करंट भी पैदा करती है नक्षत्र दृष्टा मछली

नक्षत्र दृष्टा मछली विश्व की सर्वाधिक बदसूरत समुद्री मछली है। यह एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करते समय ऊपर की ओर देखती रहती है, अत: इसे यह नाम दिया गया है। अंग्रेजी में इसे स्टार गेज़र कहते हैं। कुछ लोग इसे स्वर्ग की तरफ देखने वाली मछली भी कहते हैं। वह विश्व के अधिकांश सागरों और महासागरों में पायी जाती है, किन्तु यह उष्णकटिबंधीय और उप उष्णकटिबंधीय सागरों में अधिक मिलती हैं। नक्षत्र दृष्टा मछली की 20 से अधिक जातियां हैं। इसकी अधिकांश जातियां गहरे पानी में मिलती हैं, किन्तु कुछ जातियां ऐसी भी हैं, जो उथले पानी में रहना अधिक पसंद करती हैं। यह प्राय: सागर तल की मिट्टी अथवा रेत में गड़ी पड़ी रहती है। यह अपनी छाती के बड़े-बड़े मीनपंखो का उपयोग फावड़े की तरह करती है तथा सागर तल में गढ़ा तैयार करती है और उसी के भीतर चली जाती है। इस समय केवल इसकी आंखें और नथुने ही बाहर रहते हैं। नक्षत्र दृष्टा मछली कभी-कभी सागर तल में 30 सेंटीमीटर भीतर तक गड़ जाती है। इसके शरीर में कॉमाफ्लास बहुत अधिक होता है, अत: सागर तल में पड़ी हुई यह सरलता से दिखाई नहीं देती। अपने को सागर तल में गाड़ लेने के बाद बहुत कम चलती-फिरती है और प्राय: लंबे समय तक गड़ी पड़ी रहती है। नक्षत्रा दृष्टा मछली की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसकी अधिकांश जातियों में नथुने मुंह के भीतर खुलते हैं। यह किसी मछली में पाया जाने वाला विलक्षण तथ्य है। 
यह अपने नथुनों से ही पानी भीतर लेती है, जो गलफड़ों से बाहर निकलता है। इसके ओंठों पर झालर जैसी मांसल संस्पर्शिकाएं होती हैं, जो पानी में मिली हुई रेत को पानी से अलग करके एक प्रकार से फिल्टर का कार्य करती है। इसके शरीर पर विद्युत उत्पादक अंग होते हैं, जिनसे यह 50 वोल्ट तक की विद्युत उत्पन्न कर सकती है। यह विद्युत इतनी शक्तिशाली होती है कि इसे पकड़ने वाला इसे तुरंत छोड़ देगा अथवा दूर फेंक देगा और आश्चर्यचकित सा रह जाएगा। नक्षत्र दृष्टा मछली के विद्युत उत्पादक अंग इसकी आंखों की परिवर्तित मांसपेशियों में होते हैं। विद्युत उत्पन्न करते समय इसकी आंखों की प्रत्येक मांसपेशी एक विद्युत प्लेट का कार्य करती है। नक्षत्रा दृष्टा मछली अपने शरीर की विद्युत द्वारा शत्रुओं से अपनी रक्षा करती है। नक्षत्रा दृष्टा मछली की एक अन्य विशेषता यह है कि इसके शरीर पर विषैले कांटे होते हैं। ये कांटे भी आत्मरक्षा के काम आते हैं। नक्षत्र दृष्टा मछली के विषैले कांटों में इतना तेज विष होता है कि इसका कांटा चुभ जाने पर व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है। नक्षत्र दृष्टा मछली बड़ी सुस्त और आलसी होती है। नक्षत्र दृष्टा मछली की शारीरिक संरचना सामान्य समुद्री मछलियों से काफी भिन्न होती है। इसकी लंबाई 30 सेंटीमीटर होती है। अमरीका के अटलांटिक महासागर के तटों पर 55 सेंटीमीटर तक की यह मछली पायी जाती है। नक्षत्र दृष्टा मछली का प्रजनन सामान्य समुद्री मछलियों की तरह होता है। यह प्रजनन काल में गहरे पानी में चली जाती है और यहीं अंडे देती है। इसके अंडे एक लंबे समय तक प्लैकटन का भाग बनकर रहते हैं और सागर की सतह पर उतराते रहते हैं। ये प्राय: समुद्री हवाओं और सागर की लहरों के साथ बहते हुए दूर-दूर तक फैल जाते हैं। इस मध्य में अनेक समुद्री जीवों का आहार बन जाते हैं तथा विषम परिस्थितियों में बहुत से अंडे नष्ट हो जाते हैं। इसके बचे हुए अंडे परिपक्व होने पर फूटते हैं और इनसे बच्चे निकलते हैं। नवजात नक्षत्र दृष्टा मछली लगभग 2.5 सेंटीमीटर लंबी होती है एवं इसकी बाहरी शारीरिक संरचना, रूपरंग आदि समुद्री पर्च की तरह सामान्य होते हैं। नवजात नक्षत्र दृष्टा मछली की आंखें सिर के दोनों ओर होती हैं एवं मुंह क्षीतिज होता है। इसके विकास के साथ ही इसका सर धीरे-धीरे चपटा होने लगता है तथा आंखें ऊपर की ओर बढ़ने लगती हैं। इसी समय इसकी आंखों की कुछ मांसपेशियों में परिवर्तन होता है और ये विद्युत उत्पादक अंगों में बदल जाती हैं। इस समय यह वयस्क नक्षत्र दृष्टा मछली की तरह दिखाई देने लगती है।
भूमध्य सागर में रहने वाली नक्षत्र दृष्टा मछली की जानकारी प्राचीनकाल से ही रोम और यूनान के लोगों को थी। इन्होंने ही सर्वप्रथम इसका वैज्ञानिक अध्ययन किया और इसकी आंखों के आधार पर इसे स्टार गेज़र अर्थात नक्षत्र दृष्टा नाम दिया। नक्षत्र दृष्टा मछली बहुत बदसूरत होती है। अत: इसे कोई भी व्यक्ति खाना पसंद नहीं करता, किंतु कुछ भागों में इसे बहुत बड़ी संख्या में पकड़ा जाता है और भोजन के रूप में उपयोग में लाया जाता है। नक्षत्र दृष्टा मछली को खाने वाले लोगों का मत है कि इसका मांस बहुत अच्छा होता है तथा अन्य समुद्री मछलियों की तुलना में अधिक स्वादिष्ट भी होता है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

#करंट भी पैदा करती है नक्षत्र दृष्टा मछली