उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव -योगी के नेतृत्व में भाजपा तैयार, विपक्षी खेमे में सीटों पर तकरार

राजनीतिक महत्व के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्यों में शुमार उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अब राजनीतिक गतिविधियों का आगाज़ हो गया है। उत्तर प्रदेश की सत्ता पर बीते करीब दस साल से काबिज़ भाजपा ने संगठन में फेरबदल करके अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, कांग्रेस और सपा में अभी सीटों के बंटवारे को लेकर ‘रस्साकसी’ देखने को मिल रही है। कांग्रेस और सपा के आलाकमान से इतर राजनीति के स्थानीय ‘क्षत्रप’ सीटों के बंटवारे को लेकर की जा रही बयानबाजी से इस मामले को और गंभीर बना रहे हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर अब तक हुई कवायद पर गौर करें तो कांग्रेस 150 से 200 सीटों पर अपना दावा ठोक रही है। जबकि समाजवादी पार्टी जीत के फार्मूले की बात करके कांग्रेस को सिर्फ पचास सीट देने का संकेत दे रही है।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने एक बड़ा बयान देकर इस चर्चा को और हवा दे दी है। कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि वे केवल 150 सीटें नहीं बल्कि दो 100 सीटों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गठबंधन के तहत चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा सीटें मिलनी ज़रूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘सीट शेयरिंग’ का यह मामला अक्तूबर के महीने में ही सुलझा लिया जाना चाहिए ताकि दोनों दल अपने उम्मीदवारों को चुनाव की तैयारी के लिए पर्याप्त समय दे सकें। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस के बीच मामला केवल सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि ‘सुविधाजनक’ सीटों के चयन को लेकर है। 
यही नहीं, कांग्रेस मुस्लिम बहुल सीटें चाहती है जबकि सपा उसे मुस्लिम बहुल सीटें देने के मूड में नहीं है। इसके अलावा कांग्रेस जिन क्षेत्रों से लोकसभा चुनाव जीती है, उन इलाकों की ज्यादा से ज्यादा विधानसभा सीटें अपने पास रखना चाहती है। इसी कवायद के तहत कांग्रेस ने चुनाव लड़ने के लिए ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम प्रभाव वाली करीब डेढ़ सौ सीटें चिन्हित कर लीं हैं। सपा पर दबाव बनाने के लिए पार्टी के अपने मुस्लिम चेहरों इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद को सक्रिय किया है। पार्टी नेतृत्व का इरादा इस बार राज्य में कम से कम सौ सीटों पर लड़ने का है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अगले सप्ताह से सपा से सीट बंटवारे के लिए संभावित बातचीत से पहले पूरी तैयारी की गई है। प्रदेश की 403 सीटों को कांग्रेस ने तीन श्रेणियों में विभाजित किया है। 
कांग्रेस का यह भी कहना है कि उसके पास प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार मौजूद हैं। ऐसे में कांग्रेस गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी को लेकर मजबूत दावा पेश करने की तैयारी में है। कुल मिलाकर कांग्रेस का फोकस ‘गठबंधन’ के भीतर सम्मानजनक सीट हिस्सेदारी हासिल करने और उसी के आधार पर अपनी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने पर है। उधर, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश शासन में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की तैयारी पर गौर करें तो समाजवादी पार्टी अपने सहयोगी कांग्रेस पार्टी को कम से कम सीट देना चाहती है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का कहना है कि बात सीटों की संख्या पर नहीं है। बात इस बात पर है कि गठबंधन के कितने प्रत्याशी जीत सकते हैं?
सपा के सूत्रों का यह भी कहना है कि कांग्रेस के पुराने इतिहास को लेकर ज्यादा सीट देने के बावजूद भी कांग्रेस की जीत का प्रतिशत काफी कम रहता रहा है। अगर यही चलन रहा तो उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा को बेदखल करने में परेशानी होगी। यही नहीं उत्तर प्रदेश विधानसभा में सीटों के गणित के लिहाज से समाजवादी पार्टी एक बार फिर से ‘बड़े भाई’ की भूमिका में रहना चाहती है जबकि, कांग्रेस का कहना यह है कि गठबंधन के साथी बराबर नहीं तो कम से कम ‘सम्मानजनक’ स्थिति में एक साथ मिलकर पूरी मजबूती से चुनाव लड़े, तभी भाजपा को हराने में आसानी होगी। फिलहाल सीटों के बंटवारे को लेकर अपनी ताकत दिखाने का दौर कांग्रेस और सपा में चल रहा है।
उत्तर प्रदेश की वर्तमान 18वीं विधानसभा में दलीय स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि विधानसभा में भाजपा के सर्वाधिक 255 विधायक हैं। यही वजह है कि भाजपा एनडीए के साथ लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 101 सदस्यों के साथ समाजवादी पार्टी मुख्य विपक्षी दल है। इसी प्रकार अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के 9, सुलेहदेव भारतीय समाज पार्टी के 6, निर्बल इण्डियन शोषित हमारा आम दल के 5 तथा असम्बद्ध सदस्य 3 हैं। इसके साथ ही वर्तमान विधानसभा में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 2 विधायक भी हैं। विजय विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के कारण ही समाजवादी पार्टी इस चुनाव में सीटों के लिहाज से उसे गंभीरता से नहीं ले रही है।
यही वजह है कि कांग्रेस द्वारा प्रायोजित दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में सपा मुखिया अखिलेश यादव राज्यसभा चुनाव में व्यस्त होने का बहाना लेकर दिल्ली नहीं पहुंचे। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश चुनाव की चिंता है। इसलिए वह राष्ट्रीय राजनीति की बजाय अपना पूरा ध्यान उत्तर प्रदेश में ही रखना चाहती है। उधर, कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में न पाने के लिए कुछ है ना खोने के लिए, इसलिए कांग्रेस पार्टी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में वोट चोरी व अन्य मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर अपनी प्रभावी मौजूदगी दर्ज करने में लगी है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा लखनऊ से लेकर दिल्ली तक एकजुट है तथा सत्ता से लेकर संगठन तक बड़े बदलाव कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है जबकि, विपक्षी खेमे में अभी सीटों को लेकर तकरार है।

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