अप्रवासी भारतीयों की देश वापसी से दुनिया चिन्तित
कभी बेहतर भविष्य और कभी स्थायी नागरिकता के सपनों के साथ दुनियाभर में फैले लगभग 3 करोड़ 54 लाख भारतीयों और भारतवंशियों में से अब बड़ी तेज़ी से भारतीय ‘रिवर्स माइग्रेशन’(विपरीत प्रवासन) कर रहे हैं। ईरान तथा अमरीक़ा-इज़रायल युद्ध के कारण करीब 3 से 5 लाख भारतीय विभिन्न खाड़ी देशों से पिछले 4-5 महीने के भीतर जो लौटे हैं, उनकी वजह तो भले तात्कालिक युद्ध और युद्ध जैसे लंबे समय से परिस्थितियाें का संकट रहा हो, लेकिन ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अमरीका से भी पिछले एक साल में बड़े पैमाने पर भारतीयों ने रिवर्स माइग्रेशन का रुख किया है। यह महज सामाजिक बदलाव भर नहीं है बल्कि वैश्विक राजनीति की बदलती भू-राजनीति, मंदी का शिकार होती अर्थव्यवस्थाएं और बढ़ती बेरोज़गारी के साथ-साथ विभिन्न देशों में कट्टरपंथ का उभार भी इस प्रवासन के पीछे एक बड़ा कारण है।
हाल के सालों में जिन देशों से बड़ी संख्या में अप्रवासी भारतीयों की वापसी हुई है, उनमें कनाडा भी एक प्रमुख देश है, जहां बढ़ती बेरोज़गारी, रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और भारत तथा कनाडा के बिगड़ते कूटनीतिक रिश्तों के चलते हज़ारों भारतीय छात्र और पेशेवर कनाडा छोड़कर, भारत पिछले 12 से 14 महीने के बीच लौटे हैं। जबकि अमरीका में टैक-सेक्टर में बढ़ी छंटनी, एच-1बी वीजा अनिश्चिताओं ने भी अप्रवासी भारतीयों की चिंता और असुरक्षा बढ़ायी है। इसी तरह खाड़ी देशों से पिछले एक साल के भीतर 3 से 5 लाख भारतीय जिनमें से ज्यादातर उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के अस्थायी कामगार थे, वे पश्चिम एशिया संकट के कारण वापस अपने देश लौटे हैं। जिन देशों से बड़े पैमाने पर भारतीय वापस आये हैं, इनमें से सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और ओमान हैं। इनकी वापसी के कारणों में तेल आधारित अर्थव्यवस्था में दबाव, युद्ध और क्षेत्रीय तनाव, श्रमिकों की छंटनी, वीजा नियमों की सख्ती और स्थानीय लोगों के लिए बढ़ती प्राथमिकता रही है।
पिछले एक साल में 80 हज़ार से 1.5 लाख के आसपास भारतीय छात्र और अस्थायी कामगार कनाडा से भी लौटे हैं। इनके पीछे भी छात्र वीजा नियमों में की गई सख्ती, कनाडा में बढ़ती बेरोज़गारी, स्थायी प्रवास की बढ़ती हुई समस्या और किराया तथा जीवनयापन कई गुना महंगा हो जाने के कारण इन भारतीयों की वापसी हुई है। लेकिन जहां तक अमरीका का सवाल है, वहां से एक साल के भीतर 50 हज़ार से 1 लाख भारतीय वापस आये हैं या पुनर्वास की प्रक्रिया में रहे हैं। अमरीका से छात्रों की वापसी कम हुई है, ज्यादातर उच्च कौशल कामगार ही वापस लौटे हैं। इसकी वजह एच-1बी वीजा अनिश्चितता, ग्रीन कार्ड, टैक सेक्टर में ले ऑफ, एआई ऑटोमेशन बड़े कारण हैं। लेकिन सबसे आश्चर्यजनक विपरीत प्रवासन (रिवर्स माइग्रेशन) हाल के दिनों में ब्रिटेन से हुआ है। साल 2025 में 51 हज़ार भारतीय छात्र और 21 हज़ार से ज्यादा कामकाजी लोग लंदन सहित ब्रिटेन के कई शहरों से वापस भारत की तरफ लौटे हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण यहां बढ़ती कट्टरता और अप्रवासी भारतीयों के साथ स्थानीय लोगों की गहराती बेरुखी रहे हैं। इतने बड़े पैमाने पर रिवर्स माइग्रेशन अब के पहले ब्रिटेन से कभी नहीं हुआ। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे मलेशिया, सिंगापुर और कंबोडिया से भी पिछले एक साल में कई लाख लोगों की वापसी हुई।
सवाल है इतने बड़े पैमाने पर आखिर अप्रवासी भारतीय दुनिया के विभिन्न देशों को छोड़कर भारत क्यों आ रहे हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह एक तो स्थानीय लोगों में भारतीयों को लेकर बढ़ती नफरत और ईर्ष्या है, दूसरे नंबर पर दुनिया के लगभग सभी देशों में अर्थव्यवस्था के बिगड़ते हालात हैं और तीसरा बड़ा कारण यह है कि भारत में हाल के सालों में अवसर बढ़े हैं। विशेषकर जो आईटी प्रोफेशनल्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, रिटायर्ड एनआरआई, रिमोट वर्कर्स और ग्लोबल इंडियन लौट रहे हैं। इनके पीछे भारत में हाल के दिनों में बढ़े अवसर भी हैं। एक और कारण ये भी है कि अब भारत के टियर-2 शहरों में भी जीवन बेहतर हो गया है। इसलिए जिन भारतीयों ने कई साल विदेश में रहकर थोड़ी बहुत कमाई कर ली है, वह भी भारत आकर अब उसी कमाई की बदौलत अच्छा जीवन जीने की कोशिश कर रहे हैं।
कुल मिलाकर भारतीयों का पिछले एक-डेढ़ साल के भीतर रिवर्स माइग्रेशन केवल एक वजह से नहीं है, लेकिन यह भी नहीं कहा जा सकता कि सब कुछ ठीकठाक है। भारतीयों के तेज प्रवासन को देखकर पूरी दुनिया चिंतित है, क्योंकि पश्चिम से जब टेक्नो टैक और आईटी प्रोफेशनल रिवर्स माइग्रेशन करते हैं, तो यह सिर्फ उनके विकास पर सवालिया निशान नहीं होता, बल्कि जहां से वो आ रहे होते हैं, उसके हालात पर कहीं बड़ा प्रश्न-चिन्ह होता है। यही वजह है कि भारतीयों के इस तेज़ रफ्तार माइग्रेशन को दुनिया के ज्यादातर देश चिंता की नज़रों से भी देख रहे हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



