9 दिनों में 4 घातक हथियारों के परीक्षण भारत दुश्मनों को क्या संदेश दे रहा
भारत ने दिसम्बर के आखिरी सप्ताह में अपनी रक्षा क्षमताओं का जो प्रदर्शन किया, वह केवल मिसाइल परीक्षण नहीं बल्कि देश की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और सामरिक दृढ़ता की एक जीवंत घोषणा थी। 23 दिसंबर से 31 दिसंबर तक, महज नौ दिनों के अंतराल में भारत ने चार घातक हथियार प्रणालियों (आकाश एनजी मिसाइल सिस्टमए के-4 पनडुब्बी-प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल, पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट और प्रलय मिसाइल) का सफल परीक्षण किया। ये परीक्षण भारत की सामरिक चिंतनशीलता, तकनीकी दक्षता और पड़ोसी देशों के प्रति एक स्पष्ट संदेश को प्रतिबिंबित करते हैं। ये परीक्षण केवल तकनीकी परीक्षण नहीं बल्कि बदलते वैश्विक भू.-राजनीतिक परिदृश्य में भारत की ‘सशक्त भारत, सुरक्षित भारत) की नीति का ठोस प्रदर्शन हैं। 31 दिसंबर को जब दुनिया नए साल के जश्न की तैयारी कर रही थी, तब ओडिशा के चांदीपुर तट से ‘प्रलय’ मिसाइल की गर्जना ने तो दुश्मनों के खेमे में हलचल मचा दी।
प्रलय मिसाइल : परिष्कृत सटीकता की नई परिभाषा
31 दिसंबर की सुबह साढ़े दस बजे ओडिशा के डा. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से भारत ने प्रलय मिसाइल के दो सफल परीक्षण संपन्न किए। यह तकनीकी उपलब्धि साबित करती है कि भारतीय सेना तेजी से लक्ष्यों पर बहु-मिसाइल वार कर सकती है। ‘प्रलय’ एक ऐसी मिसाइल है, जिसे विशेष रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) और नियंत्रण रेखा (एलओसी) की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है जो सतह से सतह पर मार करती है। प्रलय एक पूर्ण बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है, यह ‘क्वासी-बैलिस्टिक’ मिसाइल है, जिसका अर्थ है कि इसकी ट्रैजेक्टरी (उड़ान पथ) कम ऊंचाई पर होती है और यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदलने में सक्षम है। यह विशेषता इसे दुश्मन की मिसाइल डिफेंस प्रणालियों (जैसे एस-300 या एस-400) के लिए लगभग अदृश्य और ‘अन-इंटरसेप्टेबल’ बना देती है। प्रलय के जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस) से सुसज्जित होने की वजह से इसकी सटीकता (सर्कुलर एरर प्रोबेबल) 10 मीटर से कम है, जिसे 4 मीटर तक सुधारने का काम जारी है। इसका अर्थ यह है कि दुश्मन के एक कमांड सेंटर, राडार स्टेशन या हथियार डिपो को लक्षित करते समय, मिसाइल अपने इच्छित लक्ष्य से 10 मीटर के दायरे में ही गिरेगी। ऐसी सटीकता सैन्य रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव लाती है। प्रलय की रेंज 150 से 500 किलोमीटर है। यह अपने साथ 350 से 1000 किलोग्राम तक का पारंपरिक वारहेड ले जा सकती है। 2025 के परीक्षणों में इसने अपनी मारक क्षमता की चरम सीमा को सफलतापूर्वक छुआ है। परीक्षण की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘सैल्वो मोड’ था। एक ही मोबाइल लॉन्चर से दो मिसाइलों को बहुत कम अंतराल में लॉन्च किया गया। यह क्षमता युद्ध के दौरान दुश्मन को संभलने का मौका दिए बिना उस पर दोहरा प्रहार करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी लंबाई 9.06 मीटर, व्यास 740 मिलीमीटर और कुल वजन 5.1 टन है जो इसे एक मध्यम आकार की अत्यंत विनाशकारी हथियार प्रणाली बनाता है। 7500 किलोमीटर प्रति घंटा (मैक 6.1) की रफ्तार इसे एक ‘हाइपरसोनिक’ श्रेणी के करीब ले जाती है, जिससे प्रतिक्रिया का समय न्यूनतम हो जाता है।
पिनाका : चंद सैकेंड में क्षेत्रीय तबाही की क्षमता
29 दिसंबर को ओडिशा के चांदीपुर में पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर-120) का परीक्षण किया गया। यह परीक्षण पिनाका प्रणाली के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ। जहां इसका शुरुआती संस्करण महज 40 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच सकता था, वहां आज यह 120 किलोमीटर तक की सीमा को कवर करता है जो इसे वैश्विक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की कतार में खड़ा करने के लिए पर्याप्त है। पिनाका एक स्वदेशी मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम है, जिसे ट्रक पर तैनात किया जा सकता है। इसकी तीव्र प्रतिक्रिया क्षमता (त्वरित लॉन्च) और बहुआयामी लक्ष्य क्षमता इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र की मांगों के लिए आदर्श बनाती है। 120 किलोमीटर की रेंज वाले इस संस्करण में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस) और उपग्रह-आधारित मार्गदर्शन तकनीक का उपयोग किया गया है। इसकी सबसे दमदार विशेषता यह है कि यह एक किलोमीटर के क्षेत्र को मात्र 44 सैकेंड में साफ कर सकता है यानी जहां दुश्मन की सेना इकट्ठा है, वहां इस सिस्टम द्वारा दागे गए दर्जनों रॉकेट तेजी से वर्षा कर सकते हैं। शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (आर्डे), उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (एचईएमआरएल) और अन्य डीआरडीओ संस्थानों के सहयोग से विकसित यह प्रणाली भारतीय सेना की तोपखाना शक्ति को नई ऊंचाई देती है।
आकाश एनजी : आधुनिक हवाई खतरों का प्रहरी
23 दिसंबर को डीआरडीओ ने आकाश-एनजी (अगली पीढ़ी) मिसाइल सिस्टम के उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। यह परीक्षण पूर्वी तट पर ओडिशा के चांदीपुर में आयोजित किया गया, जहां इस मिसाइल प्रणाली ने विभिन्न ऊंचाई और दूरी पर आकाश के लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट किया। आकाश-एनजी एक सतह-से-हवा मिसाइल प्रणाली है जो एक सर्वांगीण वायु रक्षा समाधान प्रदान करती है। इसकी 60 से 70 किलोमीटर की इंटरसेप्शन रेंज इसे एक मध्यम-दूरी की हवाई रक्षा प्रणाली बनाती है। 18 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर आने वाले दुश्मन के हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम यह प्रणाली भारत की स्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली का एक अभिन्न अंग है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनी है। इसमें भारत में निर्मित रेडियो फ्रिक्वेंसी (आरएफ) सीकर लगाया गया है, जो दुश्मन के स्टेल्थ विमानों और कम राडार क्रॉस-सेक्शन वाले लक्ष्यों को भी ट्रैक और नष्ट कर सकता है। इसकी ठोस रॉकेट मोटर और एडवांस्ड इलैक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड रे (एईएसए) रडार इसे तेजी से आने वाले लक्ष्यों के प्रति प्रतिक्रिया करने में सक्षम बनाते हैं। बहु-कार्यात्मक राडार (एमएफआर), कमांड और नियंत्रण इकाई तथा मिसाइल लॉन्च वाहन, सभी एक समन्वित नेटवर्क में काम करते हैं। भारतीय वायुसेना और थल सेना द्वारा आकाश-एनजी के उपयोगकर्ता परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे होने का अर्थ है कि यह अब सेना में शामिल होने के लिए तैयार है। यह सिस्टम विशेषकर भारत की उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर आधुनिक हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा।
के-4 मिसाइल : समुद्र से भारत की परमाणु क्षमता
23 दिसंबर को भारतीय नौसेना ने पनडुब्बी ‘आईएनएस अरिघात’ से के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि भारत अब जमीन, हवा और समुद्र से परमाणु हथियार दागने में सक्षम है। इसके सफल परीक्षण के साथ ही भारत ने अपनी ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ (जमीन, हवा और पानी से परमाणु हमला करने की क्षमता) को और अधिक परिपक्व बना लिया है जो केवल चुनिंदा देशों के पास है। के-4 मिसाइल 3500 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच सकती है, जो पाकिस्तान के संपूर्ण क्षेत्र और चीन के बड़े हिस्से को भारत की परमाणु हमले की क्षमता के अंदर लाती है। पानी के नीचे से लॉन्च करने की क्षमता (कोल्ड लॉन्च सिस्टम), 3डी युद्धाभ्यास और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा से बचने की क्षमता इसे एक अत्यंत प्रभावी और घातक प्रतिघाती हथियार बनाती है।
दुश्मनों को स्पष्ट संदेश
ये चार परीक्षण दुश्मनों को एक सुसंगत सामरिक संदेश देते हैं। पहला, भारत की परंपरागत सैन्य क्षमता में प्रचंड वृद्धि हुई है। प्रलय और पिनाका जैसी मिसाइलें पाकिस्तान के किसी भी सैन्य ठिकाने को तेजी से, सटीकता से और दुश्मन की रक्षा प्रणाली को चकमा देकर भेद सकती हैं। यदि सीमा पर कोई आक्रमण होता है तो भारत की प्रतिक्रिया तत्काल और विनाशकारी होगी। दूसरा, भारत की हवाई रक्षा क्षमता अब अनेक श्रेणीय है। आकाश-एनजी जैसी मिसाइलें सुनिश्चित करती हैं कि दुश्मन का कोई भी विमान, ड्रोन या क्रूज मिसाइल भारतीय मिट्टी तक नहीं पहुंचेगा। तीसरा, भारत की परमाणु निरोधक शक्ति अब पूर्ण और विश्वसनीय है। के-4 मिसाइल का परीक्षण दुश्मन को साफ संदेश देता है कि परमाणु हमले का कोई भी खतरा अस्वीकार्य परिणाम लाएगा। चौथा, भारत आत्मनिर्भर है। ये सभी हथियार प्रणालियां पूरी तरह स्वदेशी हैं, जिसका अर्थ है कि भारत किसी दूसरे देश की अनुमति या आपूर्ति पर निर्भर नहीं है। यह प्रदर्शन भारत की सामरिक गहनता और सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जब दुश्मन यह देखता है कि भारत अपनी सीमा की रक्षा के लिए कितना सुसज्जित है तो वह कोई भी साहसिक कदम उठाने से पहले हजार बार अवश्य सोचेगा।





