खाने के प्रति बच्चों में रुचि जगाएं
दोसाल की श्रेया का दोपहर के खाने के समय हमेशा उपद्रव आरंभ हो जाता है। उसकी मां रीना हमेशा गुस्से में उसके पीछे-पीछे खाने से भरी कटोरी लेकर घूमती रहती है। कटोरी में पालक, मटर, चावल मैश किया हुआ है। रीना को यह मालूम है कि यह खाना बेस्वाद है, उबला हुआ है किन्तु पौष्टिक होने की वजह से वह उसे खिला रही है लेकिन श्रेया यह भोजन ग्रहण करने के लिए तैयार नहीं है।
ऐसे में यह कहना ठीक होगा कि बच्चों को खाना खिलाना वाकई मुश्किल काम है। बच्चों में खाने के प्रति अरूचि आम बात है। खाने के प्रति बच्चों में इस अरूचि का क्या कारण है? उन्हें कैसे खिलाया जा सकता है इस संदर्भ में यहां जानिए।
बच्चों में खाने के प्रति अरूचि का मुख्य कारण स्वाद का पता न होना है। जब बच्चा जन्म लेता है तो वह दूसरे या तीसरे दिन से मां का स्तनपान करने लगता है। इस प्रकार वह जन्म के बाद एक ही स्वाद से परिचित हो जाता है और वह है ‘मां का दूध। वह किसी अन्य प्रकार के भोजन से परिचित नहीं होता है। यह क्रम लगभग 4 महीने तक चलता है। जब उसे बाहर का दूध देना आरंभ किया जाता है तो चूंकि वह अन्य स्वाद से परिचित नहीं है, इसीलिए उसे वह दूध अच्छा नहीं लगता।
हमारे घरों में तरह-तरह के भोजन बना कर बच्चों को दिए जाते हैं। यहां तक कि एक ही दिन में दो या तीन प्रकार के भोजन तैयार किए जाते हैं। चूंकि बच्चा केवल मां के दूध से ही परिचित होता है वह उस भोजन को इतनी आसानी से ग्रहण नहीं कर पाता और थूकना आरंभ कर देता है। जबरदस्ती करने पर उल्टी कर देता है।
इस समस्या से निपटने का एक ही कारगर तरीका है कि बच्चों में पहले भोजन के प्रति उत्साह उत्पन्न किया जाये तथा उन्हें स्वाद से परिचित करवाया जाए। यह कार्य आसान नहीं है, अत: आप एक ही प्रकार का भोजन चयन करे और उसे लगातार कुछ हफ्तों तक देती रहें। शुरू-शुरू में वह थूकेगा, फिर धीरे-धीरे वह इस भोजन को स्वीकार कर लेगा। अत: यहां तय है कि आप बच्चों को जो भी खिलाना चाहें। इसी प्रकार उसे एक-एक कर भोजन के स्वाद से अवगत करवाएं। आप पाएंगे कि बच्चा धीरे-धीरे चीजें ग्रहण करने लगा है।
बच्चों को खाना देने के क्रम में कठोरता न बरतें। पेट छोटा होने की वजह से वह कई बार थोड़ा-थोड़ा भोजन स्वीकार कर पाता है। बच्चों को उचित व सही ढंग से खाना खिलाने का मसला सुलझाना इतना आसान नहीं है। आप सही समय पर उचित खाने का स्पष्ट एवं निश्चित दिशा निर्देश करें। खाने के प्रति अनिश्चितता की प्रवृत्ति जीवन भर की आदत में परिवर्तित हो सकती है। अत: कुछ बारीकियों को मद्देनज़र रखते हुए आप अपने लाडले को खाने के प्रति रुचि जगा सकते हैं। जब तक बच्चा मां का दूध पीता रहेगाए तब तक बाहर का ठोस आहार लेने में कोई रूचि नहीं रखेगा। माताओं को शुरू में परेशानी जरूर होगी किन्तु जल्दी ही समस्या का निदान हो जाएगा। (उर्वशी)

