शेफाली के फॉर्म ने प्रतीका से मुकाबले को दिलचस्प बनाया
नवम्बर 2025 में भारत की शानदार ओडीआई विश्व कप (महिला) विजय का सबसे उदास पल सलामी बैटर प्रतीका रावल को पदक न मिलना रहा। वह बांग्लादेश के विरुद्ध लीग मैच में फील्डिंग करते हुए चोटिल हो गईं थीं। उनकी जगह शेफाली वर्मा को अवसर दिया गया और इस 21 वर्षीय खिलाड़ी ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दोनों बल्ले व गेंद से शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेयर ऑ़फ द मैच का खिताब हासिल किया। विश्व कप के बाद जो श्रीलंका के विरुद्ध टी-20 श्रृंखला हुई, उसमें भी शेफाली ने अपना शानदार फॉर्म जारी रखा, जिससे मालूम हुआ कि जब वह अपनी लय में होती हैं, तो कितनी खतरनाक हो जाती हैं। उनके वर्तमान फॉर्म को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वह हर फॉर्मेट की प्लेयिंग 11 का अटूट हिस्सा होना चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि प्रतीका टीम से बाहर क्यों बैठें, जबकि अब वह अपनी चोट से उबर गईं हैं और जनता के दबाव में उन्हें अपना विश्व कप पदक भी मिल गया है। ध्यान रहे कि भारत को विश्व कप के फाइनल तक पहुंचाने में प्रतीका के बल्ले की महत्वपूर्ण भूमिका थी। टीम प्रबंधन भी टॉप आर्डर में उनकी इंटेलिजेंस व स्थिरता का सम्मान करता है, यह अलग बात है कि उनके पास शेफाली (जब वह लय में हों) जैसी फायर-पॉवर नहीं है। हां, शेफाली की बल्लेबाज़ी में प्रतीका जैसी निरंतरता का अभाव है, जिसकी वजह से उन्हें 2024 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध ओडीआई श्रृंखला में नहीं खिलाया गया था। शेफाली के साथ तकनीकी व फिटनेस समस्याएं भी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख यह थी कि वह एक ही गलती को बार-बार दोहरा रही थीं। चूंकि शेफाली, जो सबसे कम आयु (15 वर्ष) में टी-20 में डेब्यू करने वाली क्रिकेटर बनीं, का कोई विकल्प नहीं था, इसलिए उन्होंने अपनी तकनीक में सुधार लाने की न कोशिश की और न आवश्यकता महसूस की। नतीजतन उनके नंबर गिरते रहे- 31 ओडीआई में उन्होंने 5 अर्द्धशतक, 24.70 औसत, 86.46 स्ट्राइक रेट व 87 रन सर्वश्रेष्ठ के साथ कुल 741 रन बनाये हैं और 93 टी-20 में उनके 27.65 की औसत से 2,378 रन हैं। जबकि 25-वर्षीय प्रतीका के 24 ओडीआई में 50.45 औसत, 82.83 स्ट्राइक रेट, 7 अर्द्धशतक व 2 शतक, 154 रन सर्वश्रेष्ठ के साथ 1,110 रन हैं।
इस पृष्ठभूमि में एक सलामी बैटर के रूप में किसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए- शेफाली को या प्रतीका को? ज्ञात रहे कि दूसरी सलामी बैटर के रूप में स्मृति मंधाना की जगह पक्की है क्योंकि उनका कोई विकल्प ही नहीं है और भारत की महिला टीम इस समय इतनी मज़बूत है कि मध्य क्रम में भी कोई जगह खाली नहीं है हरमनप्रीत कौर, जेमिमा रोड्रिग्स, ऋचा घोष, दीप्ति शर्मा, हरलीन देओल आदि की उपस्थिति में। ऐसे में जहां टीम प्रबंधन के पास शेफाली व प्रतीका के रूप में चयन की अच्छी सिरदर्दी रहेगी वहीं इन दोनों बैटर्स को अपने खेल में निरंतर सुधार लाते रहना होगा। यह स्वस्थ प्रतिद्वंदिता टीम के लिए अच्छी है। प्रतीका को अपनी वापसी पर पहले से बेहतर प्रदर्शन करना होगा और शेफाली को लापरवाही छोड़कर अपनी तकनीक व फिटनेस पर निरंतर काम करते रहना होगा।
प्रतीका ओडीआई (महिला) इतिहास में सबसे तेज़ गति से 500 रन बनाने वाली बैटर हैं, जोकि उन्होंने अपने करियर की पहली आठ पारियों में ही हासिल कर लिया था। अगर इस लक्ष्य के संदर्भ में पुरुषों को भी शामिल किया जाये तो प्रतीका केवल दक्षिण अफ्रीका के जानेमन मलान से ही पीछे हैं। इससे यह अंदाज़ा लगता है कि प्रतीका हमेशा से ही जल्दी में रही हैं। जब वह कक्षा 3 की छात्रा थीं तो उन्होंने अपने पिता प्रदीप रावल (बीसीसीआई से मान्यता अंपायर) से मालूम किया था कि क्या वह क्रिकेट में अपना करियर बना सकती हैं, जिसे वे दोनों ही प्यार करते हैं? पिता ने जवाब दिया था, ‘जब तक तुम्हें क्रिकेट में मज़ा आये तब तक इसे खेलो।’
हरी झंडी मिलते ही प्रतीका असामान्य पथ पर चल निकलीं। वह सीधे क्रिकेट में नहीं आयीं। उन्होंने पहले दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज से मनोविज्ञान में डिग्री हासिल की, जिसका, उनके अनुसार, वह खुद पर ही पालन करती हैं। मनोविज्ञान के बल पर वह अपने मन को समझती हैं और बल्लेबाज़ी औसत में इज़ाफा करती हैं। मनोविज्ञान से क्रिकेट में मदद मिलती है, इसे इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक ब्रेरली साबित कर चुके हैं। प्रतीका को वास्तव में मनोविज्ञान से प्यार है। वह बताती हैं, ‘मैंने इस विषय को यह सोचकर नहीं लिया था कि इससे मेरे खेल में सुधार आयेगा। मेरी दिलचस्पी तो यह जानने में थी कि हम अपने दिमागों को प्रोसेस कैसे करते हैं। लेकिन इससे मुझे अपने खेल में ज़बरदस्त लाभ मिला है।’ मसलन, अब वह पहचान सकती हैं कि कब उनका दिमाग उनके विरुद्ध काम कर रहा है। वह कहती हैं, ‘जब आपको आत्म-जागृति मिल जाती है, तो संयम बनाये रखना बहुत आसान हो जाता है, न सिर्फ मैदान में बल्कि अन्य तनावपूर्ण स्थितियों में भी।’ इससे यह सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि अगर प्रतीका शेफाली के फॉर्म को देखते हुए टीम से बाहर भी बैठती हैं तो भी वह अपने अवसर को भुनाने के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित रहेंगी।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



