मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार अभिनेता मामूट्टी
चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 11 केरल स्टेट फिल्म अवार्ड्स, 11 केरल फिल्म क्रिटिक्स अवार्ड्स और 15 फिल्मफेयर अवार्ड्स साउथ। इनके अतिरिक्त 1998 में पदम श्री व 2026 में पदम् भूषण से सम्मानित और इनके बीच में 2022 में केरल सरकार का केरल प्रभा अवार्ड भी। इन पुरस्कारों को पाने वाले अदाकार ने न सिर्फ मलयालम, तमिल, तेलगु, कन्नड़, हिंदी व अंग्रेज़ी भाषाओं में 400 से अधिक फिल्में की हैं बल्कि इन्हें भारतीय सिनेमा का चेहरा बदलने का श्रेय भी प्राप्त है, सीएनएन-न्यूज़ 18 के अनुसार। इसलिए जब भारतीय सिनेमा के 100 वर्षों का जश्न मनाया जा रहा था, तो ‘मथिलुकल’ में उनकी अदाकारी को फोर्ब्स इंडिया ने ‘भारतीय सिनेमा के 25 महानतम अभिनय परफॉरमेंस’ की सूची में शामिल किया। फिल्म कम्पैनियन ने दशक के 100 महानतम परफॉरमेंस की सूची तैयार की तो उसमें ‘मुन्नारियिप्पू’ में उनकी अदाकारी को भी शामिल किया। वर्ष 2024 में आईएमडीबी ने ‘लिस्ट ऑ़फ 100 मोस्ट व्यूड इंडियन स्टार्स’ में उन्हें 63वें स्थान पर रखा।
अब तो आप समझ ही गये होंगे कि हम मुहम्मद कुट्टी पनापरम्बिल इस्माइल की बात कर रहे हैं, जिन्हें 22 सितम्बर 2026 को गुजरात में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में ‘ब्रह्मायुगम’ में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अगर अब भी नहीं समझें हैं तो जान लें कि यह अभिनेता व निर्माता दुनिया में मामूट्टी के नाम से विख्यात है। मामूट्टी का अर्थ है ‘जो प्रशंसनीय है’। मामूट्टी का जन्म 7 सितम्बर 1951 को चंदिरूर में हुआ था। उनकी परवरिश कोट्टायम ज़िले में वैकोम के निकट गांव चेम्पू में हुई, केरल के एक मध्यवर्गीय मुस्लिम परिवार में। उनके पिता इस्माइल का कपड़े व चावल का थोक का व्यापार था और वह चावल की खेती भी किया करते थे। उनकी मां ़फातिमा गृहिणी थीं। मामूट्टी अपने दो भाइयों व तीन बहनों में सबसे बड़े हैं। प्राथमिक शिक्षा उन्होंने गवर्नमेंट हाई स्कूल, कुलासेखरामंगलम, कोट्टायम में हासिल की। जब 1960 के दशक में उनका परिवार कोच्ची शिफ्ट हो गया तो वह गवर्नमेंट स्कूल एर्णाकुलम में पढ़ने लगे। फिर महाराजा कॉलेज, एर्णाकुलम से डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, एर्णाकुलम से एलएलबी की और दो वर्ष तक मंजेरी में वकालत की।
लेकिन मामूट्टी की दिलचस्पी तो फिल्मों में थी, वकालत में उनका दिल कहां लगता। खासे संघर्ष के बाद उन्हें बतौर जूनियर आर्टिस्ट फिल्म ‘अनुभावंगल पालिचकल’ में स्क्रीन पर दिखायी देने का अवसर मिला, जिसमें उनका कोई डायलॉग नहीं था। यह 1971 की बात है। फिर आहिस्ता-आहिस्ता छोटे-छोटे सहायक रोल मिलते रहे और दस वर्ष के लम्बे संघर्ष के बाद 1981 में आईवी शशी ने रोमांटिक ड्रामा ‘तृष्णा’ में मामूट्टी को लीड भूमिका दी। बहरहाल, जब 1984 में उनकी क्राइम ड्रामा ‘अथिराथ्रम’ और 1985 में एक्शन थ्रिलर ‘निराक्कूट्टू’ व रोमांटिक ड्रामा ‘यात्रा’ रिलीज़ होकर बॉक्स ऑफिस पर हिट हुईं तो वह भरोसेमंद लीड एक्टर व स्टार बन गये। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मामूट्टी के जीवन व करियर को बीए के इतिहास पाठ्यक्रम में ‘हिस्ट्री ऑ़फ मलयालम सिनेमा’ के सेक्शन में शामिल किया गया है, फिल्मोद्योग में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए। मामूट्टी निबंधकार भी हैं और 2007 में उनके विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित निबंधों का संकलन ‘कज्ह्चापदु’ (नज़रिया) के नाम से प्रकाशित हुआ था। मामूट्टी ने 1979 में सुल्फथ कुट्टी से विवाह किया, जिनसे उनके दो बच्चे हैं- सुरुमी (जन्म 1982) व दल्कीर सलमान (जन्म 1983), जो एक्टर हैं। वह अपने परिवार के साथ कोच्ची में रहते हैं। उनके भांजे मकबूल सलमान व आशकार सौदान भी मलयालम फिल्म व टेलीविज़न एक्टर्स हैं।
ऐतिहासिक दृष्टि से मलयालम सिनेमा ने आम आदमी की कहानियों पर फोकस किया और अगर प्रेम नज़ीर को अपवाद स्वरूप छोड़ दें, तो उसमें कोई सुपरस्टार नहीं था। लेकिन 1980 के दशक में मामूट्टी व मोहनलाल की वजह से यह स्थिति बदल गई और दिसम्बर 1988 में श्रीधर पिल्लै ने लिखा, ‘आज फिल्मोद्योग पर इनकी पकड़ इतनी मज़बूत हो गई है कि नई फिल्में उसी वक्त लांच की जाती हैं, जब इनके पास समय हो।’ 2005 तक स्थिति यह हो गई थी कि मलयालम सिनेमा के बॉक्स ऑफिस का 97 प्रतिशत राजस्व मामूट्टी, मोहनलाल व दिलीप की फिल्मों से आ रहा था। आज भी हालात ये हैं कि मलयालम फिल्मों की पटकथा इनकी आयु व छवि को ध्यान में रखकर लिखी जाती हैं। मामूट्टी अब 75 बरस के हो गये हैं। मामूट्टी जहां अपनी छवि से हटकर अलग-अलग प्रकार की भूमिकाओं को अदा करने से नहीं कतराते हैं, वहीं वह अपने मन की बात को व्यक्त करने में भी पीछे नहीं हटते हैं, भले ही किसी को अच्छी लगे या बुरी। मसलन, 2006 में आइफा अवार्ड्स का आयोजन दुबई में हुआ था, जहां उन्होंने आयोजकों की खुलकर आलोचना करते हुए कहा कि बॉलीवुड को पहले दक्षिण भारत के फिल्मोद्योग से मुकाबला करने के लायक बनना चाहिए और तभी अपने आपको अंतर्राष्ट्रीय कहना चाहिए।
गौरतलब है कि मामूट्टी की मलयालम हॉरर फिल्म ‘ब्रह्मायुग्म’ को 12 फरवरी 2026 को अकादमी म्यूजियम ऑ़फ मोशन पिक्चर्स, लॉस एंजेल्स में विशेष स्क्रीनिंग के लिए चुना गया था, ‘वेयर द फारेस्ट मीट्स द सी’ सीरीज के लिए। इससे मामूट्टी की ग्लोबल अपील का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर



