ब्रिटिश स्वाभिमान के प्रतीक हैं लंदन के लाल टेलीफोन बूथ
भारत में डिजिटल क्रांति के बाद टेलीफोन बूथ अब कहीं देखने को नहीं मिलते। हाथ में हर समय मोबाइल थामे नयी पीढ़ी के लिए ये बूथ अब कोतुहल के विषय बन गए है। मगर लंदन में आपको आज भी लाल रंग के टेलीफोन बूथ देखने को मिल जायेंगे जो वहां की विशिष्ट पहचान है। लंदन के लाल रंग के ये बूथ दुनिया भर में ब्रिटिश सांस्कृतिक आइकॉन के रूप में देखे जाते है। बूथ में रखा टेलीफोन चालू अवस्था में है। लंदन भ्रमण के दौरान मुझे इन बूथों को देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ। मैंने बूथ में जाकर देखा तो ये चालू अवस्था में मिले। इसी के साथ अब डिजिटल टेलीफोन बूथ भी लंदन की सड़कों पर देखने को मिल जायेंगे। इनके लाल रंग के होने की भी एक कहानी है।
बताते है 19वीं शताब्दी में सबसे पहले डाक विभाग ने अपने पोस्ट बॉक्स बनाये वे हरे रंग के थे। लंदन अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है। हरियाली से मिलता रंग अंग्रेजों को पसंद नहीं आया क्योंकि लोग इन्हें सही ढंग से देख नहीं पाते। लोग अत्यधिक हरियाली के कारण इनसे टकरा जाते, ऐसी स्थिति में उन्हें लाल रंग से रंगा गया जो दूर से ही दिख जाते। बाद में 1920 में जब टेलीफोन बूथ बने तो उन्हें लाल रंग से ही रंगा गया। तब से आजतक ये बूथ लाल टेलीफोन बूथ के नाम से ख्यात है। समय के साथ टेलीफोन बूथ दुनियां से मिट गए मगर लंदन में स्थान-स्थान पर ये बूथ जीवित अवस्था में देखे जा सकते है। 1980 के बाद नए बूथ नहीं लग रहे है मगर पुराने बूथ सैलानियों के आकर्षण बने हुए है। भले ही इनका मूल काम अब कम हो गया हो लेकिन क्लासिक लाल फोन बॉक्स अभी भी चलन से बाहर नहीं हुए हैं। बताया जाता है वर्ष 2002 में ब्रिटेन की सड़कों पर 92,000 ब्रिटिश टेलिकॉम फोन बॉक्स हुआ करते थे। अब दस हज़ार से भी कम पारंपरिक लाल फोन-बॉक्स बचे हैं।
मोबाइल फोन की क्रांति ने दुनिया भर में पीसीओ के कारोबार को चौपट कर दिया है। ब्रिटेन के लोग इससे खासे परेशान हैं। लोगों का कहना है कि लाल रंग का टेलीफोन बूथ उनकी भावनाओं का एक अहम हिस्सा, जिसे वह ज़िंदा रखना चाहते हैं। ये बूथ 1936 से इंग्लैंड की खास पहचान बने हुए है। 1926 से टेलीफोन बूथों को ब्रिटिश शासन के प्रतीक ट्यूडर ताज से सजाया गया। ब्रिटेन का पहला पब्लिक फोन बूथ, जिसे के1 के नाम से जाना जाता है, 1920 में लंदन की सड़कों पर आया। कंक्रीट से बने और लाल दरवाज़े वाले इस बूथ में कोई खास सुंदरता नहीं थी। सन् 1923 में ज्यादा आकर्षक टेलीफोन बॉक्स बनाने के लिए एक डिज़ाइन प्रतियोगिता शुरू की गई। इसमें मशहूर आर्किटेक्ट्स के प्रस्ताव आए, जिनमें सर जाइल्स गिल्बर्ट स्कॉट भी शामिल थे जो विजेता बने। स्कॉट का शानदार, कास्ट आयरन वाला डिज़ाइन सेंट पैनक्रास में सर जॉनसोएन के मकबरे की गुंबददार छत से प्रेरित था। इस तरह के2 लाल टेलीफोन बॉक्स का जन्म हुआ, जिसमें चमकीला लाल रंग और आर्ट-डेको स्टाइल था जो जल्द ही लंदन की सड़कों पर छा गया। 1935 में, किंग जॉर्ज पंचम की सिल्वर जुबली मनाने के लिए के6 मॉडल पेश किया गया। यह लंदन के बाहर लगाया गया पहला लाल टेलीफोन बॉक्स था, जिससे यह पसंदीदा डिज़ाइन ब्रिटेन के कस्बों और गांवों तक पहुंचा। इसने लाल बॉक्स की देशव्यापी लोकप्रियता की शुरुआत की।
धीरे-धीरे लाल टेलिफोन बूथ सीन से गायब होने लगे लेकिन स्थानीय समुदायों और ब्रिटिश दूरसंचार के प्रयासों से उनमें से सैकड़ों लाल टेलिफोन बक्सों को पुस्तकालयों के रूप में पुनर्जीवित कर दिया है। ब्रिटेन के लोग अपने लोकप्रिय ब्रिटिश लाल टेलीफोन बॉक्स को छोटे-छोटे पुस्तकालयों में बदल रहे हैं। यहां से कोई भी पुस्तक घर ले जाने के लिए स्वतंत्र है, बशर्ते वे इसे वापस लाएं या इसके बदले घर से लाकर कोई दूसरी पुस्तक रख दे।
मो. 8949519406



