मीठा व हल्का खट्टा फल देने वाला चकोतरा का पेड़

चकोतरा, जिसे देश के कई हिस्सों में चकौतरा, चकोत्रा या पोमेलो भी कहा जाता है। यह नींबू वर्ग (सिट्रस) का एक बड़ा और सुगंधित फल है। यह संतरे और मौसमी से आकार में काफी बड़ा होता है और स्वाद में खट्टा, बहुत हल्का मीठा होता है। हालांकि भारत में यह मुख्यधारा की कभी आर्थिक फसल नहीं रही, पर अगर समझदारी से चकोतरा की खेती की जाए तो यह किसानाें के लिए ‘कैश  क्रॉप’ तो नहीं पर ‘क्लास क्रॉप’ ज़रूर साबित होता है। चकोतरा का वैज्ञानिक नाम सिट्रस मैक्सिमा है यह रुटासी परिवार का एक सदाबहार पेड़ है। इसकी ऊंचाई आमतौर पर 5 से 10 मीटर होती है और यह आमतौर पर एक बार तैयार होने के बाद बड़ी आसानी से 30 से 40 सालों तक फल देता है। 
चकोतरा के फल की मुख्य विशेषताओं में पहली तो यही है कि आमतौर पर चकोतरा एक से तीन किलोग्राम तक का भारी-भरकम फल होता है। इसका छिलका मोटा और स्पंजी होता है जबकि गूदा सफेद और हल्का गुलाबी या लाल रंग का होता है। कच्चा चकोतरा बेहद खट्टा और पका हुआ चकोतरा हल्का मीठा और कम खट्टा होता है। इसकी कुछ किस्मों के फलों में बीज कम पाये जाते हैं और कुछ में ज्यादा होते हैं। जहां तक चकोतरा के फल के लिए जलवायु और मिट्टी की ज़रूरत की बात है तो यह ऊष्ण और उपोष्ण जलवायु में अच्छी तरह से फलने, फूलने वाला पेड़ है। इसके लिए आदर्श तापमान 20 से 35 डिग्री सेल्सियस चाहिए होता है। कहने का मतलब यह हल्की ठंड सह लेता है, लेकिन जिन क्षेत्रों में बर्फ गिरती है या ज्यादा पाला पड़ता है, वहां चकोतरा का पेड़ सर्वाइव नहीं कर पाता। चकोतरा के पेड़ के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके लिए जलनिकास अच्छा होना चाहिए और मिट्टी का पीएच 5.5 से 7.5 तक आदर्श माना जाता है। 
भारत के कई प्रांतों में पारंपरिक रूप से चकोतरा के पेड़ पाये जाते हैं। मुख्यत: असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा, मणिपुर, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कुछ नई विकसित प्रजाति के चकोतरा पेड़ पंजाब और हरियाणा में भी देखने को मिलते हैं। जहां तक इससे किसानों को आर्थिक फायदे की बात है, तो किसानों को आर्थिक फायदा तभी मिल सकता है, जब वो चकोतरा के पेड़ों के बीच दूसरे मिक्स फसलों की खेती भी करें। यही कारण है कि पूर्वोत्तर भारत, तटीय उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, केरल और महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में इन दिनों अच्छी खासी चकोतरा की खेती की जाती है। उत्तर भारत में भी गर्म और पालारहित क्षेत्रों में अब इसकी काफी खेती होने लगी है। जहां तक चकोतरा के पेड़ में लगने वाले फूल, फल और उत्पादन की बात है तो रोपण के करीब 4-5 साल बाद इसमें फल आना शुरु होते हैं और एक परिपक्व चकोतरा के पेड़ से हर साल कम से कम 75 से 100 फल आसानी से मिल जाते हैं। 
क्योंकि चकोतरा का एक फल औसतन 1.5 से 2.5 किलो तक का होता है, इसलिए एक पेड़ हर साल 100 से 200 किलो तक के फल उत्पादित करता है। ऐसे में अगर चकोतरा की खेती स्मार्ट तरीके से की जाए तो आमतौर पर 60 से 80 रुपये प्रतिकिलो की दर से स्थानीय बाज़ारों में बिकने वाला यह फल किसान को एक एकड़ में हर साल 70 से 80 हजार रुपये का नगद फायदा अपने सारे खर्च व लागत के बाद भी दे जाता है और अगर इसे आर्गेनिक तरीके से किया जाए तो चकोतरा का फल बाज़ार में 150 से 200 रुपये किलो तक बिकता है, जिससे आमदनी सामान्य से तीन से चार गुना बढ़ सकती है और अगर स्मार्ट ढंग से इसके प्रोसेसिंग उत्पाद भी तैयार करके बेचे जाएं मसलन- चकोतरा का जूस, कैंडिड पील आदि, 250 से 300 रुपये प्रति किलो या प्रति लीटर के हिसाब से कीमत पायी जा सकती है। हालांकि एक मोटा गणित ये है कि एक एकड़ में हर साल 3 से 4 लाख रुपया सामान्य तौर पर और अच्छे सीजन में 9 से 18 लाख रुपये तक प्रति हेक्टेयर की कमाई की जा सकती है बशर्ते बहुत देखरेख और वैज्ञानिक तौर तरीकों से यह खेती की जा सकती है।
अगर आपने चकोतरा के विभिन्न उत्पादों को वैल्यू एडीशन के साथ बेचने की कला आती हो तो इसका जूस, हेल्थ ड्रिंक के रूप में मशहूर है। इसके छिलकों से बनने वाले कैंडिड पील और इसका तेल जो कि विशेष तौर पर सौंदर्य प्रसाधनों में इस्तेमाल होता है, काफी अच्छी कमाई करवा सकता है। इसके सलाद और आयुर्वेदिक उपयोग भी शानदार हैं, इसके छिलके की मोटाई भी इसे विशेष तौर पर प्रोसेसिंग के लिए खास बनाती है। 
इस तरह अगर किसान मिश्रित बागवानी के रूप में चकोतरा की खेती करें यानी चकोतरा के साथ नींबू और मौसमी के पेड़ भी लगाएं तो उन्हें अच्छी-खासी प्रोफिट हो सकती है। क्योंकि ऑर्गेनिक चकोतरा की इन दिनों बहुत मांग है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी चकोतरा को नई-नई प्रविधियों से इस्तेमाल करके फायदा हासिल करते हैं। कुल मिलाकर चकोतरा भारतीय किसानों के लिए मासक्रॉप तो नहीं है, लेकिन क्लास क्रॉप ज़रूर है लेकिन सिर्फ उन्हीं के लिए जो बाज़ार को और आधुनिक फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को भलीभांति जानते हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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