औसत के आधार पर यह माना जा सकता है कि पृथ्वी पर 2.03 करोड़ कीट प्रजातियां होंगी।
अध्ययन दल का कहना है कि उनका अनुमान थोड़ा कम ही बैठेगा। अलबत्ता संरक्षण के लिहाज़ से यह एक अच्छा आंकड़ा हो सकता है। और इससे हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि जैव विविधता का विस्तार कितना व्यापक है। (स्रोत फीचर्स)





