फीफा विश्व कप-2018 : रूस फुटबॉल में भी एक फूल से माला नहीं बनती


21वां फीफा फुटबॉल विश्व कप 14 जून से 15 जुलाई तक रूस के 11 शहरों के 12 स्टेडियमों में खेला जायेगा, मास्को में दो स्टेडियम हैं। इस समय फुटबॉल के नियम काफी बदल गये हैं, इसलिए देखना होगा कि इनका इस विश्व कप पर क्या प्रभाव पड़ेगा? परिवर्तित नियमों में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अब गोलकीपर को बैक पास नहीं दिया जा सकता है। इस नियम ने फुटबॉल को रातोंरात बदल दिया है, जाहिर है अच्छे के लिए। रक्षापंक्ति का खिलाड़ी, आईडिया के अभाव में, जब गेंद को गोलकीपर के पास वापस धकेल देता था तो यह देखने में बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था और इससे खेल भी धीमा व नीरस हो जाता था। इस नियम ने क्या किया था, इसे समझने में दुनिया को समय लगा और फ्रांस को 1998 में ही मालूम हो सका कि गोलकीपर जब अपने पैर प्रयोग करने लगते हैं तब क्या होता है। 1998 का विश्व कप दिलचस्प था और इटली का 1990, अमरीका का 1994 पूर्णत: भिन्न थे।शताब्दी बदलने पर टीमों ने परम्परागत 4-4-2 फार्मेशन को छोड़ दिया और लीक से हटकर सोचने लगीं। विभिन्न अंतरों के साथ टीमों ने आमतौर से 4-2-3-1 फार्मेशन अपनाया है। ब्राजील अलग संरचना से खेली, जिसमें आक्रामक तत्व अधिक था, 2002 का विश्व कप जीतने के लिए। लेकिन 2006 के विश्व कप के बाद फुटबॉल पूरी तरह से बदल गई। स्पेन और उसके प्रभुत्व ने दुनिया को परिवर्तन के लिए मजबूर कर दिया। स्पेन ने कुछ स्टाइल के साथ दो बार यूरो कप और 2010 में विश्व कप जीता। स्पेन का खेल देखने में आकर्षक था और अचानक दुनिया के दूसरे देश उसकी तरह खेलने की इच्छा करने लगे। बस समस्या यह थी कि सही रणनीति के लिए सही खिलाड़ियों की आवश्यकता होती है। राष्ट्रीय टीमों के कोचों के पास खेल की विशेष शैली विकसित करने का समय नहीं होता है। कुछ नया करने के लिए वक्त की जरुरत होती है।आज फुटबॉल में कुलीन टीमें हैं और छोटी टीमें हैं। पूरी दुनिया में अब फुटबॉल ज्यादा खेला जा रहा है। सवाल यह है कि क्या कोई छोटी टीम कभी कुलीन टीमों के वर्चस्व को तोड़ सकेगी? यह बहुत मुश्किल है। फुटबॉल में कुलीन हमेशा कुलीन ही रहते हैं। आप देख सकते हैं कि हर चौथे साल विश्व कप में जब क्वार्टरफाइनल में प्रवेश करने वाली टीमों की पुष्टि होती है तो वह लगभग वही होती हैं जो लम्बे समय से चली आ रही हैं। कभी-कभार ही कोई अपवाद होता है जैसे कोस्टा रीका (2014) या अमरीका (2002) जो कुलीन वर्ग से बाहर की हैं। कुलीन वर्ग बहुत शक्तिशाली है। अल्प अवधि की प्रतियोगिताओं जैसे विश्व कप में उन टीमों के लिए बहुत कठिन है जिनके जीतने की संभावना नहीं है। क्या कोई एक प्रमुख खिलाड़ी जैसे मो सालेह अपनी टीम मिस्र को जिता सकता है? व्यक्तिगत क्षमता वाले खिलाड़ी हमेशा महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन फुटबॉल में भी अकेले फूल से माला नहीं बनती। सालेह या नेय्मार जैसे खिलाड़ी अपने शानदार व्यक्तिगत खेल से मैच की धारा को बदल तो सकते हैं, लेकिन विश्व कप जीतने के लिए सामूहिक परफॉरमेंस की आवश्यकता होती है। आपको कम से कम दो-तीन विशेष खिलाड़ियों की जरुरत होती है। किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर रहना घातक है। अनेक विशेष खिलाड़ी चाहिए जैसे ब्राजील व स्पेन में हैं। 2002 में जब ब्राजील ने विश्व कप जीता था तो उसके पास रोनाल्डो, रिवाल्डो व रोनाल्डिन्हो थे। इस बार कप के मुख्य दावेदारों में ब्राजील, स्पेन, जर्मनी, फ्रांस व अर्जेंटीना हैं। इस बार शायद इंग्लैंड भी अच्छा संघर्ष करे। कोलंबिया जैसी टीम के लिए भी अच्छा विश्व कप हो सकता है। यह वह टीमें हैं जो निश्चित रूप से क्वार्टरफाइनल में तो होंगी ही। क्या इनमें कोस्टा रीका भी शामिल होगी? कोस्टा रीका में मात्र 50 लाख की जनसंख्या है और फिर भी वह उच्च रैंकिंग प्राप्त है और अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल में काफी अच्छा प्रदर्शन करती है। उसकी सफलता उस योजना से आरम्भ हुई जो 2000 में शुरू की गई, जब उसकी संघ ने इस बात के महत्व को समझा कि राष्ट्रीय टीमों के लिए युवा खिलाड़ियों को स्काउट किया जाये और उन्हें सबसे अच्छे संसाधन उपलब्ध कराये जायें। एक बार जब वह यूथ विश्व कप खेल लेते हैं तो अनुभवी हो जाते हैं जो आखिरकार सीनियर विश्व कप में दिखाई देता है। कोस्टा रीका के अधिकतर खिलाड़ी, जिन्हें अब आप रूस में देखेंगे, यूथ विश्व कपों का पहले हिस्सा रह चुके हैं। अलेक्सांद्रे गुइमारेस ने फीफा विश्व कप को एक खिलाड़ी और एक कोच के रूप में बहुत निकट से देखा है। वह इटली 1990 के विश्व कप में अपने देश की तरफ  से खिलाड़ी के रूप में उतरे थे जब कोस्टा रीका ने अपना पहला विश्व कप खेला था। फिर 12 वर्ष बाद वह कोच के रूप में विश्व कप में आये। वह अपने अनुभव के बारे में बताते हैं, ‘बहुत सुनहरी यादें हैं क्योंकि मुझे कोस्टा रीका को कोच करने का अवसर मिला और हम दुनिया को दिखा सके कि हम कैसे खेलते हैं। 1990 में अपना पहला विश्व कप खेलने के बाद हम फिर 12 वर्ष बाद बड़े मंच पर थे। हम बहुत अच्छा खेले, लेकिन आवश्यक लक नहीं था। 2002 से कोस्टा रीका हर विश्व कप में रही है और यह अच्छा संकेत है कि हमारी फुटबॉल विकास कर रही है।’

-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर