खेत को खाती बाड़

पड़ोसी देश पाकिस्तान पहले से ही भारत के लिए बड़ा सिरदर्द बना रहा है। विगत अवधि से जिस कद्र दोनों देशों के संबंध बेहद उलझे और गम्भीर बने रहे हैं, उनसे भविष्य में भी शीघ्र कहीं हालात के सामान्य बनने की उम्मीद नहीं की जा सकती। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था कि आप दोस्त तो बदल सकते हैं परन्तु पड़ोसी नहीं। उनकी इस बात में बड़ी सच्चाई छुपी हुई है, क्योंकि हमारे पड़ोसी देश की विगत लम्बी अवधि से बनी सरकारों ने भारत के विरुद्ध अक्सर ज़हर ही नहीं उगला, अपुति इसे हमेशा परेशान करने के लिए ऐसी योजनाओं को अंजाम भी दिया है, जिन्होंने अब तक भारत का प्रत्येक पक्ष से भारी नुकसान किया है।
आज पाकिस्तान जहां तरह-तरह के आतंकवादियों का गढ़ माना जाने लगा है, वहीं अ़फगानिस्तान और अन्य मार्गों द्वारा यहां हथियारों के साथ-साथ नशे की बड़ी खेप भी पहुंचती रही हैं, जिनसे बड़ा लाभ कमाने के लिए पाकिस्तान के प्रत्येक स्तर के तस्करों के तार हमेशा वहां के प्रशासन के साथ भी जुड़े रहते हैं। वे बड़ी खेप किसी न किसी तरीके से भारत पहुंचाने के यत्नों में रहते हैं। पाकिस्तान की पंजाब के साथ लगभग 553 किलोमीटर सीमा लगती है, जिसके द्वारा नशा, हथियार और विस्फोटक सामग्री इधर लगातार भेजी जाती है, जिसने पंजाब के सामाजिक जीवन को एक तरह से बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। पंजाब के कई संगठनों और तस्करों के साथ उधर के आतंकवादी संगठनों तथा तस्करों के तार जुड़े रहते हैं, जिस कारण सीमा पार से आने वाली ऐसी सामग्री को रोकना बेहद कठिन हो गया है। एक समय था जब पड़ोसी के ऐसे व्यवहार से बेहद परेशान होकर पंजाब की सीमाओं पर बाड़ लगाई गई थी, ताकि तस्करों को रोकने में बड़ी सहायता मिल सके परन्तु इसके बावजूद नए-नए तरीके अपनाकर पड़ोस के आसामाजिक तत्व, जिन्होंने पाकिस्तान में भी पूरी तरह से ज़हर घोला हुआ है, सीमाओं द्वारा बहुत हद तक घुसपैठ करने में सफल हो जाते हैं। अब नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी होने लगा है। इधर के लोग ही नहीं अपितु दूसरी ओर सीमा के साथ लगते पाकिस्तानी गांवों के लोग भी तस्करों की गतिविधियों से बेहद ख़ौफज़दा हैं, क्योंकि इस ओर अपनी सामग्री भेजने के लिए यह सीमा के साथ लगते गांवों का इस्तेमाल करते हैं। इस अमल ने समाचार के अनुसार वहां के आम लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। लाहौर, कसूर और नारोवाल ज़िलों की सीमाओं पर बसे हुए लोगों के अनुसार सायं होते ही तस्कर खेतों में ड्रोन उड़ाने और उतारने की कार्रवाइयां शुरू कर देते हैं। कई बड़े तस्करों के इन कामों के लिए विशाल नैटवर्क बने हुए हैं, जिनके तार सीमा पार के ऐसे लोगों के साथ जुड़े हुए हैं। पाकिस्तान के सीमांत गांवों के लोगों ने तस्करों की कार्रवाइयां रोकने के लिए वहां के प्रशासन से अपीलें की परन्तु उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
सीमा पार से हैरोइन और चिट्टे का कारोबार लगातार जारी है। इसी कारण सुरक्षा बलों द्वारा ऐसे तस्करों और आरोपियों को पकड़ने के और उनसे भारी मात्रा में नशीले पदार्थ मिलने के समाचार मिलते रहते हैं, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में ऐसी सामग्री की बहुत कीमत है। इसके लिए दोनों तरफ के ऐसे तत्वों का इस काम में तालमेल बना रहता है। इस तस्करी के धंधे के नैटवर्क को तोड़ने के लिए पंजाब के 200 किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र में एंटी ड्रोन सिस्टम लगाए गए हैं, जिनसे बहुत सीमा तक सुरक्षा बल उधर से भेजे ड्रोनों को पकड़ने में सफल हो जाते हैं। इस प्रबंध को लागू किए हुए चाहे वर्ष भर का समय हुआ है परन्तु इसके बावजूद भी प्रशासन को पूरी सफलता मिलती दिखाई नहीं दे रही। इसका एक कारण बाड़ का ही खेत को खा जाना कहा जा सकता है। पुलिस और प्रशासन में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं, जो किए गए ऐसे प्रबंधों को बेहद कमज़ोर कर देते हैं। पुलिस तंत्र से भी ऐसे समाचार लगातार मिलते रहते हैं।
विगत दिवस एक कांस्टेबल के संबंध में खुलासा सुन कर बेहद आश्चर्य और परेशानी हुई। यह पुलिस कर्मचारी सीमा पर नशा, हथियार और विस्फोटक सामग्री की तस्करी को रोकने के लिए लगाए गए एंटी ड्रोन सिस्टम में तैनात था, पर वह उधर से आती खेप को आगे पहुंचाने में सहयोग कर रहा था। उसके पास से लगभग 15 किलो हैरोइन बरामद हुई, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कीमत 100 करोड़ रुपये बताई जाती है। यदि रक्षा करने वाले व्यक्ति ही ऐसी नकारात्मक गतिविधियों में शामिल हो जाएं तो प्रदेश का भगवान ही रखवाला है।
विगत दिवस मानसा में जो हत्या हुई वह भी इस बात की निशानी है कि प्रत्येक स्थान पर नशा आम बिकता है और इस बुरे काम में निम्न स्तर से लेकर ऊपरी स्तर तक नैटवर्क जुड़ा हुआ है, जिसे लाखों यत्नों के बावजूद भी प्रशासन तोड़ने में असमर्थ रहा है। चाहे सरकार की ओर से और राजनीतिक पार्टियों की ओर से लगातार नशे के विरुद्ध अभियान चलाए गए हैं परन्तु उनका प्रभाव एक सीमा तक ही सीमित रहा है, जिसने प्रशासन और समाज के समक्ष एक बड़ी चुनौती पैदा की हुई है। मौजूदा समय में इस बिगड़ चुकी व्यवस्था को ठीक करने का तरीका विफल ही सिद्ध हुआ है, परन्तु समाज को स्वस्थ मार्ग पर लाने के लिए प्रत्येक स्थिति में इस नैटवर्क को तोड़ने की ज़रूरत होगी, जिसमें समूचे समाज की हिस्सेदारी होना ज़रूरी है।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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