क्या बीसीसीआई शुभमन गिल की बात मानेगी ?
पिछले 13 माह के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम (पुरुष) को टेस्ट श्रृंखलाओं में अपनी ही घरेलू पिचों पर दो बार शर्मनाक पराजय का सामना करना पड़ा है। पहले वह न्यूज़ीलैंड से 0-3 से हारी और फिर दक्षिण अफ्रीका ने उसे 0-2 से पराजित किया वह भी स्पिन लेती पिचों पर जोकि भारत का मज़बूत पक्ष मानी जाती हैं। इसको मद्देनज़र रखते हुए बीसीसीआई ने हाल ही में चयनकर्ताओं व टीम के नेतृत्व समूह से अनौपचारिक बैठक की, जिसमें टेस्ट व ओडीआई कप्तान शुभमन गिल ने सुझाव दिया कि प्रत्येक टेस्ट श्रृंखला से पहले 15 दिन का कैंप आयोजित किया जाना चाहिए ताकि उचित तैयारी के साथ मैदान में उतरा जा सके। टेस्ट क्रिकेट को बचाये रखने के लिए यह अच्छा सुझाव प्रतीत होता है, लेकिन कमर्शियल कारणों से जो क्रिकेट कैलेंडर अति व्यस्त कर दिया गया है, क्या उसमें ऐसा करना संभव है?
एशेज में ऑस्ट्रेलिया से 1-4 से हारने के बाद इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने कहा है कि आखिरकार समय आ गया है कि इंग्लैंड बाज़बॉल की आक्रमक हाई-रिस्क शैली पर विराम लगाये और टेस्ट क्रिकेट की बेसिक परम्परागत शैली की ओर लौटे। वॉन के अनुसार, ‘इंग्लैंड जिस प्रकार से अल्ट्रा-रिस्की ‘बाज़बॉल मेथड’ खेलता है बल्ले से, वह काम नहीं आया है; क्योंकि उसने कोई बड़ी सीरीज़ नहीं जीती है। उसने भारत को नहीं हराया है। उसने ऑस्ट्रेलिया को नहीं हराया है। अब वह एक और एशेज हार गया है और वह वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के आस पास भी नहीं है। इसलिए मैनेजमेंट, नेतृत्व समूह और ईसीबी को स्वीकार कर लेना चाहिए कि स्थितियों को बदलने की आवश्यकता है।’
वॉन के अनुसार एससीजी में जो रूट के 160 रन और जैकब बेथेल के 154 रन जोकि परम्परागत टेस्ट शैली से बनाये गये, स्पष्ट संकेत हैं कि आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। वॉन ने बताया, ‘यही टेस्ट में बल्लेबाज़ी का सही टेम्पो है, आप गेंद को उसकी मेरिट पर खेलें। वे सभी स्कोर करेंगे क्योंकि वो काफी प्रतिभाशाली है, लेकिन टेस्ट में खेलने का हाई-रिस्क तरीका अधिकतर मामलों में काम नहीं करता है।’ बाज़बॉल असफल हो गई है, इसमें कोई दो राय नहीं हैं। हां, यह सही है कि जून 2022 से जनवरी 2025 तक बाज़बॉल मेथड अपनाकर कोच ब्रेंडन मैकुलम व कप्तान बेन स्टोक्स की जोड़ी ने काफी सफलता हासिल की, लेकिन सपाट पिचों पर कमज़ोर टीमों के खिलाफ, लेकिन मज़बूत टीमों के विरुद्ध जब भी पिच ने गेंदबाज़ों की मदद की तो इंग्लैंड औंधे मुंह गिरा। इस अवधि में इंग्लैंड ने 46 टेस्ट खेले, जिनमें से 26 जीते, 18 में हार मिली और 2 ड्रा रहे। पहले 35 टेस्ट में 1 ड्रा के साथ 22 जीत मिलीं, लेकिन फिर अगले 11 टेस्ट में सिर्फ 4 जीत मिलीं। लेकिन बड़ी टीमों के सामने इंग्लैंड की हालत यह रही- घर पर 2023 एशेज 2-2 से बराबर रही, 2024 भारत में 1-4 से हार, 2024-25 पाकिस्तान में 1-2 से हार, 2025 घर पर भारत के साथ 2-2 से बराबरी और 2025-26 एशेज ऑस्ट्रेलिया में 1-4 से पराजय। इसलिए वॉन की बातों में दम है, विशेषकर इसलिए कि सपाट पिचों पर हाई-रिस्क बल्लेबाज़ी शानदार लगती है, लेकिन जहां गेंद हरकत कर रही हो वहां फुस्स हो जाती है।
दूसरा यह कि बाज़बॉल ‘ड्रा सुरक्षाकवच की संभावना’ को कम कर देती है, एक खराब सेशन और मैच खत्म लेकिन क्या वॉन के सुझाव का पालन किया जायेगा? फिलहाल तो शायद नहीं। मैकुलम का इंग्लैंड बोर्ड से सभी फोर्मट्स के लिए अनुबंध 2027 के अंत तक का है। दरअसल, टेस्ट वाइट बॉल क्रिकेट से एकदम अलग फॉर्मेट है, इसलिए जो बैटर ओडीआई या टी-20 में चौके-छक्के उड़ाता हुआ दिखायी देता है, अगर उसकी तकनीक दुरुस्त नहीं है तो टेस्ट में असहाय नज़र आता है। टेस्ट में 150-200 रन के स्कोर को भी पांचवें दिन की पिच पर डिफेंड करना अकसर संभव होता है। यही वजह है कि टेस्ट की रणनीति पूर्णत: भिन्न होती है। बीसीसीआई की बैठक में गिल एकदम स्पष्ट थे कि टेस्ट श्रृंखला में जाने से पहले टीम को बेहतर तैयारी की ज़रूरत होती है। इस सीजन में क्रिकेट कैलेंडर इतना व्यस्त था कि टीम को तैयारी करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। गिल ने बोर्ड को सुझाव दिया कि टेस्ट श्रृंखला से पहले 15-दिन का रेड-बॉल कैंप आयोजित किया जाये।
गिल के सुझाव में दम है। एशिया कप जीतने के चार दिन बाद भारत ने 2 अक्तूबर 2025 से वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट खेला, जिसमें खिलाड़ी 29 सितम्बर 2025 को दुबई से लौटे थे। गिल और अनेक टेस्ट स्पेशलिस्टस ऑस्ट्रेलिया से वाइट बॉल दौरा करने के बाद लौटे और चार दिन बाद उन्हें कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहला टेस्ट खेलना पड़ा। बहरहाल, ऐसा प्रतीत होता है कि बीसीसीआई गिल को अवसर प्रदान कर रही है कि वह टीम के लिए योजना बनाएं। गिल अधिक स्पष्टता से अपना विज़न प्रस्तुत कर रहे हैं। यह ठीक भी है। कप्तान मज़बूत होना चाहिए, उसकी बात भी मानी जानी चाहिए क्योंकि जहां जीत का श्रेय उसे मिलता है, वहीं हार का ठीकरा भी उसी पर फूटता है। इसके बावजूद क्रिकेट के व्यस्त कैलेंडर के कारण हर बार 15 दिन का कैंप आयोजित करना संभव न हो सकेगा। बेहतर तो यही हो कि हर फॉर्मेट के लिए अलग टीम व कोचिंग स्टाफ हो।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



