कमर और गर्दन दर्द को सामान्य समझकर न टालें
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में कमर और गर्दन का दर्द एक ‘लाइफस्टाइल डिजीज़’ बनता जा रहा है। पहले यह समस्या मुख्यत: बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने वाले युवा, गृहिणियां, किसान, खिलाड़ी और यहां तक कि विद्यार्थी भी रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) से जुडी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश लोग दर्द को सामान्य समझकर दर्द-निवारक दवाइयों से काम चलाते रहते हैं, जबकि कई मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। समय पर जांच और उचित उपचार से अधिकांश मरीज़ सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।
रीढ़ की हड्डी की सामान्य बीमारियां
सम्बद्ध रोगों के विशेषज्ञ एक डाक्टर के अनुसार रीढ़ की हड्डी से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में स्लिप डिस्क, साइटिका, सर्वाइकल स्पान्डिलोसिस, लम्बर कैनाल स्टेनोसिस, स्पाइनल फ्रैक्चर, ऑस्टियोपोरोसिस, संक्रमण तथा उम्र के साथ होने वाले घिसाव (डिजेनेरेटिव स्पाइन डिजीज़) शामिल हैं। इन रोगों के कारण कमर या गर्दन में दर्द, हाथ या पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी तथा चलने-फिरने में कठिनाई हो सकती है। यदि पेशाब या मल पर नियंत्रण कम हो जाए या पैरों की शक्ति तेज़ी से घटने लगे, तो यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है और तुरंत विशेषज्ञ से सम्पर्क करना चाहिए।
दर्द को दबाइए नहीं, कारण को पहचानें
यदि दर्द 3-4 सप्ताह से अधिक बना रहे, दर्द बार-बार लौट कर आए, हाथ या पैर में सुन्नपन या कमज़ोरी हो, चलने में कठिनाई होने लगे या रात में दर्द अधिक बढ़े, तो केवल दवा लेकर इंतज़ार करना उचित नहीं है। समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेने से बीमारी शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित की जा सकती है।
क्या हर मरीज़ को ऑपरेशन की ज़रूरत होती है?
बिल्कुल नहीं। लगभग 85-90 प्रतिशत मरीज़ बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकते हैं। सही दवाइयां, फिजियोथेरेपी, वज़न नियंत्रण, नियमित व्यायाम, सही बैठने और उठने की आदतें तथा जीवनशैली में सुधार अधिकांश मरीज़ों को राहत दिलाते हैं। केवल उन्ही मरीज़ों में सर्जरी की आवश्यकता होती है, जिनमें नस पर गम्भीर दबाव हो, लगातार असहनीय दर्द हो, हाथ-पैर की शक्ति कम हो रही हो या सामान्य उपचार से लाभ न हो रहा हो।
आधुनिक स्पाइन सर्जरी : इलाज पहले से कहीं अधिक सुरक्षित
पिछले एक दशक में स्पाइन सर्जरी में उल्लेखनीय तकनीकी प्रगति हुई है। आज मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी (एम.आई.एस.एस.), माइक्रोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी, ओ-एआरएम आधारित 3-डी नेविगेशन तथा रोबोटिक स्पाइन सर्जरी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों ने इलाज को अधिक सुरक्षित और सटीक बना दिया है।
इन तकनीकों की मदद से छोटे चीरे लगाए जाते हैं। इससे आस-पास की मांसपेशियों को कम नुकसान पहुंचता है, ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव कम होता है, संक्रमण का खतरा घटता है, दर्द कम होता है तथा मरीज़ अपेक्षाकृत जल्दी चलने-फिरने लगता है। कई मरीज़ 24 से 72 घंटे के भीतर अस्पताल से घर भी जा सकते हैं। जटिल ऑपरेशन में 3-डी नेविगेशन और रोबोटिक तकनीक सर्जन को सटीकता प्रदान करने में सहायता करती है।
सफलता की सम्भावना कितनी होती है?
यह प्रश्न लगभग हर मरीज़ पूछता है। यदि सही मरीज़ का सही समय पर सही तकनीक से इलाज किया जाए तो आधुनिक स्पाइन सर्जरी के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक होते हैं। डिस्क, साइटिका और कई डिजेनेरेटिव स्पाइन रोगों में अधिकांश मरीज़ों को दर्द से बड़ी राहत मिलती है तथा वे अपने दैनिक कार्यों और नौकरी पर वापस लौट सकते हैं। सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि बीमारी कितनी पुरानी है, नस को कितना नुकसान पहुंचा है और मरीज़ ऑपरेशन के बाद पुनर्वास कार्यक्रम का कितना पालन करता है।
रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के सरल उपाय
* प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें। * लम्बे समय तक लगातार बैठने से बचें। हर 45-60 मिनट में उठकर थोड़ा चलें। * सही मुद्रा (पोश्चर) बनाए रखें। * वज़न नियंत्रित रखें। * नियमित रूप से कोर एवं पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करने वाले व्यायाम करें। * धूम्रपान से बचें और पर्याप्त कैल्शियम तथा विटामिन-डी लें।
विशेषज्ञ से समय पर सलाह लें
कमर या गर्दन का दर्द हर बार सामान्य नहीं होता। यदि दर्द लगातार बना रहे, हाथ या पैर में कमज़ोरी या सुन्नपन महसूस हो या चलने-फिरने में कठिनाई होने लगे, तो स्वयं इलाज करने के बजाय स्पाइन विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर सही निदान और उचित उपचार न केवल दर्द से राहत दिलाता है बल्कि भविष्य में होने वाली गम्भीर जटिलताओं से भी बचा सकता है।

