सुखबीर पर हमला

महाराष्ट्र के नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले ने जहां बड़ी चिंता पैदा की है, वहीं इस पवित्र धार्मिक स्थल पर की गई इस जानलेवा कार्रवाई की सभी ओर से कड़ी आलोचना भी की गई है। धार्मिक स्थल पर ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के घटित होने से इन पवित्र स्थलों के सम्मान पर भी आंच आती है। इससे धार्मिक स्थलों की प्रतिभा पर भी बड़ा प्रभाव पड़ता है। सुखबीर पर यह दूसरा जानलेवा हमला ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में हुआ। इससे पहले दिसम्बर, 2024 में उन पर उस समय गोली चलाई गई थी, जब वह श्री दरबार साहिब के प्रांगण में अकाल तख्त के निर्देश पर ‘सेवा निभा’ रहे थे।
कभी सिख इतिहास में ऐसी मान्यताएं थीं कि गुरुद्वारा साहिब परिसर के भीतर कोई भी हिंसक कार्रवाई करने संबंधी सोच भी नहीं सकता था परन्तु विगत लम्बी अवधि से ये उच्च-मान्यताएं खुर्द-बुर्द होती जा रही हैं। सुखबीर से या अकाली दल बादल से सिख भाईचारे के ही कई गुट नाराज़ हो सकते हैं क्योंकि इन बातों को ही लेकर सुखबीर और उनके ज्यादातर सभी साथियों को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होना पड़ा था और अपने शासनकाल के दौरान की गई गलतियों को बख्शाने के लिए उन्होंने नम्रता सहित धार्मिक सज़ा भी भुगती थी। ऐसी नाराज़गियां और सैद्धांतिक मतभेद अभी भी कायम दिखाई देते हैं, परन्तु इसका मतलब यह नहीं कि पवित्र स्थलों पर निशाना बना कर अपने किसी विरोधी को नुकसान पहुंचाने का यत्न किया जाए। राजनीतिक क्षेत्र में भी राजनीतिज्ञों के और अलग-अलग गुटों के अनेक मतभेद दिखाई देते हैं। आज तो ज्यादातर राजनीतिज्ञ इस स्तर पर पहुंच चुके हैं कि वे अपने विरोधियों से गाली-गलोच तक भी उतर आते हैं, परन्तु इन विरोधों में हिंसक मानसिकता का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। न ही समाज ऐसी गतिविधियों का किसी तरह से समर्थन करता है। इसलिए सुखबीर सिंह बादल को गुरुद्वारा साहिब में एक बार फिर निशाना बनाने पर भारी रोष पैदा हुआ दिखाई देता है। चाहे संबंधित हमला करने वाला एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति है। अपनी अच्छी नौकरी के बाद निहंग बाणा धारण करके वह पिछले 2 वर्ष से गुरुद्वारा साहिब की सेवा करता रहा है परन्तु ऐसे व्यक्ति द्वारा की गई इस कार्रवाई की हर तरफ से कड़ी आलोचना ही हुई है। आज की राजनीति भी ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई देती है जिससे आगे आपसी विरोध नहीं, अपितु आपसी हिंसक लड़ाई-झगड़े ही दिखाई देते हैं।
लोकतंत्र में आपसी विरोध का होना स्वाभाविक है परन्तु इसमें हिंसक प्रवृत्तियों का पैदा होना नकारात्मक  प्रक्रिया ही कही जा सकती है। सुखबीर सिंह बादल ने सर्जरी के बाद बड़ी दृढ़ता के साथ यह कहा है कि प्रदेश में हालात का लाभ लेकर शांति भंग करने वालों से शिरोमणि अकाली दल कभी भी समझौता नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी समुदायों में आपसी भाईचारक साझ बना कर रखना ही हमारी नीति का उद्देश्य है। उनकी पार्टी पंजाब में शांति भंग करने के किसी भी यत्न को सफल नहीं होने देगी। हम सुखबीर सिंह बादल की प्रकट की गई ऐसी भावनाओं से सहमति व्यक्त करते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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