सोलर टेक्नीशियन में चमकाएं कॅरियर

सूरज रोज करोड़ों, अरबों किलोवाट ऊर्जा धरती पर बरसाता है। लेकिन अब यह ऊर्जा सिर्फ खेतों और घरों को उजाला देने तक सीमित नहीं रही। यह युवाओं के लिए रोजगार की किरण भी बन रही है और उनके कॅरियर को अपनी इन किरणों से चमका रही है। देश में घरों की छतों, खेतों, कारखानों और विभिन्न संस्थानों पर सोलर पैनल तेजी से बढ़ रहे हैं। पैनल लगेंगे तो उन्हें जोड़ने, जांचने, उसे चालू करने, बीच-बीच में सर्विस करने और लगातार ये अपना काम करते रहें, इसलिए इन्हें दुरुस्त रखने के लिए प्रशिक्षित हाथों की ज़रुरत होगी। यही ज़रुरत वास्तव में कॅरियर का एक बड़ा दरवाजा खोल रही है, जिसे सोलर टेक्नीशियन कहते हैं। सोलर टेक्नीशियन के उभरते कॅरियर में खास बात यह है कि इसके लिए हर युवा को इंजीनियरिंग की लंबी-चैड़ी पढ़ाई करने की ज़रुरत नहीं है। 12वीं के बाद व्योहारिक प्रशिक्षण, बिजली की बुनियादी समझ और तकनीकी हुनर के सहारे इस क्षेत्र में कदम रखा जा सकता है। कहने का मतलब यह है कि सूरज की ऊर्जा को कौशल में बदलकर अपने कॅरियर को चमकाया जा सकता है।
सोलर टेक्नीशियन करता क्या है : सोलर टेक्नीशियन केवल छत पर सोलर पैनल लगाने वाला व्यक्तिभर नहीं है, इसका काम सोलर पैनल, इन्वर्टर, बैटरी, वायरिंग, चार्ज कंट्रोलर और दूसरे उपकरणों को सही ढंग से जोड़ना, सिस्टम की जांच करना और खराबी आने पर उसे ठीक करना होता है। छत पर लगे सोलर सिस्टम की साइट का निरीक्षण, पैनलों की सही दिशा और उनका झुकाव, यही तय करता है। माउंटिंग स्ट्रक्चर लगाना, इलेक्टिकल कनेक्शन करना, इन्वर्टर को कन्फिगर करना, अर्थिंग और सुरक्षा व्यवस्था को जांचना तथा सिस्टम की कमीशनिंग जैसे काम भी इसी के होते हैं। बाद में प्रिवेंटिव मेंटेनेस और आयी खराबी को दूर करने का काम भी इसी का होता है। 
न्यूनतम शैक्षिक योग्यता : सोलर टेक्नीशियन बनने के लिए सामान्यत: इंजीनियरिंग की डिग्री ज़रूरी नहीं है। 12वीं पास युवा भी कौशल आधारित प्रशिक्षण लेकर इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि विज्ञान विषय विशेषकर फिजिक्स और मैथेमेटिक्स की बुनियादी समझ उपयोगी रहती है। आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स या संबंधित क्षेत्र की पृष्ठभूमि इस कॅरियर को मजबूत आधार दे सकती है। इसके अलावा सोलर पीवी इंस्टॉलेशन और मेंटेनेस से जुड़े शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट या स्किल कोर्स किये जा सकते हैं। प्रशिक्षण लेते समय यह देखना ज़रूरी है कि संस्थान में केवल कक्षाभर में पढ़ाई न हो बल्कि वास्तविक पैनल, इन्वर्टर, बैटरी और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट पर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी मिले। 
कितनी हो प्रशिक्षण की अवधि : प्रशिक्षण की अवधि संस्थान और पाठ्यक्रम के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। शुरुआती स्तर का कौशल कुछ महीनों में ही हासिल किया जा सकता है। जबकि आईटीआई या कोई लंबा टेक्निकल कोर्स कॅरियर को व्यापक आधार देता है। बेहतर रणनीति यह है कि युवा बेसिक इलेक्ट्रिकल स्किल्स के साथ सोलर पीवी ट्रेनिंग और फील्ड एक्सपीरियंस हासिल करे। ऐसा करना बेहतर रहता है बजाय सिर्फ सर्टिफिकेट हासिल करने के। केवल सर्टिफिकेट हासिल करने से कोई अच्छा तकनीशियन नहीं बनता। वास्तविक साइट पर काम करके वायरिंग, फॉल्ट फाइंडिंग और सेफ्टी प्रोसिड्यूर्स सीखना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 
और क्या कौशल चाहिए : सोलर टेक्नीशियन के लिए मूलभूत कौशल बेहद ज़रूरी है, जिसमें पहला है- इलेक्ट्रिकल नॉलेज जिसमें शामिल है वोल्टेज, करंट, रेसिस्टेंस, एसी/डीसी, सीरीज पर पैरलल कनेक्शन, फ्यूज, एमसीबी, अर्थिंग और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जैसी बुनियादी बातों की समझ होनी चाहिए। दूसरा महत्वपूर्ण कौशल है- सोलर पीवी टेक्नोलॉजी का, जिसमें सोलर सेल और मॉड्यूल कैसे काम करते हैं, पैनल की क्षमता कैसे मापी जाती है, इन्वर्टर की भूमिका क्या है और ग्रिड कनेक्टेड तथा बैटरी बेस सिस्टम में क्या फर्क होता है, इसकी भी समझ होनी चाहिए। तीसरा महत्वपूर्ण कौशल जो सोलर टेक्नीशियन को आना चाहिए, वो है ट्रबलशूटिंग का कौशल यानी सिस्टम बिजली कम पैदा कर रहा है, इन्वर्टर फोल्ट दिखा रहा है या कोई कोई कनेक्शन गर्म हो रहा है, तो आखिर इस समस्या का कारण क्या है? उसे पहचानकर सुरक्षित ढंग से ठीक करना टेक्नीशियन की वास्तव में असली परीक्षा है। इसके साथ ही उसमें डिजिटल स्किल भी होनी ज़रूरी है। आज के आधुनिक सोलर सिस्टम में मॉनिटरिंग एप्स, डिजिटल मैटर्स और रिमोट मॉनिटिरिंग का इस्तेमाल होता है। इसलिए स्मार्ट फोन, बेसिक कम्प्यूटर और डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन का ज्ञान, लाभदायक होता है। साथ ही एक सोलर टेक्नीशियन में कम्युनिकेशन स्किल भी होनी चाहिए ताकि ग्राहक को सिस्टम के बारे में समझा सके, उसे इंस्टॉलेशन की जानकारी दे सके और मेंटेनेस की सलाह देना भी उसी के हिस्से का काम है। 
हल्के में न लें सेफ्टी को : यह पेशा तकनीकी होने के साथ-साथ जोखिम से भी भरा है। सोलर पैनल्स धूप में बिजली पैदा करते हैं और इन्हें विशेषकर शहरों में छतों में इंस्टॉल करना होता है। इसलिए इलेक्ट्रिकल आइसोलेशन, पीपीई, ग्लब्स, सेफ्टी शूज, हेलमेट, हार्नेस व सुरक्षित टूल्स का इस्तेमाल आना जरूरी होता है। एक अच्छे टेक्नीशियन की पहचान सिर्फ यह नहीं है कि वह सिस्टम कितनी जल्दी ठीक करता है बल्कि यह भी है कि वह बिना जोखिम लिए काम करता है। 
कॅरियर कैसे आगे बढ़े : सिर्फ पैनल लगाने तक सीमित रहना इस कॅरियर की सीमा बन सकता है। युवा धीरे-धीरे सोलार पीवी टेक्नीशियन, सीनियर टेक्नीशियन, साइट सुपरवाइजर, सोलर इंस्टॉलेशन स्पेशलिस्ट, सर्विस इंटरप्रिन्योर की दिशा में बढ़ सकते हैं। बाद में इलेक्ट्रिकल सिस्टम, सोलर डिजाइन, प्रोजेक्ट सुपर विजन, बैटरी स्टोरेज, ईवी चार्जिंग और एनर्जी मैनेजमेंट जैसी कॉम्प्लीमेंट्री स्किल्स सीखना भी उपयोगी होगा। विशेष रूप से सोलर के साथ बैटरी स्टोरेज और ईवी चार्जिंग का संयोजन भविष्य के लिए एक मजबूत तकनीकी स्किल सेट बन सकता है।
शुरुआत कहां से करें : 12वीं के बाद इच्छुक युवा सबसे पहले अपनी इलेक्ट्रिकल फाउंडेशन मजबूत करें। इसके बाद किसी विश्वसनीय संस्थान से सोलर पीवी इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस का व्यवहारिक प्रशिक्षण लें। प्रशिक्षण के दौरान केवल सर्टिफिकेट पर ध्यान न दें, यह जरूर देखें कि वहां लाइव प्रैक्टिकल वर्क, सेफ्टी ट्रेनिंग और वास्तविक इंस्टॉलेशन का एक्सपीरियंस भी मिलता हो। इसके बाद किसी सोलर इंस्टॉलेशन या इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर के साथ अप्रेंटिसशिप अथवा फील्ड एक्सपीरियंस लेना भी बेहद उपयोगी होगा। शुरुआत में कम वेतन भी मिले, तो भी कुछ समय तक वास्तविक साइट पर काम सीखना भविष्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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