खतरनाक मोड़ पर पहुंचा मामला
सोशल मीडिया द्वारा बनी कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर में दिए जा रहे धरने के बाद देश भर के लोगों का ज्यादा ध्यान इस घटनाक्रम की ओर आकर्षित हुआ है। विशेष रूप से कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर 20 जुलाई को संसद की ओर किए गए मार्च और इस दौरान विद्यार्थियों और पुलिस सुरक्षा कर्मचारियों के बीच हुई झड़पों की विशेष रूप से चर्चा हो रही है। आन्दोलनकारी और विपक्षी पार्टियां सुरक्षा बलों पर ज़रूरत से अधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगा रही हैं जबकि सरकारी पक्ष का यह कहना है कि सुरक्षा बलों ने आन्दोलनकारियों को अवरोध तोड़ कर संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए यह कार्यवाही की है। इस दौरान हुईं इन झड़पों में भारी संख्या में युवाओं के साथ-साथ पुलिस कर्मचारी भी घायल हुए हैं। इस घटनाक्रम ने पहले बनी स्थिति को और भी गम्भीर बना दिया है। इंडिया ब्लॉक से संबंधित विपक्षी पार्टियों ने विद्यार्थियों से जुड़े इस मुद्दे को लेकर पिछले 5 दिनों से संसद की कार्यवाही में रुकावट डाले रखी है। उन्होंने मुख्य मुद्दा केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग-पत्र को बनाया है। इस मामले पर राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अधिक प्रतिक्रिया प्रकट कर रही है।
इस संबंध में आम आदमी पार्टी ने कहा है कि ऐसा रवैया धारण करके कांग्रेस विद्यार्थियों के आन्दोलन को कमज़ोर कर रही है। पिछले 5 दिनों से संसद में कोई काम नहीं हुआ। एन.डी.ए. और विपक्षी इंडिया गठबंधन के सांसद एक दूसरे के विरुद्ध नारेबाज़ी करते ही दिखाई दे रहे हैं। सत्तारूढ़ पार्टी लगातार यह कह रही है कि वह संसद में इस मामले पर विस्तारपूर्वक चर्चा करवाने के लिए सहमत है परन्तु राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियां शिक्षा मंत्री के त्याग-पत्र के बिना संसद न चलने देने पर अडिग हैं। इस मामले पर पिछले लम्बे समय से जंतर-मंतर में और फिर अस्पताल में भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक ने अपनी भूख-हड़ताल खत्म कर दी है। विगत दिवस सरकार की ओर से छात्र नेताओं से बातचीत करने के यत्न भी किए गए हैं। इस संबंध में दो मंत्रियों की विद्यार्थियों के दो प्रतिनिधियों के साथ बातचीत भी हुई है, जिन्होंने अपनी कुछ अन्य शर्तों के साथ-साथ इस आन्दोलन को समाप्त करने के लिए पहली शर्त शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्याग-पत्र की रखी है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पहले की गईं अपीलों के अतिरिक्त उन्होंने विगत दिवस विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए एक वीडियो भी जारी की है और कहा है कि पेपर लीक कोई मामूली मामला नहीं है। सरकार द्वारा फास्ट ट्रैक अदालतें बनाई जा रही हैं और आरोपियों को कड़ी सज़ाएं देने की व्यवस्था की जाएगी और संसद में कड़े कानून बनाने के लिए विधेयक भी पेश किया जा रहा है।
उन्होंने विस्तार में जाते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाएं घटित होने के बाद पिछले अढ़ाई महीनों में सरकार की ओर से अनेक कदम उठाए गए हैं। आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो इस समय जेल में हैं। विद्यार्थियों का इस घटनाक्रम में एक वर्ष बर्बाद न हो इसलिए इन परीक्षाओं को पुन: शीघ्र करवाया गया, जिसमें 22 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया और नीट के यह परिणाम 19 जुलाई को घोषित कर दिए गए हैं, परन्तु कॉकरोच जनता पार्टी के नेता और विपक्षी पार्टियां शिक्षा मंत्री के त्याग-पत्र लिए बिना किसी भी स्थिति में आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं। इससे यह मामला एक बार फिर गम्भीर मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। इस मामले का सभी पार्टियों को आपसी सूझ-बूझ से विचार-विमर्श करके हल निकालना चाहिए। पैदा हुआ आपसी टकराव कदाचित भी देश के हित में नहीं है। हम दोनों ही पक्षों को इस संबंध में पुन: विचार करने की अपील करते हैं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

