सफेद दूध का काला कारोबार

पंजाब की अर्थव्यवस्था कृषि और इसके सहायक कारोबार डेयरी उत्पादन पर टिकी है। अगर पंजाब को दूध की धरती कहा जाए, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता के आधार पर पंजाब देश के अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल है। हमारे गांवों की सुबह भैंसों और गायों का दूध दोहने से होती है और शहरों की सुबह दूध से बनी चाय से। हमारे भोजन में दूध सबसे पौष्टिक आहार माना गया है और यह लगभग हर पंजाबी की दैनिक खुराक का हिस्सा है। ऐसे में अगर दूध की शुद्धता पर सवाल उठते हैं, तो यह मुद्दा सीधे हमारे स्वास्थ्य से जुड़ जाता है।
पंजाब में दूध में मिलावट के बारे में सामने आ रहे सरकारी आंकड़े और वैज्ञानिक अध्ययन इस मामले की गंभीरता की ओर संकेत देते हैं। वर्तमान में पंजाब में दूध की गुणवत्ता और मिलावट एक बड़ी समस्या बन चुकी है। केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में पेश किए गए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 के दौरान पंजाब में दूध के जांच किए गए कुल 8,179 नमूनों में से 1,724 मिलावटी पाए गए, जिसका सीधा मतलब है कि जांच किए गए हर पांच में से एक नमूना निर्धारित मापदंडों पर पूरा नहीं उतरा। साल 2024-25 के दौरान पंजाब में जांच किए गए कुल 4,131 नमूनों में से 748 सही नहीं पाए गए। यह भी सोचने वाली बात है कि जिन नमूनों की जांच नहीं हुई, उनमें से कितने नमूने फेल हो सकते थे।
बात यहीं खत्म नहीं होती। गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसिज़ यूनिवर्सिटी, लुधियाना के खोजकर्ताओं की साल 2024 में वेटरनरी प्रैक्टिशनर में प्रकाशित रिपोर्ट के आंकड़े और भी दिल दहला देने वाले हैं। यूनिवर्सिटी के खोजकर्ताओं के एक वैज्ञानिक अध्ययन में कुल 732 नमूनों में 12 अलग-अलग मिलावटों की जांच की गई, जिससे पता चला कि इन नमूनों में से 21.86 प्रतिशत में पाई, 14.75 प्रतिशत में नमक, 12.70 प्रतिशत में न्यूट्रलाइज़र, 2.19 प्रतिशत में डिटर्जेंट, 1.91 प्रतिशत में यूरिया और 1.91 प्रतिशत में फार्मेल्डिहाइड की मिलावट की गई थी। इसके अलावा कुछ नमूनों में केन शुगर, स्टार्च और मिल्क पाउडर की मिलावट भी सामने आई। 
दूध में पाई मिलाना शायद मिलावट का सबसे पुराना और आम तरीका है। इससे दूध की मात्रा बेशक बढ़ जाती है, परन्तु पोषण के साथ-साथ दूध की फैट और सॉलिड्स भी कम हो जाते हैं। कुछ मिलावटखोर उस कमी को पूरा करने हेतु सेहत के लिए हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें ग्लूकोज, शुगर, बेकिंग सोडा, वॉशिंग सोडा, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और फॉर्मेलिन आदि शामिल हैं। 
इनमें से कुछ पदार्थों का इस्तेमाल दूध को गाढ़ा दिखाने, उसका कंपोजीशन बदलने या उसे ज़्यादा समय तक संभालने की कोशिश के रूप में किया जाता है। दूध में ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल हमारेस्वस्थ्य के लिए कई गंभीर खतरे पैदा करता है। जब तक गांव में दूध इकट्ठा करने वाले  केन्द्र पर स्वच्छता के मापदंडों की प्रमाणिकता, दूध को समय पर ठंडा करने की प्रमाणिकता और हर बैच की गुणवत्ता चेक करने का प्रबंध नहीं किया जाता, तब तक मिलावट की इस गंभीर समस्या का कोई समाधान नहीं हो सकता।
पंजाब में दूध का बाज़ार दो भागों में बांटा जाता है। पहला भाग खुले दूध का बाज़ार और दूसरा भाग है पैक्ड दूध का बाज़ार। जब भी दूध में मिलावट की समस्या का ज़िक्र होता है तो सरकारी आंकड़े यह दर्शाने की कोशिश करते हैं कि मिलावट सिर्फ खुले दूध के बाज़ार में होती है जबकि पैक्ड दूध पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन अब हकीकत से पर्दा उठ चुका है। पैक्ड दूध बाज़ार में शामिल पंजाब के प्रसिद्ध सरकारी संस्था के नमूने फेल होने समाचार अखबारों की सुर्खियां आम ही बन रहे हैं। हाल ही में भारतीय सेना को भेजी गई दूध की खेप में गंभीर खामियां पाई गई थीं, जिससे सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। 
सरकार दूध में मिलावट को रोकने के लिए सिर्फ छापेमारी करती है जबकि यह इस समस्या का पूरा समाधान नहीं है। सिर्फ किसी दुकान से नमूने लेकर उसे फेल कर देना काफी नहीं है।  सबसे बड़ी और ज़रूरी बात यह है कि मिलावट के धंधे में शामिल लोगों के खिलाफ  सख्त सज़ा का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि मिलावटखोरों के मन में डर पैदा हो सके।
-मो. 94176-61067

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