साइकिल से जुड़ा विज्ञान
प्यारे बच्चो, आप सभी ने साइकिल ज़रूर चलाया होगा। आपने इसमें लगे पुर्जे भी देखे होंगे। आज हम इस साइकिल में छुपे विज्ञान के अलग-अलग सिद्धांतों के बारे में बात करेंगे। साइकिल की पहली बार खोज जर्मनी देश के वैज्ञानिक कारल वॉन ड्रैस ने सन् 1817 में की थी। इसमें पैडल नहीं था और इसका ढांचा लकड़ी के बीम का बना था।
साइकिल का प्रयोग कई कामों के लिए किया जाता है, जैसे रोज़ाना यातायात, स्वास्थ्य और तंदरुस्ती, मनोरंजन और खेलें, साइकिल रैली, यात्रा, ट्रैक रेस, कोरियर, डाक आदि सामान की डिलीवरी। रोज़ाना साइकिल चलाने के साथ व्यक्ति मोटापा, शुगर, गठिया आदि बीमारियों से दूर रहता है। तंदरुस्ती बरकरार रखने के लिए साइकिल व्यायाम का बहुत अच्छा ढंग है। साइकिल पर्यावरण-मित्र है, पैट्रोल डीज़ल की बचत होती है। साइकिल कोई ग्रीन-हाऊस गैस नहीं छोड़ता। इसको चलाने के लिए सिर्फ मानवीय शक्ति का प्रयोग होता है। मोटरसाइकिल से साइकिल बहुत सस्ते होते हैं।
साइकिल में दो पहिये होते हैं। इसको पैरों से चलाया जाता है। दो पहियों के कारण इसको ‘बाईसाइकिल’ (बाई मतलब दो, साइकिल यानी चक्कर या पहिया) भी कहा जाता है। एक पहिया वाले साइकिल को यूनिसाइकिल, दो वाले को बाईसाइकिल और तीन पहिए वाले साइकिल को ट्राईसाइकिल कहते हैं। हर वर्ष 3 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय साइकिल दिवस’ मनाया जाता है। साइकिल चलाने वाले व्यक्ति को साइकिलिस्ट कहा जाता है।
साइकिल में अधिकतर भौतिक विज्ञान, पदार्थ विज्ञान और मकैनिकल इंजीनियरिंग के सिद्धांतों का प्रयोग होता है। साइकिल में एक्सल, बैरिंग, घंटी गेयर, चेन, पैडल, रिम, हब्ब, स्पोक्स, करासबार, ब्रेक हैंडल आदि मुख्य पुर्जे होते हैं। साइकिल का फ्रेम हल्के मटीरियल जैसे स्टील, एलूमीनियम, कार्बन फाइबर आदि का बना होता है। साइकिल चलाने वाले का वज़न दोनों पहियों पर सही बांटा जाता है। ंिरम पहिये के घेरे को बनाता है, जिस पर रबड़ का टायर चढ़ाया जाता है। पहिये के केन्द्र पर हब्ब होती है जिसमें से तारें निकलती हैं। पहिये में तारें इसको मज़बूत तथा हल्का बनाती हैं और हवा रोधक बल को कम करती हैं। हब्ब के अंदर बैरिंग होता है इससे साइकिल चलाने के लिए कम बल की ज़रूरत पड़ती है। साइकिल की चेन गति को पिछले पहिये तक ले जाती है। जब हम साइकिल का पैडल मारते हैं तो हमारी भोजन की ऊर्जा चक्करी गति में तबदील हो जाती है। साइकिल चलाते समय लगभग 90 प्रतिशत मानवीय ऊर्जा गतिज ऊर्जा में तबदील होती है। यह ऊर्जा के सुरक्षित नियम को दर्शाता है।
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