देश में प्रति वर्ष ट्रैफिक की भेंट चढ़ जाता है अरबों लीटर तेल
भारत में पेट्रोल और डीज़ल को लेकर स्थिति गम्भीर बनी हुई है। इस दौरान कुछ रिपोर्टें सामने आई हैं जो भी चिंताजनक हैं। भारतीय केवल वाहन चलाने के समय ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम में भी अरबों रुपये का पेट्रोल और डीज़ल धुंआ हो जाता है। हाल ही में नीदरलैंड की एक प्रसिद्ध कंपनी की ओर से भारतीयों द्वारा वाहनों के उपयोग और अन्य बातों पर एक अध्ययन किया गया था। इसके अलावा पीक आवर्स में और सामान्य स्थिति में जब सड़कें खाली हों तब आप 15 मिनट में अपने घर से कितनी दूर पहुंच सकते हैं, उसका भी अध्ययन किया गया था।
कंपनी द्वारा जो डेटा दिया गया है, उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि वास्तव में भारतीयों को अपनी वाहन चलाने की आदत, सरकार को अपनी योजनाओं और अन्य पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार केवल लोगों को कार पूलिंग करने को कहे या फिर वर्क फ्रॉम होम अथवा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने को कहे, उससे ज़िम्मेदारी पूरी नहीं होती। सरकार और जनता की संयुक्त भागीदारी से ही यह कार्य पूरा हो सकता है। कंपनी द्वारा दुनियाभर के वाहनों, स्मार्ट फोन, जीपीएस डिवाइस और रियल टाइम ट्रैफिक डेटा को एकत्र करके अध्ययन किया जाता है। भारत में भी इन सभी विवरणों को लेकर अध्ययन किया गया, जिसके परिणाम चौंकाने वाले हैं।
हाल ही में आई रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों द्वारा अनुमानित हर वर्ष 3.45 लाख करोड़ रुपये के पेट्रोल और डीज़ल का व्यय केवल ट्रैफिक के कारण किया जाता है। देश के चार बड़े महानगर दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता और बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर ट्रैफिक के कारण तेल खपत हो जाता है। इन चार महानगरों द्वारा वर्ष में 1.50 लाख करोड़ रुपये का तेल केवल ट्रैफिक जाम के कारण धुंआ हो जाता है। रिपोर्ट बताती हैं किए भारतीयों द्वारा प्रतिदिन ट्रैफिक में 960 करोड़ रुपये के तेल की खपत की जाती है। उसमें से लगभग चालीस प्रतिशत यानी कि अनुमानित 400 करोड़ रुपये का व्यय इन चार बड़े शहरों में होता है।
अध्ययन में बताया गया है किए भारत में हर वर्ष ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं के कारण 34.6 अरब लीटर ईंधन बर्बाद हो जाता है। ट्रैफिक इंडेक्स बताता है कि बेंगलुरु और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में दफ्तर जाने और आने के दौरान लोग ट्रैफिक में फंसते हैं और उसके कारण हर महीने वे 20 से 25 लीटर तेल अधिक खपत करते हैं।
बेंगलुरु में ट्रैफिक की समस्या के कारण पेट्रोल और डीज़ल सबसे अधिक बर्बाद होता। वहां 10 किलोमीटर की यात्रा में 45 रुपये का पेट्रोल तो केवल ट्रैफिक के कारण ही खर्च हो जाता है। बेंगलुरु में सामान्य लोग हर वर्ष अनुमानित 19,000 करोड़ रुपये का पेट्रोल-डीज़ल फूंक देते हैं। इसी प्रकार पुणे में भी ऐसी ही समस्या है। यहां लोग हर 10 किलोमीटर में 40 रुपये का तेल बर्बाद करते हैं। यहां वे हर वर्ष अनुमानित 17,000 करोड़ रुपये के तेल को धुआं करते हैं।
कोलकाता में ट्रैफिक जाम होने के कारण वाहन धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। इस कारण वे 10 किलोमीटर की यात्रा में 35 से 38 रुपये के तेल की बर्बादी करते हैं। यहां के लोग ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण हर वर्ष अनुमानित 15,500 करोड़ रुपये के तेल की बर्बादी करते हैं। यहां ट्रैफिक सिग्नल अधिक होने से अनेक रास्तों में लंबा ट्रैफिक जाम होता है। इसी प्रकार मुंबई में भी स्थिति ऐसी ही है। मुम्बई में लोकल ट्रेनों का नेटवर्क है, सड़कें नई और बड़ी हैं फिर भी ट्रैफिक की समस्या रहती है।
जानकार मानते हैं किए मुम्बई में पीक आवर्स (अधिक व्यस्त घंटे)के दौरान घंटों तक ट्रैफिक जाम रहता है। उसके कारण यहां के लोग हर 10 किलोमीटर की यात्रा के दौरान 32 से 35 रुपये का पेट्रोल-डीज़ल खपत कर देते हैं। यहां हर वर्ष सामान्य आदमी की जेब पर तेल का बोझ अधिक पड़ता है। वे वर्ष में अनुमानित 14,500 करोड़ रुपये का तेल खपत कर देते हैं। इसके अलावा देश की राजधानी दिल्ली में भी पीक आवर्स में निकलना बहुत मुश्किल होता है। य
हां लोग 10 किलोमीटर जाने में 30 रुपये का तेल तो व्यय कर ही देते हैं। ट्रैफिक जाम और धीमे ट्रैफिक के कारण अनुमानित 12,000 करोड़ रुपये का तेल बर्बाद हो जाता है। इसके अलावा एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि भारत में ट्रैफिकजाम की समस्या बहुत विकट है। पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा हाल ही में दी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि देश अपनी आवश्यकता के कच्चे तेल में से 88 प्रतिशत आयात करता है। इसके कारण अनुमानित 11 लाख करोड़ रुपये का खर्च होता है।
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