दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम

विगत दिवस मानसा में परविन्दर सिंह झोटा की गोलियां मार कर हत्या करने से गुस्से का माहौल पैदा हुआ है। इससे एक बार फिर प्रदेश भर में फैला नशे के प्रचलन का मामला फिर उभर कर सामने आया है। इस बेहद गम्भीर हो चुके मुद्दे संबंधी विगत अवधि में व्यापक स्तर पर चर्चा चलती रही है। पंजाब की तत्कालीन प्रदेश सरकारों ने बड़ी संख्या में नशे की राज्य में तस्करी और बिक्री रोकने के लिए पूरा ज़ोर लगाया था, परन्तु यह मामला इस कद्र जटिल बन चुका है, जिसकी उलझनों को सुलझा पाना बेहद कठिन है। यह बात भी लम्बी चर्चा का विषय बनी रही कि सीमा पार से यह सिंथैटिक नशे कैसे आते हैं?
 चाहे पंजाब के साथ पाकिस्तान की लम्बी सीमा जुड़ी है इस ओर से ड्रोन और अन्य साधनों द्वारा नशे आते हैं, परन्तु इनके समुद्र मार्ग से विभिन्न स्थानों पर पहुंचने की सूचनाएं भी सामने आती रही हैं। पंजाब के ज्यादातर नेता और पंजाब सरकार भी यह आरोप लगाती रही है कि ज्यादातर नशे का व्यापार गुजरात की बंदरगाहों द्वारा होता है। यह भी अहम मुद्दा है कि कठिन पहेली को कैसे सुलझाया जाए, ज्यादातर लोगों के लिए यह धंधा धन की कमाई का एक स्रोत बना रहा है, जिसमें धीरे-धीरे ज्यादातर पक्ष शामिल हो गए। उनके आर्थिक हित इस कद्र इस धंधे से जुड़ गए हैं, कि इससे समूचा तंत्र ही उलझ गया है। प्रतीत होता है कि इस प्रचलन को मज़बूती से हाथ डालना बेहद मुश्किल बन गया है। पुलिस तंत्र के बस में यह बात आती न देख कर नशे के विरोध में कई संगठन उठ खड़े हुए हैं, जिनकी कार्रवाइयों के कारण, उनका इस धंधे के व्यापारियों के साथ टकराव होता रहता है और दुश्मनी भी पड़ जाती है। झोटा और उसके साथियों ने भी नशा विरोधी संगठन बनाया था और वह हमेशा आगे होकर इस प्रचलन के विरोध में खड़े हो जाते थे।
इस हत्या की कड़ी का संबंध कुछ वर्ष पहले मानसा में घटित ऐसे ही घटनाक्रम से जुड़ता है, जिसमें अब हमलावर होकर झोटा को मारने वाले व्यक्ति अश्विनी कुमार को ऐसा धंधा करने के आरोप में झोटा और उसके साथियों ने पकड़ कर उसे जूतों का हार पहनाकर शहर में घुमाया था। इस बात को लेकर जहां नशे के कारोबारी को जेल जाना पड़ा था, वहीं झोटा पर भी एक पहली कार्रवाई के साथ-साथ कई अन्य ऐसी कार्रवाइयां करने के कारण मामले दर्ज थे। कुछ वर्षों बाद उसी व्यक्ति की ही दवाइयों की दुकान में हुई झोटा और उसके साथियों का टकराव खूनी घटनाक्रम में बदल गया, जिसने व्यापक स्तर पर जहां लोगों के भीतर गुस्से की लहर पैदा की है, वहीं एक बार फिर इस नशे के प्रचलन के घिनौने घटनाक्रम को सामने लाया है। चाहे आरोपी को पकड़ लिया गया है परन्तु इस मामले की विस्तारपूर्वक और पूरी जांच के बाद संबंधित आरोपियों को कड़ी सज़ा दी जानी ज़रूरी है, ताकि यह गम्भीर घटना आगामी समय में इस काले धंधे को कम करने में कुछ सहायक हो सके।


—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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