सचिन पायलट की ज़िम्मेदारी

कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी के रूप में सचिन पायलट की नियुक्ति कर दी है। पंजाब कांग्रेस के पहले प्रभारी भूपेश बघेल को असम कांग्रेस का प्रभारी लगाया गया है। पंजाब के कांग्रेसी गलियारों में इस समाचार को बहुत उत्साह के साथ देखा गया है। सचिन पायलट कांग्रेस के वरिष्ठ और युवा नेता हैं और उन्हें राहुल गांधी के नज़दीकी समझा जाता है। वह 2014 से 2020 तक राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं और 2018 से 2020 तक प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री भी रहे हैं। राजस्थान के उस समय के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ उनके संबंध कभी भी ज्यादा अच्छे नहीं रहे। एक समय उनके पार्टी छोड़ जाने की भी चर्चा होती रही थी, हालांकि वह कांग्रेस में ही डटे रहे।
यहां वर्णनीय है कि पंजाब कांग्रेस में विगत लम्बी अवधि से गुटबाजी चली आ रही है। चाहे पंजाब कांग्रेस में छोटे-बड़े कई गुट हैं परन्तु मुख्य रूप से कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री एवं लोकसभा सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के गुट उभर कर सामने आते रहे हैं। कांग्रेस की हाईकमान ने और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी रहे भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस की गुटबाज़ी को खत्म करने के लिए अनेक यत्न किए। हर बार दिल्ली में पार्टी के नेताओं की बैठकें हुईं परन्तु ‘मज़र् बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की’ वाली बात ही होती रही। चन्नी गुट में यह प्रभाव बना रहा कि भूपेश बघेल राजा वड़िंग गुट का ही पक्ष ले रहे हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन सचिव के.सी. वेणू गोपाल संबंधी भी पंजाब कांग्रेस के कुछ नेताओं में यही प्रभाव बनता जा रहा था। पंजाब के राजनीतिक गलियारों में यह प्रभाव भी बनने लगा था कि कांग्रेस हाईकमान पंजाब में कांग्रेस की गुटबंदी खत्म करने के मामले में विफल सिद्ध हो रहा है। इन परिस्थितियों में जबकि पंजाब विधानसभा के चुनावों में कुछ माह ही रह गए हैं, सचिन पायलट की पंजाब कांग्रेस के प्रभारी के रूप में नियुक्ति हुई है। उनके समक्ष सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी पंजाब कांग्रेस की गुटबंदी को खत्म करके सभी वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक मंच पर लाना है, क्योंकि प्रदेश की शेष राजनीतिक पार्टियां विशेष रूप से सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी चुनाव तैयारियों के पक्ष से बहुत आगे निकल चुकी हैं। आगामी दिनों में कांग्रेस के वरिष्ठ और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पंजाब विधानसभा के चुनावों के लिए पार्टी को तैयार करने और कांग्रेसियों में उत्साह पैदा करने के लिए अमृतसर से मालवा तक लम्बी बस यात्रा भी करने वाले हैं। सचिन पायलट के समक्ष इस यात्रा को सफल बनाने की भी बड़ी ज़िम्मेदारी है।
यदि विधानसभा चुनावों में पार्टी ने प्रभावी ढंग से  मुकाबला करना है तो पार्टी को बूथ स्तर पर मज़बूत करना भी बेहद ज़रूरी होगा, क्योंकि भाजपा की हमेशा यह रणनीति रही है कि पार्टी को बूथ स्तर तक मज़बूत किया जाए। इसलिए पार्टी की ओर से बूथ स्तर पर मतदाता सूचियों के आधार पर पन्ना प्रमुख यहां तक आधा पन्ना प्रमुख तक नियुक्त किए जाते हैं। नि:संदेह पंजाब के कांग्रेसी गलियारों की नज़रें आगामी दिनों में सचिन पायलट और पंजाब कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं पर केन्द्रित रहेंगी कि वे विगत कई महीने से पंजाब कांग्रेस में पड़े बिखराव को समेटने और पार्टी को चुनावों के लिए तैयार करने संबंधी आपसी सहयोग के साथ कितने बेहतर ढंग से काम करने में सफल होते हैं। 

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