एक सफल अभिनेत्री  मीनू मुमताज़  के अनसुने किस्से

‘साकिया आज मुझे नींद नहीं आयेगी।’ यू-टयूब पर यह गाना सुनते हुए अचानक ख्याल आया कि मीनू मुमताज़ के बारे में लिखा जाये लेकिन शुरुआत उनके पिता मुमताज़ अली से करनी होगी, जिनका असली नाम अनवर अली था। अनवर अली अपने बचपन में अपनी सौतेली बहन के साथ सऊदी अरब में रहते थे। सौतेली बहन उन पर बहुत जुल्म करती थी, जिससे तंग आकर वह एक दिन घर से भाग गये और पानी के जहाज़ में चुपके से जा छुपे। उनकी जब आंख खुली तो उन्होंने खुद को बॉम्बे (अब मुंबई) के गेटवे ऑफ इंडिया पर पाया। अब एक बेसहारा बच्चा इतने बड़े शहर में क्या करता, पेट भरने के लिए। उन्होंने वही किया जो अक्सर स्ट्रीट चिल्ड्रन करते हैं। संयोग से अनवर अली पर एक बीजी होर्निमन साहब की नज़र पड़ी, जो थिएटर में शायर थे। उन्होंने अनवर अली को अपनी शरण में लेकर न जाने क्यों उनका नाम बदलकर मुमताज़ अली रख दिया। इस प्रकार मुमताज़ अली का परिचय थिएटर से हुआ और वह विशेष रूप से अपने नृत्य कौशल के लिए विख्यात हुए। उनके नृत्य से देविका रानी भी प्रभावित हुईं और उन्होंने मुमताज़ अली को फिल्मों में नृत्य करने का ऑफर दिया। इस प्रकार भारतीय फिल्मों में नृत्य की शुरुआत करने वाले मुमताज़ अली पहले व्यक्ति बने। ‘मैं तो दिल्ली से दुल्हन लाया रे’ पर मुमताज़ अली का नृत्य ज़बरदस्त हिट हुआ था। 
मुमताज़ अली जब 16 बरस के थे तो उस दौर की परम्परा के अनुसार उनका विवाह एक 11 साल की लड़की लतीफ-उन-निसा से कर दिया गया। लतीफ-उन-निसा ने 14 वर्ष की आयु में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। इन दोनों के कुल आठ बच्चे हुए- चार लड़के व चार लड़कियां। इन बच्चों में से सिर्फ तीन ने फिल्मी दुनिया में अपना नाम दर्ज कराया- महमूद व मीनू मुमताज़ ने बतौर एक्टर और अनवर अली ने निर्माता के रूप में फिल्म ‘खुदा गवाह’ का निर्माण उन्होंने ही किया था। मीनू मुमताज़ का जन्म मलिका-उन-निसा बेगम के रूप में 26 अप्रैल 1942 को बॉम्बे में ही हुआ था। मलिका बचपन से ही अपने पिता के साथ थिएटर, फिल्मों के सेट्स और उनके डांस स्कूल में जाया करती थीं। नतीजतन मलिका नृत्य कला में पारंगत हो गईं, जिसकी वजह से न सिर्फ उन्हें फिल्मों में काम मिला बल्कि अर्काट के शाही परिवार के सदस्य एस अली अकबर जीवनसाथी के रूप में मिले, जिनसे उन्होंने 1963 में विवाह किया। फिल्मों में प्रवेश करने के बाद मलिका ने अपना नाम मीनू मुमताज़ रखा।
मीनू मुमताज़ की पहली फिल्म ‘सखी हातिम’ (1955) थी, दलजीत व चित्रा के साथ। इसमें उनका कोई डांस नंबर नहीं था बल्कि वह जलपरी की भूमिका में थीं, लेकिन नृत्य तो उनके खून में था और जैसे ही कुलदीप कौर को मालूम हुआ कि वह मुमताज़ अली की बेटी हैं, तो उन्हें डांस का ऑफर दे दिया। मीनू मुमताज़ ने सबसे पहले नृत्य ‘मिस कोका कोला’ फिल्म में किया था। इसके बाद ‘सोसाइटी’ में और फिर ‘हलाकू’ में हेलन के साथ उनका डांस मुकाबला रखा गया, जो ज़बरदस्त हिट हुआ। मीनू को एक के बाद एक डांस के ऑफर मिलने लगे और वह उनसे ऊब गईं। उन्हें भूमिकाएं चाहिए थीं। आखिरकार मीनू को कॉमेडी भूमिकाएं मिलने लगीं। उन्होंने उस समय के टॉप कॉमेडियन जैसे जोनी वॉकर, ओम प्रकाश, सुंदर आदि के साथ काम किया। फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ में तो उनकी जोड़ी उनके सगे भाई महमूद के साथ भी बनायी गई। दोनों ने प्रभावी एक्टिंग व नृत्य किया, लेकिन इससे ज़बरदस्त विवाद खड़ा हो गया, जन प्रदर्शन भी हुए कि भाई व बहन को पर्दे पर रोमांस करते हुए कैसे दिखाया जा सकता है? तब मीनू ने कहा था, ‘लो भाईजान, हो गई छुट्टी, अब से हम सिर्फ भाई बहन के रोल ही करेंगे।’ 
मीनू ने जोनी वॉकर के साथ अनेक फिल्में कीं। ‘कागज़ के फूल’ में दोनों ने ‘हमको प्यार करना मांगता’ गाने पर नृत्य भी किया। ‘पैगाम’ में भी दोनों ने एक गाने पर नृत्य किया था। ‘सीआईडी’ में ‘बूझ मेरा क्या गांव रे’ गाना मीनू पर ही फिल्माया गया था, जो बहुत मशहूर हुआ। ‘इंसान जाग उठा’ में मीनू ने मधुबाला के साथ ‘जानू जानू रे’ पर साथ मिलकर नृत्य किया था, जब दो सहेलियां एक-दूसरे को अपने प्रेम प्रकरण के बारे में चिढ़ाती हैं। फिर मीनू को कॉमेडी से भी बोरियत होने लगी। उन्हें साइड हीरोइन की भूमिकाएं मिलने लगीं, जैसे ‘चिराग कहां रोशनी कहां’, जिसमें उन पर दो गीत फिल्माए गये। बतौर हीरोइन उनकी पहली फिल्म ‘हम हैं राही प्यार के’ थी और इसके बाद ‘ब्लैक कैट’, ‘घर घर की बात’, ‘घर बसा के देखो’ आदि फिल्में आयीं। मीनू की अंतिम फिल्म ‘पालकी’ थी। इसके बाद वह कनाडा शिफ्ट हो गईं। 23 अक्तूबर 2021 को कैंसर की वजह से मीनू मुमताज़ का टोरंटो, कनाडा में 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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