आओ भाईयो! हर गांव में खोलें ‘वृद्ध आश्रम’

राज्य के समाज कल्याण मंत्री माननीय श्रीमान भोला राम जी आज शहर में खुले एक बेहद आलीशान ‘सरकारी वृद्ध आश्रम’ के लोकार्पण के मौके पर हाज़िर श्रोताओं को सम्बोधन कर रहे थे। बेहद शात व प्रसन्न भाव से वह कह रहे थे, ‘आज इस अति-आधुनिक सुविधाओं से लैस वृद्ध आश्रम का उद्घाटन करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है और इसके साथ ही मुझे यह बताते हुए भी बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि गत् दो वर्षों में हमारी सरकार द्वारा बनाया गया यह 24वां वृद्ध आश्रम है। आज के इस शुभ अवसर पर मैं सभी को यह विश्वास दिलाता हूँ कि आने वाले तीन वर्षों में हम पहले ब्लॉक स्तर पर और फिर गांव के स्तर पर एक-एक आलीशान वृद्ध आश्रम का निर्माण करवा देंगे ताकि अपनी ‘होनहार’ औलाद की ओर से घरों से निकाले गए बजुर्गों को रहने के लिए एक अच्छा ठिकाना मिल सके।
मेरे भाईयों और बहनों, मुझे यह बताते हुए अत्यंत दुख हो रहा है कि हमारे समाज में आज भी कुछ इस प्रकार के ‘दुष्ट’ मां-बाप मौजूद हैं जो अपने बच्चों को ज्यादा पढ़ाते-लिखाते नहीं हैं और उससे भी दुख की बात तो यह है कि यह कम पढ़े-लिखे बच्चे बड़े होकर अपने वृद्ध माता-पिता को किसी ‘वृद्ध आश्रम’ में भेजने की जगह अपने पास अपने घर में, अपने परिवार में रख लेते हैं और दिन रात उनकी सेवा करते हैं। हमारे समाज के माथे का ‘कलंक’ बनते जा रहे इस प्रकार के ‘मुख्य अभियुक्तों’ जैसे मूर्ख पुत्रों व बहुओं को ‘जागरूक’ करने हेतु हम शीघ्र ही ज़िला व ब्लॉक स्तर पर ‘बूढ़े मां-बाप को वृद्ध आश्रम पहुंचाओ’ विषय पर सैमीनार आयोजित करेंगे। हम यह चाहते हैं कि सभी माता-पिता अपने बच्चों को अधिक से अधिक पढ़ायें-लिखायें। उन्हें अच्छी नौकरियों पर लगवायें, पढ़ी-लिखी व नौकरीशुदा लड़कियों से उनकी शादी करवायें ताकि उनके घर में ढेर सारा पैसा बरसे, उनका स्टैंडर्ड हाई हो जाए और फिर उन बहुओं को अपने घरों में मौजूद बूढ़े सास-ससुर ‘बोझ’ और ‘प्राईवेसी में दखल’ महसूस होने लग जायें और फिर एक दिन वे अपने घर के वृद्धों को ‘वृद्ध आश्रम’ पहुंचा दें। दोस्तों हमें अपने समाज में इस तरह के बच्चे हरगिज भी नहीं चाहिए हैं जो मां-बाप के सेवक बन कर जीना चाहते हैं और आखिरी दम तक अपने मां-बाप को ही समर्पित रहना चाहते हैं।
मेरे साथियो आपके माता-पिता ने अगर अपनी गरीबी व बीमारी के बावजूद कई सारी मुश्किलें और तकलीफें सह कर आप को पाला है तो उन्होंने आप पर कोई अहसान नहीं किया है। यह उनका फर्ज था जो उन्होंने पूरा किया है। आपके बचपन में अगर आप की मां आप को सूखे बिस्तर पर लिटा कर खुद गीले बिस्तर पर सोई है तो इसमें उसने क्या तीर मार लिया है? अगर आप के पिता ने खुद फटी कमीज व घिसी हुई चप्पल पहन कर भी आप को नए कपड़े और जूते दिलवाए हैं तो कौन सा अहसान किया है? यह तो उनका फर्ज था लेकिन मेरे प्रियजनों आप कहीं ये मां-बाप के कृत्यों को ‘अहसान’ मानकर इनके बदले में उनकी जी-जान लगाकर सेवा करने के चक्कर में मत फंस जाना। आप केवल और केवल अपना ही सुख देखना। आप के मां-बाप तो ‘मूर्ख’ थे जो अपने सुखों की जगह आप के सुखों को पहल देते रहे। आप ऐसी ‘मूर्खता’ हरगिज मत करना और उनको जल्दी से जल्दी वृद्ध आश्रम में पहुंचा कर गंगा नहा लेना।
अंत में मैं आने वाली पीढ़ी के नौजवानों को यह संदेश देना चाहता हूँ कि तुम अपने मां-बाप के प्रति रत्ती भर भी प्रेम अथवा मोह मत दिखलाना और जितनी जल्दी हो सके उन्हें घरों से निकाल कर वृद्ध आश्रम में पहुंचा देना और फिर कभी मुड़ कर भी उनका हाल मत पूछना। मेरे अजीज बच्चो, यदि तुम ऐसा नहीं करोगे तो हमारी सरकार की तरफ से करोड़ों रूपये की लागत से बनाए गए ये वृद्ध आश्रम खाली रह कर खंडहर बन जायेंगे और सरकार का व टैक्सदाताओं का भारी वित्तीय नुक्सान हो जाएगा। इसलिए शीघ्र अति शीघ्र अपने बजुर्गों को घर से निकालो और हमारे वृद्ध आश्रमों की रौनक को बढ़ाओ ‘धन्यवाद’।
मो. 9781646008

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