सरकार ने E20 इथेनॉल कार्यक्रम पर फैलाई जा रही गलत सूचनाओं का किया खंडन

नई दिल्ली, 3 जुलाई - सरकार ने शुक्रवार को देश के ई20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पर सोशल मीडिया में फैल रही गलत सूचनाओं का खंडन किया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 सूत्री स्पष्टीकरण जारी किया। मंत्रालय ने पानी के अत्यधिक इस्तेमाल, इंजन को नुकसान, बीमा अमान्य होने और पर्यावरणीय नुकसान जैसे दावों को खारिज किया है। यह कार्यक्रम पेट्रोल में 20 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने जुड़ा है। मंत्रालय ने बताया कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक अध्ययनों, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय सुरक्षा उपायों पर आधारित है। 
क्या एक लीटर इथेनॉल बनाने के लिए 10 हजार लीटर पानी का इस्तेमाल होता है?
मंत्रालय ने एक लीटर इथेनॉल उत्पादन में 10,000 लीटर पानी की खपत के दावे को भी गलत बताया। मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल डिस्टिलरी प्रति लीटर इथेनॉल के लिए लगभग तीन से पांच लीटर पानी का उपयोग करती हैं। ये डिस्टिलरी पानी को फिर से इस्तेमाल करने से जुड़ी प्रणाली का तेजी से संचालन कर रही हैं।
इथेनॉल उत्पादन के लिए केवल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद बचे हुए चावल का उपयोग वह भी स्वीकृति मिलने पर होता है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि मक्का, जो कार्यक्रम के तहत 40 फीसदी से अधिक इथेनॉल की आपूर्ति करता है, उसे धान की तुलना में कम सिंचाई की जरूरत होती है। 

 
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