पटौदी की बेगम शर्मिला टैगोर के अनसुने किस्से
शर्मिला टैगोर का नाम सुनते ही दर्शकों के जहन में ‘अमर प्रेम’, ‘आराधना’, ‘मौसम’ जैसी हिट फिल्में, सुंदर मुस्कान और राजेश खन्ना, संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन आदि सुपरस्टार्स के साथ उनकी सफल जोड़ी याद आ जाती है। शर्मिला ने अपने लगभग 68 वर्ष के लम्बे करियर में केवल अभिनय ही नहीं किया बल्कि अपने आकर्षक अंदाज़ व ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री से अपने प्रशंसकों के दिल में खास जगह बनायी, जिससे वह बॉलीवुड की यादगार व सदाबहार अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। हालांकि शर्मिला टैगोर ने सत्यजीत रे के साथ पांच फिल्में कीं, जो उनका सर्वश्रेष्ठ कार्य कहा जा सकता है, लेकिन ‘आराधना’ (1969) की ‘मेरे सपनों की रानी’ को कौन भूल सकता है, जिसका ‘रूप तेरा मस्ताना’ था।
फ्रांस के आर्डर ऑ़फ आर्ट्स एंड लेटर्स (1999), भारत के तीसरे उच्चतम नागरिक अवार्ड पद्म भूषण (2013), दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (मौसम व अबर अरण्य) और तीन फिल्मफेयर अवार्ड्स (आराधना, गुलमोहर व लाइफटाइम अचीवमेंट) से सम्मानित पटौदी की ‘बेगम मां’ शर्मिला टैगोर का जन्म 8 दिसम्बर 1944 को कानपुर में हुआ था, जहां उनके पिता जितेंद्रनाथ टैगोर ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन में जनरल मनेजर थे। उनके पिता की ही नहीं बल्कि मां इरा बरुआ की वंशावली भी नोबेल पुरस्कार विजेता रबींद्रनाथ टैगोर से मिलती है। इसके अतिरिक्त वह अभिनेत्री देविका रानी व पेंटर अबनीन्द्रनाथ टैगोर की भी रिश्तेदार हैं और भोपाल व पटौदी के नवाबी खानदान में उनका ब्याह हुआ है। शर्मिला अपनी दो अन्य बहनों से बड़ी हैं। उनकी बहन ओइनड्राला कुंडा (अब दिवंगत) ने एक बाल कलाकार के रूप में उनसे पहले फिल्मों में काम किया- तपन सिन्हा की ‘काबुलीवाला’ (1957) में और फिर बाद में वह अंतर्राष्ट्रीय ब्रिज खिलाड़ी बनीं। शर्मिला की दूसरी बहन रोमिला सेन हैं।
हमेशा से विद्रोही स्वभाव की रहीं शर्मिला टैगोर ने मात्र 13 वर्ष की आयु में सत्यजीत रे की फिल्म ‘अपूर संसार’ से काम करना शुरू किया था। उनके एक्टिंग करियर से उनकी प्रधानाचार्या इतनी अधिक नाराज़ हो गईं थीं कि शर्मिला टैगोर को दूसरे स्कूल में प्रवेश लेना पड़ा था। जब वह 17 साल की हुईं तो अकेले होटल में रहते हुए अपने चयन किये गये करियर को आगे बढ़ा रही थीं। 22 साल की उम्र में वह एक फिल्म पत्रिका (फिल्मफेयर) के लिए बिकनी में पोज़ करने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री बनीं। इस तस्वीर ने इतनी सनसनी मचायी कि इस पर संसद तक में प्रश्न मालूम किये गये थे। हालांकि उन्हें क्रिकेटर एम.एल. जयसिम्हा पर क्रश था, लेकिन एक दूसरे क्रिकेटर नवाब मंसूर अली खान पटौदी को अपना दिल दे बैठीं और वह भी इस हद तक कि अपनी फिल्म शूटिंग के बाद एयरपोर्ट पर टाइगर को सी-ऑफ करने के लिए गईं जो विदेशी दौरे पर जा रहे थे, टाइगर ने उनसे मजाक में साथ चलने के लिए कहा और वह बिना किसी सामान के उनके साथ चल पड़ीं। यात्रा के दौरान उन्हें टाइगर के शोर्ट्स पहनने पड़े थे। शर्मिला टैगोर के अनुसार, ‘टाइगर को जोक्स सुनाने का शौक था, लेकिन उनका ब्रिटिश एक्सेंट मेरी समझ में नहीं आता था, इसलिए टाइगर खुद ही अपने जोक्स पर हंसते थे।’
इस सिलसिले में दो अन्य किस्से भी दिलचस्प हैं। शर्मिला टैगोर जिस समय टाइगर की ज़िंदगी में आयीं तो वह सिमी ग्रेवाल को डेट कर रहे थे। अब टाइगर ने फैसला कर लिया था कि वह पेरिस में शर्मिला टैगोर के समक्ष घुटने पर जाकर विवाह प्रस्ताव रखेंगे, इसलिए सिमी ग्रेवाल से ब्रेकअप ज़रूरी था। वह सिमी ग्रेवाल के घर पहुंचे और उनसे जाकर राहें अलग-अलग होने की बात कही, उस समय बाहर उनकी कार में शर्मिला टैगोर बैठी हुईं थीं यानी वह एक प्रेमिका से ब्रेकअप करने के लिए दूसरी प्रेमिका को साथ लेकर गये थे। 24 साल की आयु में शर्मिला टैगोर ने टाइगर से शादी कर ली, जब वह अपने फिल्मी करियर की बुलंदियों पर थीं। हर किसी का यही मानना था कि यह शादी नहीं चलेगी और शर्मिला टैगोर का फिल्मी करियर समाप्त हो जायेगा। वैसे भी उस दौर में विवाहित लड़की को कोई निर्माता अपनी फिल्म में हीरोइन बनाना पसंद नहीं करता था। लेकिन शर्मिला टैगोर ने इन अटकलों को गलत साबित किया। उनकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत सफल रही, वह अब भी टाइगर की कब्र के निकट ही रहती हैं और 1970 में सैफ को जन्म देने के बाद वह फिल्मों में सफलतापूर्वक फिर लौटीं, अभिनय के नये कीर्तिमान स्थापित करते हुए।
एक बार उनकी सास साजिदा सुल्तान, जिनको पटौदी व भोपाल की नवाबी विरासत में मिली हुई थी, को उनके पास मुंबई में आना था। शर्मिला टैगोर के घर के पास ‘एन इवनिंग इन पेरिस’ के पोस्टर्स लगे हुए थे, जिनमें उन्हें बिकनी में दिखाया गया था। शर्मिला टैगोर ने अपने ड्राइवर से कहकर रात में ही उन सब पोस्टर्स को हटवा दिया था। बहरहाल, शादी व मां बनने के बाद शर्मिला टैगोर के सफल फिल्मी करियर का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1976 में ‘मौसम’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस फिल्म में उनकी दोहरी भूमिका थी, जिसमें से एक सेक्स वर्कर की थी।
अपना अधिकतर जीवन मुंबई की चकाचौंध में गुज़ारने के बाद शर्मिला टैगोर अब दिल्ली के निकट पटौदी पैलेस में रहती हैं, जहां उनके पति मंसूर अली खान पटौदी उर्फ टाइगर दफन हैं। पटौदी में रहने का कारण, उनके अनुसार यह है, ‘मैं टाइगर से दूर रहना नहीं चाहती।’ वह अपने तीनों बच्चों- सैफ, सोहा व सबा और उनके बच्चों- इब्राहिम, सारा, तैमूर, जहांगीर व इनाया के लिए कुलमाता हैं, फिल्म ‘गुलमोहर’ में अपने किरदार की तरह, जिसे उन्होंने 12 वर्ष फिल्मों से दूर रहने के बाद निभाया था। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर





