ईरान के चक्र-व्यूह में फंसे डोनाल्ड ट्रम्प
पूरे विश्व की निगाहें इस समय अमरीका-ईरान के मध्य चल रहे तनावपूर्ण हालात पर लगी हुई है। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने छल से राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान से एक ऐसे युद्ध में उलझा दिया है जिससे ट्रम्प के लिये बड़ी परेशानी खड़ी हो गयी है। विश्व इतिहास में यह पहला मौका है जबकि ईरान जैसा देश प्रत्येक मोर्चों पर अमरीका को बराबर की चुनौती दे रहा है। नतीजतन ट्रम्प के गलत फैसलों से अब अमरीकी सेना के जवान भी ऊब चुके हैं। पिछले दिनों अमरीकी नौसेना के एक परमाणु ऊर्जा संचालित सुपर-कैरियर विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन सीवीएन-72 को लेकर एक ऐसी खबर आई जिसने पूरी दुनिया को हैरानी में डाल दिया। यह युद्धपोत 21 नवम्बर, 2025 को सैन डिएगो, कैलिफोर्निया से अपनी निर्धारित यात्रा पर निकला था। शुरुआत में इसे प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में तैनात किया जाना था, लेकिन जनवरी 2026 में इज़रायल-अमरीका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ जाने के बाद इसे अचानक पश्चिम एशियाध्/अरब सागर की ओर मोड़ दिया गया। इस युद्धपोत पर लगभग 5,000 नौसैनिक और मरीन तैनात हैं। इन नौसैनिकों ने समुद्र में लगातार 250 से अधिक दिन बिताए हैं, जिसमें से करीब 200 दिन बिना किसी बंदरगाह पर रुके हुये बीते हैं, जो आधुनिक अमरीकी नौसेना के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। नौसैनिकों व मरीन की इस तैनाती को मूल रूप से मई 2026 में समाप्त होना था, लेकिन ईरान के साथ जारी जंग के कारण इसे बार-बार आगे बढ़ाया गया, जिससे सैनिकों की घर वापसी अनिश्चित हो गई। सैनिकों में पैदा हुये इसी अत्यधिक मानसिक दबाव के चलते कम से कम 6 नौसैनिकों ने युद्धपोत से समुद्र में कूद कर आत्महत्या करने की कोशिश की, जिन्हें उन्हीं के सैनिक साथियों द्वारा समय रहते बचा लिया गया। इस घटना को लेकर पूरी दुनिया में बड़ी चर्चा छिड़ गई है।
माइक लेविन जैसे कई अमरीकी सांसदों और मरीन सैनिकों के परिवारों ने भी यह खुलासा किया कि युद्धपोत पर जीवन नरक जैसा हो गया है। कई हफ्तों तक युद्धपोत पर गर्म पानी नहीं मिलता और टॉयलेट्स व शावर आदि खराब हो चुके हैं। लॉन्ड्री सुविधा बंद रहने से सैनिक गंदे कपड़े पहनने को मजबूर हैं। युद्धपोत पर भोजन और ज़रूरी सामान की भारी कमी हो गई, यहां तक कि राशन कम होने पर सैनिकों को भोजन में बेहद कम व सीमित मात्रा दी जा रही है। और तो और युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से बहरीन जैसे अमरीकी ठिकानों से युद्धपोत तक रसद पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। इस हादसे, अमरीकी सांसदों के दबाव और परिवारों के आक्रोश के बाद अब अमरीकी नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ ने घोषणा की है कि युद्धपोत को अब रोटेशन प्लान के तहत वापस बुलाया जा रहा है। मिडिल ईस्ट में इसकी जगह लेने के लिए दूसरे विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को भेजा जा रहा है ताकि थके हुए सैनिकों को राहत मिल सके। परन्तु इस खबर ने वर्तमान समय में अमरीकी सैनिकों की उबावपूर्ण स्थिति तो उजागर कर ही दी है।
उधर ईरान की तरफ से संभावित ख़तरे के संदेह में राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा अंतिम समय में विमान बदलने से जुड़ी हुई एक हैरतअंगेज़ खबर सामने आई। वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार पिछले महीने तुर्की में नेटो शिखर सम्मेलन से निकलते समय ट्रम्प ने गुपचुप तरीके से अपना विमान बदल लिया था। खबरों के मुताबिक अमरीकी राष्ट्रपति टेलीविज़न कैमरों की मौजूदगी में एयर फोर्स वन में सवार हुए, फिर उन्हें चुपके से एक ऊंचे एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक में ले जाया गया और एक सैन्य विमान तक पहुंचाया गया। हालांकि, अब वॉशिंगटन पोस्ट की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प ने एक बार फिर विमान बदल दिया था। ट्रम्प के ईरान से भयभीत होने की एक सबसे बड़ी वजह यह भी है कि जुलाई 2026 में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान ईरान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या से जुड़े बेहद आक्रामक पोस्टर, बैनर और नारे खुले आम लगाए गए थे। फरवरी 2026 में अमरीका-इज़रायल के हवाई हमलों में अयातुल्ला खामेनेई व उनके कई परिजन शहीद हो गए थे जिसके बाद हुए उनके विशाल अंतिम संस्कार में ईरानी लोगों में काफी आक्रोश देखा गया था। अंतिम संस्कार के दौरान राजधानी तेहरान और खामेनेई के दफ्न वाले शहर मशहद की सड़कों पर जगह जगह अंग्रज़ी में ट्रम्प को धमकी बड़े बैनर और पोस्टर देखे गये थे। कई पोस्टरों में डोनाल्ड ट्रम्प, उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों पर बंदूक की दूरबीन का निशाना क्रॉस हेयर बना हुआ था।
यहां तक कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी लिखित बयान जारी कर कहा कि ईरान ने इन ‘अपराधी हत्यारों’ की एक हिट-लिस्ट तैयार की है और उनसे बदला लेना अब ईरान का राष्ट्रीय संकल्प है। यह कहना गलत नहीं होगा कि अपने ही गलत फैसलों के कारण ट्रम्प ईरान के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस चुके हैं।
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