राजनीति के लिए गुरु घर का इस्तेमाल उचित नहीं
गुरुद्वारा साहिब सिखों के लिए आस्था, सेवा, विनम्रता और धार्मिक मर्यादा के प्रतीक होते हैं। इन पवित्र स्थलों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए लेकिन आम आदमी पार्टी के समर्थकों और उनके युवा विंग के रूप में काम करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान 10 अक्तूबर 2026 को दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारा बंगला साहिब परिसर में जिस तरह राजनीतिक बैठक की गई, पोस्टर लहराए गए और नारेबाज़ी की गई, वह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
पिछले दिनों कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर चले लम्बे संघर्ष के दौरान गुरुद्वारा बंगला साहिब प्रदर्शनकारियों के लिए आश्रय बना रहा। इस पर न सरकार को आपत्ति हो सकती है, न पुलिस को और न ही किसी अन्य राजनीतिक या धार्मिक संगठन को, क्योंकि गुरुद्वारों के दरवाजे प्रात: सभी के लिए खुले रहते हैं, लेकिन 10 अक्तूबर के प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के समर्थकों ने जिस तरह गुरुद्वारा साहिब को धरना स्थल बनाने की कोशिश की, वह किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन सड़कों या किसी मैदान में किए जा सकते हैं, गुरुद्वारा परिसर में नहीं।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारा साहिब के परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए किया। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के मुताबिक कुछ लोगों ने पहले गुरुद्वारा साहिब में ठहरने और लंगर की सुविधा का लाभ उठाया व बाद में पोस्टर निकालकर नारेबाज़ी शुरू कर दी। कमेटी का कहना है कि ऐसी कार्रवाई गुरु घर की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या किसी भी राजनीतिक दल को अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए? धार्मिक स्थलों की पवित्रता और निष्पक्षता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए।
इस घटना का दूसरा पहलू गुरुद्वारा साहिब में पुलिस की कथित मौजूदगी को लेकर आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों का भी है। अफसोस की बात यह है कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने न केवल गुरुद्वारा साहिब का राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया, बल्कि अपने कृत्य को छिपाने के लिए दुष्प्रचार का अभियान भी चला दिया। इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि पार्टी के 15 विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल श्री अकाल तख्त साहिब पर भी भेज दिया गया।
आम आदमी पार्टी के झूठ का पर्दाफाश दिल्ली पुलिस और दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाने के बाद हुआ। दूसरी ओर ‘आप’ ने ऐसा कोई वीडियो भी प्रस्तुत नहीं किया, जो मुख्यमंत्री के इस आरोप को साबित करता हो कि गुरुद्वारा परिसर के भीतर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
जिन दो अन्य वीडियो को गुरुद्वारा द्वारा के अंदर पुलिस की मौजूदगी का प्रमाण बताया गया, उनमें से एक गुरुद्वारा साहिब के गेट का था और दूसरा सुबह 11 बजे का था। उस समय पुलिसकर्मी अशोक रोड से गुरुद्वारा परिसर के रास्ते पुलिस मुख्यालय की ओर जा रहे थे और लगभग तीन मिनट के दौरान उस रास्ते से गुजर गए। उस रास्ते से गुजरते समय जूते उतारना या सिर ढकना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि दरबार साहिब का मुख्य हिस्सा यहां से कई सीढ़ियां चढ़ने के बाद शुरू होता है।
दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने स्पष्टीकरण दिया कि वीडियो में दिखाई देने वाला रास्ता जूते उतारने वाली जगह की ओर जाता था और वायरल क्लिप को उसके पूरे संदर्भ में देखने की ज़रूरत है। इसलिए केवल एक छोटी वीडियो क्लिप के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पूरी फुटेज और घटनास्थल की पुष्टि की जानी चाहिए। दिल्ली कमेटी की ओर से पुलिस को शिकायत दिए जाने और मामले में कानूनी कार्रवाई की खबरों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। शिकायत में आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा भंग करने के आरोप लगाए गए हैं।
गुरु घर की मर्यादा को कोई भी राजनीतिक दल अपनी सुविधानुसार परिभाषित नहीं कर सकता और न ही इसे राजनीतिक आरोपों का हथियार बनाया जा सकता है। मर्यादा का सम्मान तथ्यों, संयम और निष्पक्षता के साथ ही कायम रखा जा सकता है।
-राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा

