वांगचुक का अनशन खत्म, अब सीजेपी आंदोलन का क्या होगा ?

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 23 जुलाई, 2026 की देर रात 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। 59 वर्षीय वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थन में भूख हड़ताल शुरु की थी, जिसके युवा सदस्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं। एक्स पर अपनी पोस्ट में वांगचुक, ने कहा कि ‘विभिन्न शर्तों पर लम्बी वार्ता’ और साथ ही ‘देश में आशंकित हिंसा’ को रोकने के लिए वह अपनी भूख हड़ताल खत्म कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वह 11 किलो वज़न खोने के बाद ‘अब भी ज़िंदा’ हैं। वह नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे, जहां से उन्हें 18 जुलाई, 2026 को जबरन उठाकर अस्पताल पहुंचाया गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा, ‘हम चिंतामुक्त और एहसानमंद हैं कि सोनम सर ने 26 दिनों के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है।’ लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन उस समय तक जारी रहेगा, जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता।’
गौरतलब है कि नीट-यूजी का मई 2026 में पेपर लीक हुआ था। यही पेपर 2024 में भी लीक हुआ था, जिसका मास्टरमाइंड बिहार का संजीव मुखिया बताया गया था, जो 11 माह तक फरार रहा, फिर जब गिरफ्तार किया गया तो तीन माह तक उसके खिलाफ अदालत में आरोप-पत्र ही नहीं दाखिल किया गया, जिससे उसे ज़मानत मिल गई और अब सीबीआई का कहना है कि उसके खिलाफ कोई आरोप बनता ही नहीं है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि पेपर लीक केस फास्ट-ट्रैक अदालतों में चलाये जायेंगे। जब सही से जांच नहीं होगी तो फास्ट-ट्रैक अदालतें क्या करेंगी? निरन्तर पेपर लीकों की एक लम्बी सूची है, जिनमें कोई जवाबदेही स्थापित नहीं की गई है। मध्य प्रदेश के 2013 व्यापम (व्यवसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले में तो राजनेताओं, अधिकारियों और बिचौलियों ने कथित रिश्वत लेकर मेडिकल व इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं तथा सरकारी नौकरियों में भारी धांधली की थी, योग्य छात्रों के स्थान पर डमी उम्मीदवार बैठाए और ओएमआर शीट में हेरफेर की। हज़ारों करोड़ रुपये के इस घोटाले से जुड़े 30 से ज्यादा गवाहों, आरोपियों व संदिग्ध व्यक्तियों की रहस्यमय और अप्राकृतिक परिस्थितियों में मौतें भी हुईं, जिससे देशभर में सनसनी फैली। लेकिन हुआ क्या? जांच और अदालती प्रक्रिया अभी भी जारी है, बस पटवारी भर्ती परीक्षा-2008 में दिसम्बर 2025 में सीबीआई विशेष अदालत, इंदौर ने 10 लोगों को 5-5 साल के कारावास की सज़ा अवश्य सुनायी है। लेकिन पेपर लीक और परीक्षा व भर्ती से संबंधित घोटाले जारी रहे। 
दरअसल, वांगचुक ने सीजेपी के 20 जून, 2026 से चल रहे आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल की थी, जिसकी मुख्य मांगें हैं कि पेपर लीक की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को भंग किया जाये, जिन 21 छात्रों ने पेपर लीक के कारण आत्महत्या की है, उनके परिवारों को उचित मुआवज़ा दिया जाये और जो लोग परीक्षाओं में अनियमितताओं के लिए ज़िम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाये। क्या सरकार ने इन मांगों को मान लिया है जो वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है? वांगचुक से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने अस्पताल में मुलाकात की और चंद चीज़ों का आश्वासन दिया। मांगें मानने और आश्वासन देने में अंतर होता है। वैसे वांगचुक के बिगड़ते हुए स्वास्थ्य को मद्देनज़र रखते हुए समाज के सभी वर्गों की महत्वपूर्ण शख्सियतों ने वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की थी। हालांकि गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में सरकार ने विपक्ष के नेताओं को तो वांगचुक से मिलने नहीं दिया। लेकिन 23 जुलाई, 2026 को केंद्रीय मंत्री नड्डा व डा. जितेंद्र सिंह उनसे मिले और उन्हें आश्वासन दिया कि परीक्षा सुधारों और पेपर लीक पर जवाबदेही की जो छात्रों की मांगें हैं, उन्हें संबोधित किया जायेगा। 
सरकार ने इस बात का भी आश्वासन दिया है कि जिन युवाओं व छात्रों ने 20 जुलाई, 2026 को संसद मार्च में हिस्सा लिया था या जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया उनके खिलाफ मामले दर्ज नहीं होंगे। लेकिन इस बारे में कोई बात सामने नहीं आयी कि जिन पुलिसकर्मियों व सादे कपड़ों में रहस्यमय व्यक्तियों ने कील लगी लाठियां निहत्थे छात्रों पर बरसायीं, जिससे 100 से अधिक छात्रों अस्पताल पहुंचे तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी? प्रदर्शन स्थल पर पत्थरों से भरा ट्रक कौन और क्यों लाया था? कहने का अर्थ यह है कि छात्रों की जो मुख्य मांगें हैं, उन पर सरकार ने न कोई वायदा किया है और न ही कोई आश्वासन दिया है।  प्रधानमंत्री सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने उनसे अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने व अपनी सेहत को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। 
शंकराचार्य से लेकर फिल्मी हस्तियां व देश के प्रमुख खिलाड़ी भी उनसे यही अपील कर रहे थे। इसलिए यह भी मुमकिन है कि जन भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया हो, विशेषकर अपने परिवार के कहने पर। वैसे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वांगचुक पर सरकार ने अपनी तरह से कोई दबाव बनाया हो, जैसा कि सरकारें अक्सर किया करती हैं। 
बहरहाल, इस पृष्ठभूमि में एक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि अब सीजेपी आंदोलन का क्या होगा?  वैसे अगर सीजेपी की वजह से वास्तविक बदलाव नहीं भी आता है तो भी उसने एक सख्त संदेश दे दिया है दृ भारत में जेन-ज़ी की कुंठाओं का प्रबंधन करना सबसे कठिन राजनीतिक चुनौती होगी।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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