विश्व शतरंज चैम्पियनशिप में क्या दो भारतीय खिलाड़ी आपस में टकराएंगे ?

क्या ऐसा हो सकता है कि विश्व चैंपियन डी. गुकेश (क्लासिकल शतरंज फॉर्मेट) को एक भारतीय ही खिताब के लिए चुनौती दे? क्या ऐसा भी हो सकता है कि इसी फॉर्मेट के महिला वर्ग में एक भारतीय खिलाड़ी विश्व खिताब की दावेदार बनकर उभरे? ये दोनों ही स्थितियां हकीकत का रूप ले सकती हैं, संभावनाएं प्रबल हैं। कैंडिडेट्स के पुरुष वर्ग में भारत के ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानंद हैं और अगर वह यह प्रतियोगिता जीत जाते हैं, तो उन्हें गुकेश को चुनौती देने का अवसर मिलेगा और तब पहली बार ऐसा होगा कि दो भारतीय खिताबी जंग में होंगे। कैंडिडेट्स के महिला वर्ग में तीन भारतीयों ने क्वालीफाई किया था, लेकिन सुरक्षा कारणों से कोनेरू हम्पी ने अपना नाम वापस ले लिया और अब सिर्फ दिव्या देशमुख व प्रज्ञानंद की बहन आर. वैशाली भारत की तरफ से मैदान में हैं और बहुत मुमकिन है कि इनमें से एक कैंडिडेट्स में जीत दर्ज करके चीन की जू वेनजुन को चुनौती देने का अवसर प्राप्त करे, जो इस समय विश्व चैंपियन हैं। 
कैंडिडेट्स के इन दोनों वर्गों- ओपन व महिला के लिए 8-8 खिलाड़ी क्वालीफाई करते हैं। इनमें से जो विजेता बनते हैं, उन्हें वर्तमान विश्व चैंपियंस को खिताबी चुनौती देने का मौका मिलता है, लेकिन बात सिर्फ चैलेंजर बनने की नहीं है बल्कि दांव पर बहुत बड़ा नगद ईनाम भी है। इस बार कैंडिडेट्स के लिए कुल प्राइज मनी 1 मिलियन अमरीकी डॉलर हैं, जिनमें से 700,000 डॉलर ओपन श्रेणी के लिए और 300,000 डॉलर महिला श्रेणी के लिए हैं। पेजिया, सायप्रस में कैंडिडेट्स 28 मार्च को शुरू हुआ और 16 अप्रैल 2026 तक खेला जायेगा। यह डबल राउंड-रोबिन फॉर्मेट में खेला जा रहा है और जिस खिलाड़ी के भी अंत में सबसे अधिक अंक होंगे उसे विजेता व चैलेंजर घोषित कर दिया जायेगा। 
ओपन श्रेणी में जो खिलाड़ी अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं, वह हैं आर. प्रज्ञानंद (भारत), फैबियानो कारूआना (अमरीका), हिकारू नाकामुरा (अमरीका), अनीश गिरि (निदरलैंड्स), वेई यी (चीन), जवोखिर सिंदरोव (उजबेकिस्तान), आंद्रे एसिपेंको (रूस) और मैथियास ब्लूबान (जर्मनी)। जबकि महिला श्रेणी में हैं दिव्या देशमुख (भारत), आर वैशाली (भारत), एना मुजीचुक (यूक्रेन), तान जहोंग्यी (चीन), ज़हू जिनर (चीन), बीबीसारा अस्सुबायेवा (कजाखस्थान), कैटरीना लाग्नो (रूस) और एलेग्जेंडरा गोर्याचिकिना (रूस)। दूसरे शब्दों में हर श्रेणी में 8-8 खिलाड़ी हैं, एक बड़ा नगद ईनाम दांव पर लगा हुआ है और चैलेंजर बनकर विश्व चैंपियन से खिताबी मुकाबले का अवसर भी है। 
कैंडिडेट्स का विजेता कौन बनेगा? कैंडिडेट्स के लिए क्वालीफाई करना अपने आपमें बहुत कठिन प्रक्रिया है, लेकिन एक बार जब वह समाप्त हो जाती है, तो यह प्रतियोगिता इतनी अनिश्चित होती है कि विजेता की भविष्यवाणी करना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल अवश्य होता है। अंतिम चक्र तक विजेता का अंदाज़ा लगाना आसान नहीं होता है; क्योंकि बिसात पर ग्रैंड-मास्टर्स होते हैं, जो किसी भी दिन किसी को भी हराने की काबिलियत रखते हैं। साथ ही हर कोई ज़बरदस्त तैयारी के साथ आता है और अपने तरकश में आश्चर्यचकित करने वाले तीर भी लिए रहता है। यह ऐसी कठिन प्रतियोगिता है कि इसमें अनुभव कुछ खास काम नहीं आता है, जैसा कि पिछले तीन विजेताओं से मालूम होता है कि वे तीनों ही कैंडिडेट्स में डेब्यू करने वालों में से थे- इयान नेपोमिनियात्ची (2020 व 2021) और गुकेश (2024)। गुकेश ने तो न सिर्फ मात्र 18 वर्ष की आयु में कैंडिडेट्स में क्वालीफाई करके उसे जीता बल्कि बाद में वह सबसे कम आयु में विश्व चैंपियन भी बने। 
दरअसल, लगभग तीन सप्ताह की इस प्रतियोगिता में न सिर्फ बर्दाश्त की सीमाओं की कड़ी परीक्षा होती है बल्कि मानसिक क्षमता, हार के बाद वापसी करने की काबिलियत और मानसिक रणनीति विजेता व रनरअप का अंतर बन जाती है। इसी बात ने दो साल पहले गुकेश को भीड़ से अलग खड़ा कर दिया था। इस बार फैबियानो कारूआना को प्रमुख दावेदार समझा जा रहा है, जिन्होंने छठी बार कैंडिडेट्स के लिए क्वालीफाई किया है और 2018 में वह चैलेंजर भी बने थे। फैबियानो कारूआना को इस समय मैगनस कार्लसन के बाद सबसे मज़बूत खिलाड़ी समझा जाता है, क्लासिकल फॉर्मेट में और इसकी वजह उनकी गहरी ओपनिंग तैयारी है। फैबियानो कारूआना भी मानते हैं कि अनुभव उन्हें अन्यों पर बढ़त प्रदान नहीं करता है। जीत के लिए रिस्क लेना पड़ता है, जो बैकफायर भी कर सकता है। फैबियानो कारूआना की कमजोरी रैपिड व ब्लिट्ज हैं, जिन्हें टाई ब्रेक की स्थिति में खेलनी की मजबूरी होती है। वैसे किसी को भी क्लासिकल में कमज़ोर समझना बेवकूफी होगा। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

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