कांग्रेस नेता नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प अभी भी कायम

नई दिल्ली, 12 जून - कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि जिस निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) के आधार पर नामांकन खारिज किया गया, उस पर अब तक किसी सक्षम अदालत ने संज्ञान ही नहीं लिया है।

सिंघवी ने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) की धारा 33ए के तहत उम्मीदवार को केवल उन आपराधिक मामलों का खुलासा करना होता है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराध में सक्षम अदालत द्वारा आरोप तय (चार्ज फ्रेम) किए जा चुके हों। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में न तो आरोप तय हुए हैं और न ही किसी अदालत ने संज्ञान लिया है, इसलिए नामांकन निरस्त करने का आधार कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
सुनवाई के दौरान सिंघवी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि किसी निजी शिकायत में संज्ञान लेने से पहले प्रस्तावित आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में केवल नोटिस जारी किया गया है, जबकि संज्ञान लेने और आरोप तय होने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
इस दौरान न्यायमूर्ति पीके मिश्रा ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के खिलाफ समन तभी जारी किया जाता है, जब मजिस्ट्रेट प्रथम दृष्टया संतुष्ट हो जाए। इस पर सिंघवी ने कहा कि केवल समन या नोटिस जारी होना संज्ञान लिए जाने के बराबर नहीं माना जा सकता और कानून में दोनों की अलग-अलग प्रक्रिया निर्धारित है।

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