उपचुनाव : बागियों  से कांग्रेस को उम्मीद, भाजपा को खतरा


प्रदेश में धर्मशाला और पच्छाद में होने जा रहे विधानसभा के उपचुनाव में सियासी जंग तेज हो गई है। भाजपा प्रत्याशियों के प्रचार के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कमान संभाल ली है, तो कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए पार्टी के सभी दिग्गज नेता प्रचार में जुट गए हैं। भाजपा प्रत्याशियों की घेराबंदी के लिए कांग्रेस ने अपने विधायकों और नेताओं को तैनात कर दिया है, तो भाजपा भी सरकार की उपलब्धियों को लेकर जनता को लुभाने में जुटी है, लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा की सियासी रणनीति चुनाव मैदान में उतरे भाजपा के बागी उम्मीदवारों पर टिकी है। पच्छाद में भाजपा की बागी नेता दयाल प्यारी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी दंगल में भाग्य आजमा रही है, तो धर्मशाला में भी भाजपा के बागी नेता राकेश चौधरी चुनाव मैदान में डटे हैं। धर्मशाला में मुख्य मुकाबला भाजपा के विशाल नैहरिया और कांग्रेस के विजय इंद्र के बीच है तो पच्छाद में मुकाबला भाजपा की रीना कश्यप और कांग्रेस के गंगूराम मुसाफि र के बीच माना जा रहा है, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी दयाल प्यारी और राकेश चौधरी भी कड़ी टक्कर दे रहे हैं।  चुनावी सियासत को देखा जाए, तो भाजपा प्रत्याशी को बागी प्रत्याशियों से खतरा महसूस हो रहा है। वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि बागी प्रत्याशी भाजपा के वोट बैंक में मजबूत सेंध लगाने में कामयाब होते हैं, तो कांग्रेस उम्मीदवार को इसका फायदा हो सकता है। पच्छाद से निर्दलीय उम्मीदवार दयाल प्यारी की स्थिति काफी  मजबूत मानी जा रही है। दयाल प्यारी पूर्व में ज़िला परिषद की सदस्य भी रही हैं और भाजपा से टिकट की उनकी दावेदारी भी मजबूत रही, लेकिन टिकट न मिलने से वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में हैं।  चुनावी मैदान पर नजर डालें तो पच्छाद में दयाल प्यारी को लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। उपचुनाव को लेकर हमेशा यह सियासी अनुमान रहा है कि सत्ताधारी दल ही उपचुनाव में जीत दर्ज करता है, लेकिन प्रदेश की सियासत में ऐसे परिणाम हमेशा नहीं आए हैं। कई बार विपक्षी दल के उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की है।  इस चुनाव में भी सरकार में बैठी भाजपा के प्रत्याशी की जीत होगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता। भाजपा प्रत्याशियों की जीत के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती सहित सरकार के मंत्री और नेता प्रचार में जुटे हैं। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के सांसद किशन कपूर भी धर्मशाला में भाजपा प्रत्याशी को जीत दिलाने के लिए प्रचार कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर और विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री दल-बल के साथ कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने के लिए जुटे हैं। धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरणों के आधार पर दोनों दलों के नेता वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर रहे हैं। धर्मशाला में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशी गद्दी समुदाय से हैं, जिससे दोनों दलों की रणनीति यह है कि ब्राह्मण और ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगाकर वे जीत दर्ज कर सकते हैं, जिसके लिए कांग्रेस के सुधीर शर्मा और ओबीसी नेता चौधरी चंद्रकुमार कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में जुटे हैं। अब देखना है कि कौन किस वर्ग में सेंध लगाने में कामयाब होकर जीत दर्ज करता है।
वीरभद्र सिंह को दिया हैलीकॉप्टर
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को चंडीगढ़ से शिमला लाने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हैलीकॉप्टर दिया। वीरभद्र सिंह पीजीआई में इलाज करवा रहे थे। स्वस्थ होने के बाद उनके पुत्र और शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह ने चंडीगढ़ से शिमला आने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से हैलीकॉप्टर मांगा। जयराम ठाकुर ने हैलीकॉप्टर दिया, जिससे वीरभद्र सिंह शिमला आए। इस बारे में न तो जयराम ठाकुर ने कुछ कहा और न ही वीरभद्र सिंह की ओर से कुछ कहा गया, लेकिन सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की प्रशंसा हो रही है कि उन्होंने दलगत राजनीति से उठकर कांग्रेस के नेता को हैलीकॉप्टर दिया। वीरभद्र सिंह प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनके लिए हैलीकॉप्टर मुहैया कराना बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता। वैसे भी सरकार प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों में बीमार लोगों के लिए हैलीकॉप्टर सुविधा मुहैया कराती है।  इस तरह बीमार चल रहे वीरभद्र सिंह को चंडीगढ़ से शिमला के लिए हैलीकॉप्टर देना उचित कदम है, लेकिन अब इसे लेकर सियासी चर्चा भी होने लगी है। सियासत में यह चर्चा है कि जब विक्रमादित्य सिंह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर हवा में उड़ने वाले मुख्यमंत्री का आरोप लगाते हैं, तो फि र उनसे हैलीकॉप्टर की मांग नहीं करनी चाहिए थी, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप की सियासत चलती ही रहती है। इसे उस रूप में नहीं देखना चाहिए। सोशल मीडिया में चल रही सियासी बहस में इसे जयराम के पक्ष में पेश किया जा रहा है कि जयराम ने हैलीकॉप्टर देकर आदर्श पेश किया है, जबकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर इस बारे में कुछ नहीं कह रहे और कहना भी नहीं चाहिए। जनता के बीच जो चर्चा हो रही है, उसे होने देना चाहिए।
नर्स आत्म-हत्या प्रकरण
हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की नर्स ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का कारण यह बताया जा रहा है कि नर्स अपने सीनियर अफ सरों की कार्यप्रणाली से परेशान थी। नर्स की आत्महत्या के कारण परिजनों और लोगों में गुस्सा है कि अस्पताल प्रशासन और ज़िला प्रशासन इस मामले में जांच नहीं कर रहा और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। अंतिम संस्कार के 48 घंटे के बाद भी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अपने स्तर पर कोई जांच शुरू नहीं की है, न ही अभी तक कोई जांच कमेटी का गठन किया गया है। अस्पताल प्रशासन अभी तक लिखित शिकायत का इंतजार कर रहा है। पुलिस ने इस सम्बंध में एफ आईआर नम्बर 200/2019 आईपीसी की धारा 306 के तहत 4 अक्तूबर को दर्ज कर ली है। कुछ वार्ड सिस्टर्स व स्टाफ  नर्स को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन बुलाया गया। नर्स-आत्महत्या के कारण कुछ भी रहे हों, अस्पताल प्रशासन और पुलिस प्रशासन को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और सच्चाई सामने लानी चाहिए।