अक्ल बड़ी या सुंदरता
खरगोश और बंदर चंपक वन के एक ही मोहल्ले में रहते थे। दोनों हम उम्र थे और अक्सर साथ-साथ घूमते फिरते थे।
जहां खरगोश अभिमानी स्वभाव का था, वहीं बंदर बहुत सीधा सादा और सरल स्वभाव का था। खरगोश को अपनी सुंदरता का बहुत घमंड था। वह बंदर को उस की काली सूरत पर व्यंग्य कर अक्सर चिढ़ाता था। बंदर ‘दोस्त है’ कह कर खरगोश की बातों को बुरा नहीं मानता था।
एक दिन खरगोश और बंदर वन में घनी झाड़ियों की ओर घूमने चले गए। उधर खूंखार जानवरों रीछ, चीता, शेर आदि का निवास था।
वे घनी झाड़ियों के बीच टहल रहे थे, तभी खरगोश ने पूछा- बंदर भाई, यदि मेरी सुंदरता तुम्हें मिल जाए तो तुम क्या करोगे?’
बंदर समझ गया कि खरगोश उसकी काली सूरत की हंसी उड़ाने के लिए पूछ रहा है। खरगोश भाई, मैं जैसा भी हूं अच्छा हूं। मैं सुंदर बनने की चाह नहीं रखता और ऐसी बातों में समय गंवाना नहीं चाहता, बंदर बोला। ‘काले हो नए इसलिए ऐसा कह रहे हो’, कह खरगोश खिलखिला कर हंसने लगा। तभी झाड़ियों के बीच से सूखे पत्तों की चरमराहट सुनाई दी तो दोनों डर गए। ‘लगता है, आसपास कोई खतरनाक जानवर है। तुम रूको, मैं देखता हूं’, कहता हुआ बंदर झाड़ी की तरफ देखने लगा। तभी झाड़ियों से एक रीछ सामने आ गया। दोनों के होश उड़ गए। रीछ बहुत मोटा व तगड़ा था।
कुछ सोच कर बंदर चिल्लाया, ‘खरगोश भाई, भागो। रीछ हमें मार डालेगा।’ रीछ क्रोध से बंदर की ओर दौड़ा। बंदर भागते हुए तेजी से एक पेड़ पर चढ़ गया। रीछ पेड़ पर चढ़ना चाहता था मगर 1.2 बार कोशिश करने के बाद उसने इरादा छोड़ दिया। तभी रीछ की नज़र खरगोश पर पड़ी। खरगोश भी एक-दूसरे पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था लेकिन चढ़ नहीं पा रहा था।
तब तक रीछ दौड़ कर खरगोश के बिल्कुल नज़दीक पहुंच गया और अपने पंजे से उस पर प्रहार किया। खरगोश चोट खाकर नीचे गिर गया। उसके लिए अब भागने का कोई मौका ही नहीं था। रीछ ने भरपूर प्रहार किया था, अत: वह दर्द से कराह उठा था।
बंदर से यह सब नहीं देखा गया। वह समझ गया कि खरगोश तो पेड़ पर चढ़ नहीं सकता और रीछ उसे मार डालेगा। वह खरगोश की जान बचाने के लिए पेड़ से जमीन पर कूदा।
रीछ खरगोश को छोड़ बंदर की ओर लपका। रीछ को अपनी ओर आते देख कर बंदर डरा नहीं बल्कि हिम्मत से काम लिया। रीछ ने अपने पंजे से बंदर पर प्रहार किया। बंदर जमीन पर गिर गया। बंदर चिल्लाया, ‘खरगोश भाई, मेरी फिक्र मत कर। तू जल्दी से भाग कर कहीं छिप जा। मैं रीछ से किसी तरह निपट लूंगा’।
खरगोश झट से झाड़ियों के झुंड में छिप गया। उधर बंदर पेट के बल पड़ा हुआ था और रीछ से बचने का उपाय सोच रहा था। वह भाग कर पेड़ पर नहीं चढ़ सकता था क्योंकि रीछ उस पर हावी था। अचानक उसे याद आया कि रीछ से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह होता है कि मरे हुए की तरह स्वांग बना कर लोथ की तरह पड़े रहो। रीछ को एक बार यकीन हो जाए कि उसका शिकार मर गया है तो वह निश्चिंत हो जाता है और शिकार को वैसा ही छोड़ कर चल देता है। मुझे बिना हिलेडुले पड़े रहना चाहिए। चाहे कुछ भी हो, मुझे हिलना डुलना नहीं है’, बंदर ने मन ही मन निश्चय किया। रीछ बंदर के पास आया और उसे पंजे से हिलाया। फिर पंजे से उसकी पीठ पर वार कर दिया। बंदर भीतर ही भीतर दर्द से बिलबिला उठा।
रीछ ने एक बार फिर बंदर की गरदन पर पंजे से वार किया। बंदर दर्द सहता हुआ सांस रोक कर पड़ा रहा। कुछ पल रूक कर रीछ घनी झाड़ियों में गुम हो गया।
खरगोश झाड़ियों के पीछे छिप कर सब कुछ देख रहा था। रीछ के चले जाने के बाद वह धीरे-धीरे बंदर के पास आया।
बंदर भाई... बंदर भाई... तुम ठीक तो हो?
उसने घबराकर स्वर में पूछा। ‘हां, मैं बिल्कुल ठीक हूं’, बंदर ने सिर उठा कर आसपास देखते हुए पूछा, ‘रीछ भाग गया?’
‘हां, घनी झाड़ियों में कहीं गुम हो गया’, खरगोश ने जवाब दिया। खरगोश की आंखों से आंसू बह रहे थे।
‘यह क्या, खरगोश भाई। तुम रो रहे हो?’ बंदर ने पूछा।
खरगोश बोला, बंदर भाई, मैं थोड़ी देर पहले तुम्हारी सूरत को लेकर तुम्हारा अपमान कर रहा था। एक तुम हो जिस ने अपनी जान जोखिम में डाल कर मेरी जान बचाई। सच, मैं कितना बुरा हूं।’
भाई, बुरे वक्त में जो अपने दोस्त की रक्षा न कर सके वह दोस्त कैसा। मैं तुम से सच्ची मित्रता करता हूं, फिर तुम्हें रीछ के हाथों मरते कैसे देख सकता था? ‘बंदर बोला’।
‘भाई, मुझे माफ कर देना। अब मैं तुम से बुरा व्यवहार कभी नहीं करूंगा, खरगोश ने माफी मांगी।
‘अरे, छोड़ो भी... चलो, घर चलते हैं’, बंदर ने खरगोश के आंसू पोंछते हुए कहा। फिर दोनों घर की ओर चल पड़े।
चलते चलते खरगोश ने पूछा, ‘बंदर भाई, रीछ तुम्हें छोड़कर वापस कैसे चला गया?’ ‘खरगोश भाई, शायद यह बात तुम्हें मालूम नहीं होगी। रीछ को एक बार यकीन हो जाए कि उसका शिकार मर गया है तो वह निश्चिंत हो जाता है और शिकार को वैसा ही छोड़ कर चल देता है। यह बात मेरे दिमाग में आते ही मैं मरे हुए की तरह स्वांग बना कर लोथ की तरह पड़ा रहा’ बंदर ने रीछ से बचने का तरीका बताया। खरगोश बोला, ‘सच, अक्ल बड़ी चीज होती है, सुंदरता नहीं। (उर्वशी)



