दिशाहीन हो कर भटकता युवा वर्ग


आज देश में युवा वर्ग असभ्यता एवं अशिष्टता का पर्याय बन गया है। युवा वर्ग की असभ्यता से राष्ट्र ही परेशान नहीं अपितु उसका अपना परिवार एवं वह स्वयं भी परेशान रहता है। देश का नवयुवक अजीबो-गरीब तरह के कपड़े पहने, मोटरसाइकिल पर सवार कान से मोबाइल लगाये सड़कों पर बिना उद्देश्य मंडराते हुए आमतौर से देखा जा सकता है। आज का युवक स्वयं अपने परिवार से कटा रहता है। यहां तक कि काफी आयु तक विवाह से भी दूर भागते रहते हैं। अगर विवाह हो भी जाता है तो आपसी सामंजस्य में भारी असंतुलन रहता है। परिवारों में सिर्फ एक या दो बच्चे होते हैं परन्तु इन आधुनिक नवयुवक दंपति को एक बच्चा पालने में भी पसीने छूटते हैं। स्पष्ट है कि आज युवक मेहनत एवं संघर्ष से मुंह मोड़ कर पलायनवादी हो गया है। इन्हीं सभी कमजोरियों के कारण देश का नवयुवक हताश-सा रहता है तथा उसमें आत्महत्या की प्रवृत्ति भी बढ़ती जा रही है। परीक्षा एवं प्रतियोगिता से नवयुवक बुरी तरह भयभीत रहता है। जहां भी कठिन प्रतियोगिता होती है वहां काफी बड़ी संख्या में पद ही खाली पड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए सेना अनुसंधान, शिक्षकों एवं विशेषज्ञों के ज्यादातर पद खाली रह जाते हैं क्योंकि छात्र इनके लिए नियत परीक्षाओं को पास ही नहीं कर पाते हैं।मेहनत एवं संघर्ष से युवा वर्ग इतना घबराता है कि हर वर्ग आज आरक्षण का लाभ पाना चाहता है जिससे कम अंकों पर ज्यादा लाभ प्राप्त हो सके। नवयुवकों में इसी पतन की मानसिकता का राजनीतिज्ञ भरपूर लाभ उठा रहे हैं जिसके कारण तमिलनाडु  एवं कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में आरक्षण की श्रेणी में लगभग नब्बे प्रतिशत आबादी आ गई है। नवयुवकों में इस प्रकार मुफ्तखोरी एवं निकम्मेपन की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।  प्रश्न यह उठता है कि देश के नवयुवकों के भटकाव एवं पतन के पीछे क्या कारण है। इस भटकाव का कारण काफी हद तक देश के राजनीतिज्ञ हैं। उन्होंने अपने स्वार्थ के कारण देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया जिसके कारण आज का नवयुवक नैतिकता, अनुशासन, संयम एवं सुव्यवस्था के महत्त्व को पहचानता ही नहीं है। सामाजिक न्याय एवं विकृत धर्म निरपेक्षता की राजनीति देश के नवयुवकों के भटकाव के लिए काफी हद तक उत्तरदायी है। इस जातिवादी एवं तुष्टिकरण की राजनीति से एक वर्ग जहां निराशावादी हो गया है तो दूसरे वर्ग ने मुफ्तखोरी एवं निकम्मेपन की आदत काफी हद तक बढ़ाई है। इन सभी गलत नीतियों के कारण युवा वर्ग को कोई सही दिशा, निर्देश देने वाला नहीं है।आज देश के युवा वर्ग का यह हाल है कि उसके लिए फैशनेबल कपड़े, मोबाइल फोन, डांस पार्टी, डीजे आदि ही मुख्य आकर्षण रह गये हैं। मेहनत एवं संघर्ष का नाम आते ही दूर भगता है। इसी कारण इतने बड़े देश में आतंकवाद एवं भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कोई युवा आगे बढ़ता ही नहीं है क्योंकि कोई उनका मार्गदर्शन करने वाला नहीं है। दूसरे देश के राजनेताओं ने युवकों को इतना धोखा दिया है कि सभी अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। युवकों का यह दायित्व बनता है कि वह मेहनत एवं संघर्ष से भयभीत न हों। इसके साथ ही साथ  जीवन में अनुशासन, संयम एवं सुव्यवस्था के महत्त्व को पहचानें। आत्महत्या जैसी प्रवृत्ति का त्याग करना होगा। अगर जीवन का बलिदान ही करना है तो आतंकवाद एवं भ्रष्टाचार से लड़ने में करें। अगर देश का युवक इस प्रकार की सकारात्मक समझ से कार्य करता है तो वास्तव में वह आने वाले कल का निर्माता होगा। (अदिति)