धान व गेहूं की काश्त में पंजाब बना प्रथम राज्य


गेहूं में ही नहीं पंजाब धान में भी देश का प्राथमिक राज्य रहा है। वर्ष 2017-18 में इसको भारत सरकार की ओर से चावलों की खेती में ‘कृषि कर्मन पुरस्कार’ के साथ सम्मानित किया गया था। इस वर्ष धान (बासमती शामिल है) के उत्पादन से खरीफ की फसल बड़ी आशाजनक है। धान की काश्त 22.91 लाख हैक्टेयर और बासमती की 6.29 लाख हैक्टेयर रकबे पर की गई है। उत्पादकता क्रमवार 6874 किलोग्राम और 4450 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर होने का अनुमान है। अनुमानित उत्पादन धान का 157.48 लाख टन और बासमती का 28 लाख टन को छू जाने की सम्भावना है। बासमती की पूसा बासमती 1509 किस्म जोकि पकने को थोड़ा समय (115 से 120 दिन) लेती है, लगभग काटी जा चुकी है और इसका मंडीकरण हो रहा है।  मंडी में किसानों को 2700-2800 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य मिल रहा है, जोकि पिछले वर्ष 2200-2300 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य मिला था। नागरा (संगरूर) गांव के मनजीत सिंह घुम्मण ने पूसा बासमती 1509 किस्म से 26 क्विंटल प्रति हैक्टेयर तक अपने 8 हैक्टेयर रकबे में प्राप्ति की है। धर्मगढ़ (फतेहगढ़ साहिब) के पी.ए.यू. और भारतीय कृषि खोज संस्थान से सम्मानित बलबीर सिंह जड़िया 22 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उत्पादकता प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने 10 एकड़ रकबे पर पूसा बासमती 1509 किस्म की काश्त की हुई है। इसी तरह गुरमेल सिंह गहिलां जो एक किसान हैं, ने पूसा 44 किस्म के धान से 42 क्विंटल प्रति एकड़ तक झाड़ ले रहे हैं। नागरा का मनजीत सिंह घुम्मन उन्हीं में से एक है। स्टेट अवार्ड पंजाब सरकार से धान की खेती में ‘कृषि कर्मन पुरस्कार’ के विजेता राजमोहन सिंह कालेका विशनपुरा छीना ने अपने 20 एकड़ फार्म पर पूसा 44 किस्म की पनीरी 9 मई को बीज कर 13-20 जून के मध्य ट्रांसप्लांट की और 8 अक्तूबर को काट ली। उन्होंने किसी ज़हर का प्रयोग भी नहीं किया।  झाड़ की प्राप्ति के लिए 32.5 क्विंटल प्रति एकड़ हुई। कृषि और किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने कालेका के खेत और धान की बुआई और कटाई अपनी अगुवाई में की और इसके आंकड़े रिकार्ड किए। डिप्टी कमिश्नर कुमार अमित ने कालेका की जहरमुक्त कृषि भी पसंद की है। मंडी में नमी की मात्रा 18-29 प्रतिशत आई और कालेका को पूरी एम.एस.पी. प्राप्त हुई।  कृषि और किसान कल्याण विभाग ने जो योजना बनाई है, उसके तहत गेहूं की काश्त 34.90 लाख हैक्टेयर रकबे पर की जायेगी। लगभग 13,000 हैक्टेयर रकबे पर जौं की बिजाई की जायेगी और सरसों की काश्त 10,000 हैक्टेयर रकबे पर की जायेगी। ग्रीष्म ऋतु की मूंगी 25,000 हैक्टेयर पर बीजी जाएगी, ताकि किसानों की आमदन में बढ़ावा हो सके और ज़मीन की उपजाऊ शक्ति में सुधार आए। डायरैक्टर ऐरी के अनुसार इस वर्ष जोकि काश्त को विशेष महत्वता दी जायेगी। गेहूं की बिजाई के लिए खेत को हल के द्वारा अच्छी तरह तैयार करके बीजा जाए। हल्की मशीनों को भारी ज़मीनों के मुकाबले कम प्रयोग किया जाएगा। बुआई के लिए खेत में नमी के अनुसार मात्रा होनी चाहिए। अगर नमी कम होगी तो सिंचाई करके खेत तैयार करना चाहिए। फसल का झाड़ उसकी बिजाई के समय पर निर्भर करता है। सही समय से एक सप्ताह देरी के कारण बिजाई उपरांत लगभग 1.5 क्विंटल प्रति एकड़ झाड़ कम होता है। अधिक झाड़ लेने के लिए खेत में पौधों की गिनती का पूरा होना ज़रूरी है। किस्म के चयन के बाद बीमारी रहित और अच्छे सेहतमंद बीज को उपयोग में लाना चाहिए। किसी और किस्म का  बीज या नदीन खेत में नहीं होने चाहिए। बीज का शोध दवाइयों के साथ कर लेना चाहिए। दीमक और बीज से लगने वाली बीमारियों की रोकथाम केवल बीज के शोध के साथ ही की जा सकती है। बिजाई के लिए खेत की तैयारी के अनुसार सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल, ज़ीरो ड्रिल या हैपीसीडर के साथ करनी चाहिए। गेहूं की बिजाई अच्छे समय पर 4-6 सैंटीमीटर गहराई और क्रमवार से 15-20 सैंटीमीटर के अन्तराल के ऊपर करनी चाहिए। खाद का प्रयोग मिट्टी की परख के अनुसार और उसी के आधार पर ही करना चाहिए।

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