बेहद नाज़ुक हालात से गुज़र रहा है पंजाब

ये द़ाग द़ाग उजाला, ये शब ़गज़ीदा सहर,
वो इंतज़ार था जिस का ये वो सहर तो नहीं।

इन्कलाबी शायर फैज़ अहमद फैज़ की नज़्म ‘सुबह-ए-आज़ादी’ की ये पंक्तियां आज भी पूरे भारत पर तो चरितार्थ होती ही हैं, परन्तु इस समय जो हालत पंजाब की है, उस पर भी बिल्कुल फिट बैठती हैं। इस समय पंजाब का उजाला भी द़ागदार है और सवेर भी अंधेरे में लिपटी ही दिखाई दे रही है। पंजाब की सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक स्थिति पूरी तरह नशे, भ्रष्टाचार, भय, झूठ, ज़ुल्म, लालच और अदूरदर्शिता के अंधरे में डूबी हुई है। किसी को भी पंजाब तथा पंजाबियों के भविष्य की चिन्ता नहीं। बातों में चाहे सभी पंजाब के हमदर्द हैं, परन्तु क्रियात्मक रूप में हालत साहिब श्री गुरु नानक देव जी के शब्दों—
कूड़ अमावस सचु चंद्रमा,
दीसै नाही कह चड़िया। (माझ म : 1, अंग : 145)
वाली ही है। पंजाब प्रत्येक पक्ष से अवसान की ओर जा रहा है और हमारी राजनीतिक पार्टियां अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में व्यस्त हैं। हमारे सामने परमिन्दर सिंह झोटा की हत्या के मामले के बाद की हालत यह है कि सत्तारूढ़ तथा विपक्ष को सिर्फ और सिर्फ अपनी-अपनी राजनीति की चिन्ता है, परन्तु अफसोस है कि इस समय पंजाब के पास कोई नायक नहीं है। कोई भी ऐसा ना-खुदा (मल्लाह) नहीं है जो पंजाब को इन अंधेरों के महासागर से पार लगा सकने के समर्थ हो, जो निजी हितों में लिप्त न हो। 
काश कि पंजाब को फिर से कोई रहबर मिले,
काश कि दीपक कोई फिर से अंधेरों में जले।
श्री करतारपुर साहिब गलियारा खोलें
पंजाब विधानसभा में मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने श्री करतारपुर साहिब गलियारे को पुन: खोलने का प्रस्ताव पेश किया था। बेशक राजनीतिज्ञों का प्रत्येक कदम समय की राजनीति को सामने रख कर ही उठाया जाता है, परन्तु बैंस द्वारा भी चाहे यह चुनावों के दृष्टिगत या किसी भी कारण यह प्रस्ताव लाया गया हो, यह एक स्वागतयोग्य कदम है। इससे पहले जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज तथा विश्व भर के सिख संगठन भी यह मांग लगातार करते आ रहे हैं। मार्च, 2026 में शिरोमणि कमेटी भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर चुकी है। सिख संगतों को यह समझ नहीं आ रही कि आस्था को सुरक्षा तथा रानजीति का बंधक क्यों बना दिया गया है?  
जब पाकिस्तान में गुरुपर्वों पर जाने की कोई रोक नहीं तो यह गलियारा क्यों नहीं खोला जा रहा? यदि सिख 10-10 दिन पकिस्तान में रह कर कुछ भी देश-विरोधी नहीं करते तो वे दिन के सिर्फ कुछ घंटे पाकिस्तान में स्थित एक गुरुद्वारा साहिब में व्यतीत कर देश के लिए नुकसानदायक कैसे हो सकते हैं? 
वैसे सिर्फ गलियारा खोलना ही पर्याप्त नहीं, अपितु जैसे इस प्रस्ताव में मांग भी की गई है कि इसकी प्रक्रिया भी आसान की जानी ज़रूरी है, जैसे पासपोर्ट के स्थान पर आधार कार्ड और वोटर पहचान पत्र जैसे दस्तावेज़ स्वीकार किए जाएं। आनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया या तो पूरी तरह खत्म की जाए या इतनी आसान हो कि कोई भी अपने मोबाइल फोन से पूरी कर सके। सुरक्षा के नाम पर अतिरिक्त बाधाएं न पैदा की जाएं, अपने देश के नागरिकों पर विश्वास किया जाए। कम से कम जिसके पास पासपोर्ट है, उसकी पुलिस वैरीफिकेशन करवाने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यदि वह व्यक्ति पाससोर्ट पर विश्व भर में बिना ताज़ा पुलिस जांच के घूम सकता है तो फिर वह कुछ घंटे पाकिस्तान में क्यों नहीं? फिर जब पासपोर्ट बनता है तो बाकायदा पुलिस वैरीफिकेशन से ही बनता है। बुजुर्गों और बीमारों के लिए यात्रा में विशेष प्रबंध किए जाएं। शायद किसी बीमार या बुज़ुर्ग की बाबा नानक की धरती पर प्रणाम करने की अंतिम इच्छा ही हो। उल्लेखनीय है कि इस गलियारे पर पाबंदी हमारे अपने देश की ओर से है, पाकिस्तान की ओर से नहीं। हम पंजाबी तो पंजाब की सीमा से व्यापार हेतु खोलने को पंजाब के लिए सबसे ज़रूरी मुद्दा मानते हैं। फिर ज़रा सोचें कि इस गलियारे की बातचीत पहली बार भाजपा के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय 1999 में शुरू हुई थी और भाजपा के ही मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं इसकी शुरुआत भी करवाई थी, अत: प्रधानमंत्री जी अपने एक अच्छे कार्य पर मिट्टी न डालें। 
रुकावटें हटा दो राहें ़खुद ही खोल दो सनम,
इस आस्था के स़फर को ना रोको, पछताओगे।
अकाली दल वारिस पंजाब दे में फूट
अकाली दल वारिस पंजाब दे के भीतर आंतरिक खींचतान अब मंजर-ए-आम पर आ गई है। पार्टी ने पहले सभी ज़िला अध्यक्षों का ढांचा भंग किया और कुछ लोगों ने तीव्र हमला करके इस्तीफा भी दिया। इन ज़िला अध्यक्षों तथा अन्य लोगों ने पार्टी अध्यक्ष भाई अमृतपाल सिंह के बापू तरसेम सिंह को एक लम्बा ज्ञापन देकर पार्टी के कई नेताओं पर गम्भीर आरोप भी लगाए हैं। जवाब में पार्टी के भीतर बनाई गई ‘प्रिंसिपल ड्राफ्टिंग कमेटी’ जिसने यह ज्ञापन लिखा थी, के पांचों पदाधिकारियों अवतार सिंह सेखों, गुरदीप सिंह भंडाल, जगदीप सिंह कसाला, कृष्ण सिंह तथा जसविन्दर सिंह डरोली को पार्टी से मुअत्तल कर दिया गया है। हमारी जानकारी के अनुसार जहां पार्टी में पहले समर्थ रहे नेताओं तथा अब अधिक ताकतवर हुए नये नेताओं का अहंकार इस लड़ाई की जड़ बनी है, वहीं पार्टी के भीतरी सख्त पंथक लाइन पर चलने के इच्छुकों तथा पार्टी के लिए अधिक धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी नीतियां अपनाने के इच्छुक नेताओं के बीच सहमति का अभाव तथा टिकटों के वितरण में अपने-अपने समर्थकों को टिकटें दिलाने की इच्छा भी इस खींचतान के कारण हैं। चुनाव निकट हैं, ऐसे समय में ऐसी खींचतान सुनिश्चित रूप में पार्टी की छवि को नुकसान ही पहुंचाएगी। चाहे पार्टी इसे फूट नहीं, अपितु संगठन को मज़बूत करने की प्रक्रिया कह रही है, परन्तु हमारी जानकारी के अनुसार आगामी दिनों में यह कटुता और बढ़ने के आसार हैं। 
त़ख्त श्री हज़ूर साहिब बोर्ड का चुनाव करवाएं
महाराष्ट्र सरकार ने 29 जून, 2022 को नोटिफिकेशन जारी करके त़ख्त श्री हज़ूर साहिब के बोर्ड को भंग कर दिया था, परन्तु बाम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने न्यायाधीशों जस्टिस आर.जी. अचावत तथा जस्टिस अबासाहिब शिंदे ने यह नोटिफिकेशन रद्द करके 29 जून, 2022 वाली स्थिति बहाल कर दी है। यह सिख संगत के लिए बड़ी जीत है, परन्तु अब इस बोर्ड का चुनाव तथा नियुक्तियां जितनी शीघ्र करवा ली जाएं, उतना ही अच्छा होगा, क्योंकि नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हज़ूर साहिब अबचल नगर साहिब एक्ट-1950 की धारा 6 के अनुसार इस बोर्ड के 17 सदस्य होते हैं। इस समय सिर्फ 8 हैं। अदालत ने 29 जून, 2022 की स्थिति बहाल की है। उस समय कुल 9 ही सदस्य थे। अब उनमें से भी एक अध्यक्ष भूपिन्द्र सिंह मिनहास का निधन हो चुका है। ़खैर, सिख संगत ने लड़ाई जीत ली है और तख्त साहिब का बोर्ड सरकार के सीधे कब्ज़े से आज़ाद हो गया है। 
परन्तु यदि नये सदस्यों का चुनाव तथा नामांकन शीघ्र न करवाया गया तो यह बोर्ड समयानुकूल बन कर कोई कार्य नहीं कर सकेगा, अपितु यह सरकार को फिर नया नोटिफिकेशन जारी करने का बहाना ही देगा। हां, इस कानूनी लड़ाई में सिख संगत की जीत ने यह अवश्य सिद्ध किया है कि यदि अधिकार और न्याय की लड़ाई लड़ने की इच्छा एवं हौसला हो तो अंत में न्याय और जीत मिल ही जाती है।
यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, 
हवा की ओट भी लेकर चिऱाग जलता है।
—मंज़ूर हाशमी
पंजाब चुनाव के उम्मीदवारों की सूचियां नवम्बर में
पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर गतिविधियां शिखर पर हैं और नवम्बर 2026 में विधानसभा के उम्मीदवारों की अधिकतर सूचियां अलग-अलग राजनीतिक पार्टियां जारी कर देंगी। चाहे अकाली दल बादल ने सबसे पहले अपने उम्मीदवारों की सूची लगभग फाइनल की हुई है, परन्तु वह अकाली-भाजपा चुनाव समझौते बारे अंतिम फैसला होने से पहले सूची जारी नहीं कर सकता। आम आदमी पार्टी द्वारा सबसे पहले पहली सूची जारी करने के आसार हैं। एक जानकारी के अनुसार पार्टी पहली सूची 20 से 40 उम्मीदवारों की जारी कहेगी। कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची जल्द जारी नहीं कर सकती, क्योंकि एक तो अभी उसके कई सर्वेक्षण शेष हैं और दूसरा, नया पंजाब अध्यक्ष बनाने के बावजूद पार्टी को एकजुट करने का कार्य अभी जारी है। अकाली दल वारिस पंजाब दे में चाहे मतभेद उभर रहे हैं, परन्तु उनकी ओर से भी शीघ्र सूची जारी करने की सम्भावना है।  
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-मो. 92168-60000      

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