महिलाओं का मनपसंद पर्व है महीना सावन


सावन का महीना वर्ष के बाकि सारे महीनों के मुकाबले अधिक खूबसूरत और महिलाओं के लिए विशेष तौर पर इस महीने का महत्व अन्य त्यौहारों से ज्यादा होता है, बल्कि महीना ही नहीं एक विशेष दिन जिसे सावन कहते हैं वह भी बड़ी धूमधाम से महिलाएं मनाती हैं। जोकि महिलाओं के अंदर एक नई किस्म की उमंग को भरता है। यह महीना न केवल गर्मी की ऋतु में तबदीली का प्रतीक है बल्कि इस महीने का इंतज़ार हर महिला को रहता है। सावन मास एक मौका होता है विवाह के बाद अपनी पुरानी सहेलियों को फिर से मिलने का और दिल के अंदर काफी समय से दबी भावनाओं को सांझा करने का अवसर होता है। इस माह में सहेलियां मिलकर गिद्दा, बोलियां डालती हैं और सावन के झूले का आनंद लेती हैं। वह अपनी खुशी को इस तरह मनाती हैं कि बस इसके अलावा कुछ नहीं। अपनी इस खुशी में महिलाएं किसी की दखलअंदाज़ी नहीं चाहतीं क्योंकि महिलाओं को अपनी ज़िंदगी खुलकर जीने के अवसर बहुत कम मिलते हैं।सहेलियां मिल-बैठकर हाथों पर मेहंदी लगाती हैं और अपने मन की बातों को एक-दूसरे के साथ सांझा करती हैं। अपना मनपसंद शृंगार करती हैं। प्रकृति की गोद में बैठकर आनंद लेती हैं। सावन अपने साथ में नई उमंग और ताज़गी लाता है। महिलाएं नए-नए कपड़े पहनकर पैरों में पायलें डालती हैं और मिलकर गीत गाती हैं। यह दिन नव-विवाहिताओं के लिए बहुत विशेष होता है, जहां वह शादी के बाद अपने माता-पिता और सहेलियों से मिलती हैं वहीं अपनी ज़िंदगी की खुशियों को सहेलियों के साथ सांझा करती हैं। लेकिन आधुनिक समय में यह त्यौहार आधुनिक साधनों के बीच कहीं न कहीं अलोप होता जा रहा है। पहले सब महिलाएं मिलकर इस दिन को अच्छी तरह मनाती थीं और इस दिन का इंतज़ार करती थीं। परन्तु आज के समय में कब यह दिन आए और कब चले गए पता ही नहीं चलता है। हमें इस परम्परा को संभाल कर रखना चाहिए। सावन के महीने में नव-विवाहिता स्त्रियों को अपने मायके भेज दिया जाता है। धार्मिक और लोकमान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से पति की आयु लम्बी होती है। सावन में महिलाएं विशेष तौर पर साज-शृंगार करती हैं। सावन महीने में महिलाओं के लिए हरे रंग का विशेष महत्व होता है। सावन का महीना आते ही बाज़ारों में चूडियों की दुकानों में बिक्री बढ़ जाती है। खासतौर पर हरे रंग की चूड़ियों की मांग सबसे ज्यादा होती है। मेहंदी एक ओर जहां हथेलियों की सुंदरता बढ़ती है, वहीं पर स्वास्थ्य हेतु रक्त संचार ब्लड प्रैशर को भी नियंत्रण में रखती है। मेहंदी दिमाग को शांत और तेज़ भी बनाती है। सावन के महीने में हरे रंग का वस्त्र धारण करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। हरा रंग उर्वरा का प्रतीक माना जाता है। सावन मास के शुरू होने के साथ ही महिलाओं के साज-सजावट की वस्तुओं की दुकानों में भारी मात्रा में मेहंदी और हरे रंग की चूड़ियों को खरीदने और पहनने हेतु विवाहित महिलाएं और अविवाहित युवतियों की भीड़ लगी होती है। वहीं, हाथों पर एक से बढ़कर एक मनमोहक, आकर्षक मेहंदी रचाने हेतु विवाहित महिलाएं और अविवाहित युवतियां मेहंदी रचा रही हैं। मान्यता है कि सावन महीने में हरे रंग की चूड़ियां और मेहंदी रचने से जहां पर सुहागिनों को भगवान भोलेनाथ सुख, शांति, समृद्धि और स्नेह प्राप्त होता है, वहीं अविवाहित युवतियों को मनचाहे वर की इच्छापूर्ति होती है। सावन का पवित्र महीना खुद को प्रकृति से जोड़ने का महीना होता है। इस माह में प्रतिदिन हम भगवान शिव को जल अर्पित कर खुद को प्रकृति से जोड़ते हैं। सावन का महीना आते ही चारों तरफ सिर्फ हरियाली ही नज़र आती है और यह रंग हमारे सौभाग्य से भी जुड़ा हुआ है। सावन का महीना प्रकृति के सौन्दर्य का महीना होता है। शास्त्रों में महिलाओं को भी प्रकृति का रूप माना गया है। इस मौसम में बरसात की बूंदों से प्रकृति खिल उठती है। हर तरफ हरियाली छा जाती है। ऐसे में प्रकृति से एकाकार होने के लिए महिलाएं भी मेहंदी लगाती हैं। हरे वस्त्र और हरी चूड़ियां पहनती हैं। सावन के महीने में कई प्रकार की बीमारियां फैलने लगती हैं। आयुर्वेद में हरा रंग कई रोगों में कारगर माना गया है। यही कारण है कि सावन में महिलाएं, स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मेहंदी लगाती हैं और हरे रंग के वस्त्र और चूड़ियां पहनती हैं। मेहंदी की खुशबू से लड़की का घर-आंगन तो महकता ही है, लड़की की सुंदरता में भी चार चांद लग जाते हैं। इसलिए कहा भी जाता है कि मेहंदी के बिना दुल्हन अधूरी होती है। आखिर मेहंदी सजने की वस्तु है तो महिलाएं सावन में इससे अलग नहीं रह पातीं। आखिर सजना जो है सजना के लिए।

—अमरजीत बराड़