संतोषजनक रहा मतदाता सूची का संशोधन
पंजाब में चार महीने की मशक्कत के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त अनिंदिता मित्रा द्वारा अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। उन्होंने प्रदेश की सभी मान्यता प्राप्त पार्टियों के प्रतिनिधियों को ये कापियां सौंपीं और साथ ही यह भी अपील की कि जो योग्य व्यक्ति किसी कारण अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाने से रह गए हैं या नए मतदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं, वह चुनाव आयोग की एप द्वारा ऑनलाइन या संबंधित बूथ स्तर के अधिकारी से फार्म नं. 6 भर कर आवेदन कर सकते हैं। मतदाता सूची के हुए विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया में कुछ विशेष बातें ज़रूर सामने आई हैं। इस अभ्यास के लिए 89,000 से अधिक बूथ स्तर के एजेंटों ने बूथ स्तर के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्य किया है और मतदाता सूचियों को कई चरणों से गुज़र कर अंतिम रूप दिया गया है। चाहे 7 लाख से अधिक नए मतदाता दर्ज किए गए हैं परन्तु इसके बावजूद पहली मतदाता सूची के मुकाबले अब मतदाताओं की कम रजिस्ट्रेशन हुई है। पिछली सूची में कुल 2.14 करोड़ मतदाता दर्ज थे, परन्तु मौजूदा अंतिम सूची में पहले से 13.60 लाख कम दर्ज हुए हैं।
ज्यादातर मतदाताओं के स्थायी रूप से प्रदेश से बाहर बस जाने के कारण, मृत्यु हो जाने के कारण या सूची में दोहरे नाम दर्ज होने के कारण 86 हज़ार से अधिक मतदाता अयोग्य करार दिए गए हैं। प्रदेश में कुछ महीनों के भीतर चुनाव होने जा रहे हैं। इसलिए मतदाता सूची पर यहां विवाद उठने की संभावना बेहद कम हो गई है, जबकि गत वर्ष से देश भर में शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में जहां अनेक त्रुटियां सामने आई थीं, वहीं पारदर्शिता की कमी के कारण जन-साधारण और ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों के भीतर आशंकाएं भी बढ़ गई थीं, जिन्हें अब तक भी दूर नहीं किया जा सका, जिस कारण आज भी इस संबंध में हज़ारों मामले विभिन्न अदालतों में लटक रहे हैं। इसी कारण मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाया जाता रहा है। इस मामले पर आज भी कांग्रेस सहित कई अन्य बड़ी पार्टियां मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर बड़े आंदोलन कर रही हैं। विशेष रूप से बंगाल और बिहार में यह प्रक्रिया तब शुरू की गई थी, जब वहां इन राज्यों में चुनाव होने वाले थे। पूर्ण स्टाफ न होने के कारण यह प्रक्रिया और भी जटिल बन गई थी, जिस कारण करोड़ों ही योग्य मतदाता मताधिकार से वंचित रह गए थे। इस प्रक्रिया के लम्बे और जटिल होने के कारण विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग के साथ-साथ भाजपा और केन्द्र सरकार पर भी अनेक आरोप लगाए थे। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का यह सिलसिला अब तक भी जारी है।
यदि मत पुनरीक्षण का यह कार्य संबंधित राज्यों के होने वाले चुनावों से बहुत समय पहले किया गया होता या वहां चुनाव के बाद यह प्रक्रिया शुरू की गई होती तो इसे लेकर ज्यादा विवाद नहीं उठने थे, न ही वहां चुनाव प्रक्रिया पर बड़े प्रश्न-चिन्ह लगने थे, परन्तु देश भर में मचे हड़कम्प के मुकाबले में पंजाब में इस प्रक्रिया को जिस सन्तोषजनक ढंग से पूर्ण किया गया है, उसे देश भर के लिए एक उदाहरण के रूप में पेश किया जा सकता है। इसलिए ही प्रदेश की लगभग सभी पार्टियों ने इस प्रक्रिया के पूर्ण होने पर संतोष व्यक्त किया है, जो प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और भी मज़बूत और स्वस्थ बनाने में बड़ी सीमा तक सहायक हो सकेगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

