बिहार चुनाव  लालू, पासवान के बिना फ ीकी है चुनावी रंगत

बिहार विधान सभा चुनाव का प्रचार पूरे शबाब पर है। वहां आगामी 28 अक्तूबर, 3 व 7 नवम्बर को 3 चरणों में वोट डाले जाएंगे। वोटों की गिनती 10 नवम्बर को होगी। कोरोना के दौर में बिहार में विधानसभा चुनाव करवाना चुनाव आयोग व राज्य सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। बिहार में आए दिन बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज़ मिल रहे हैं। अब तक वहां कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या 2 लाख 4 हज़ार का आंकड़ा पार कर चुकी है। वहीं कोरोना से मरने वालों की संख्या 900 से अधिक हो चुकी है। 
ऐसे डर के माहौल में चुनाव करवाना व 7 करोड़ 18 लाख लोगों का वोट डालना दोनों ही अपने आप में बहुत चुनौती भरा काम है। मगर बिहार विधानसभा का कार्यकाल शीघ्र ही पूरा होने जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव में  सभी राजनीतिक दलों के गठबंधन चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव व लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के बिना बिहार का चुनाव फीका लग रहा है। लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में रांची की जेल में सज़ा काट रहे हैं। रामविलास पासवान का पिछले दिनों निधन हो गया। चुनावों के दौरान अपने बेबाक बयानों को लेकर दोनों ही नेता चर्चित रहते थे। लालू यादव जहां माय (मुस्लिम-यादव) समीकरण के बल पर वर्षों तक बिहार की सत्ता पर काबिज रहे, वहीं दलित वोट बैंक के दम पर पासवान लम्बे समय तक केन्द्र में मंत्री रहे।
बिहार के चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला राजग और महागठबंधन के मध्य होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजग को 53.25 प्रतिशत वोट व 39 सीटें मिली थीं। संप्रग को 30.76 प्रतिशत वोट व एक सीट मिली थी। 2019 के चुनाव में राजग में शामिल लोजपा इस बार बिहार में करीब डेढ़ सौ सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है। वहीं संप्रग में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हम पार्टी व सन ऑफ  मल्लाह के नाम से मशहूर मुकेश साहनी की वीआईपी पार्टी राजग के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। वहीं राजद, कांग्रेस के साथ भाकपा, माकपा व भाकपा माले महागठबंधन बनाकर चुनाव मैदान में उतरे हैं।  पिछले लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के साथ रहे राष्ट्रीय लोक समतापार्टी के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रं ट नाम से 6 दलों का एक नया मोर्चा बनाया है। इस मोर्चे में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, एआईएमआईएम, बसपा, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक और जनतांत्रिक पार्टी सोशलिस्ट शामिल है। मोर्चा का संयोजक पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव को बनाया गया है। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने उपेंद्र कुशवाहा को अपने मोर्चे की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। पूर्व सांसद व जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष पप्पू यादव ने प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (पीडीए) बनाया है जिसमें एमके फैजी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ  इंडिया, उत्तर प्रदेश के चंद्रशेखर आज़ाद रावण की आज़ाद समाज पार्टी शामिल है। इस मोर्चे की तरफ से पप्पू यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। 
रामविलास पासवान के देहांत के बाद उनके पुत्र चिराग पासवान लोजपा के सर्वे सर्वा नेता हैं। उन्होंने चुनाव में नितीश कुमार के खिलाफ  ताल ठोक रखी है तथा उनकी आलोचना का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने राजग गठबंधन में शामिल जनता दल (यू) के सभी उम्मीदवारों के खिलाफ  अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाने की घोषणा की है। भाजपा व जद(यू) में टिकट से वंचित रहे नेताओं को चिराग पासवान लोजपा में शामिल कर अपनी पार्टी का प्रत्याशी बना रहे हैं। चिराग खुले आम कह रहे हैं कि मैं आज भी राजग में  शामिल हूं। मेरी लड़ाई भाजपा से नहीं, नितीश कुमार के जद (यू) से है। बिहार में विधानसभा का चुनाव बहुत ही रोचक स्थिति में पहुंच गया है। राजग की तरफ  से नितीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि राजग दो तिहाई से अधिक सीटों पर चुनाव जीतेगा। राजग गठबंधन में शामिल दलों को कितनी भी सीटें मिलें, अगला मुख्यमंत्री नितीश कुमार ही बनेंगे। महागठबंधन की तरफ  से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालू यादव के छोटे पुत्र तेजस्वी यादव को बनाया गया है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस सहित सभी वामपंथी दल चुनाव लड़ रहे हैं। महागठबंधन के नेता बनने के बावजूद तेजस्वी यादव को चुनावी प्रबंधन का अनुभव नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। उस वक्त जनता दल (यूनाईटेड) भी महागठबंधन में शामिल था। इस कारण महागठबंधन को दो तिहाई सीटों पर जीत मिली थी।  
ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या ये गठबंधन चुनाव परिणाम के बाद भी कायम रहेंगे या पिछली बार की तरह नये राजनीतिक समीकरण बनेंगे? इस बात का पता तो चुनाव परिणाम के बाद ही चल पायेगा।