चेक बाउंस मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: अधिकारी से पहले कटघरे में होगी कंपनी
नई दिल्ली, 4 अगस्त - सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि कंपनी एक 'कानूनी व्यक्ति' (ज्यूरिस्टिक पर्सन) होती है। यदि चेक किसी कंपनी के खाते से जारी किया गया है, तो कंपनी को आरोपी बनाए बिना उसके डायरेक्टर या अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के खिलाफ चेक बाउंस की शिकायत पर आगे कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने एक महिला के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट को मामले में कंपनी को आरोपी बनाने का निर्देश दिया गया था।
आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने दलील दी कि यदि कोई कंपनी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (एनआई) एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध करती है, तो कंपनी को आरोपी बनाए बिना उसके डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने शिकायत और उससे जुड़ी कार्यवाहियों को रद्द करने की मांग ठुकराकर स्पष्ट कानूनी त्रुटि की।

