एआई के दौर में इंटर्नशिप बन गयी है सेल्फ इम्प्रूवमेंट

कुछ साल पहले किसी कंपनी में इंटर्नशिप पाने का मतलब था, किसी अनुभवी कर्मचारी के साथ बैठना, कामकाज की फाइलें देखना, छोटे-छोटे काम करना और धीरे-धीरे पेशेवर दुनिया को समझना। आज तस्वीर तेजी से बदल गई रही है। जिस काम को सीखने में पहले किसी इंटर्न को कई-कई दिन लगते थे, आज वही काम जनरेटिव एआई कुछ सेकेंड में कर डालता है। रिपोर्ट का शुरुआती ड्राफ्ट, ई-मेल, प्रजेंटेशन की रूपरेखा, डेटा का प्रारंभिक विश्लेषण, कोड की जांच और रिसर्च के कई चरण अब एआई टूल्स संभाल सकते हैं। ऐसे में सवाल है क्या एआई इंटर्नशिप के रास्ते बंद कर रहा है? शायद असली सवाल ये नहीं है बल्कि असली सवाल ये है कि एआई के दौर में इंटर्नशिप प्रैक्टिकल सेल्फ इम्प्रूवमेंट में बदल गई है। क्योंकि भविष्य की दुनिया में प्रतिस्पर्धा केवल इंसान बनाम मशीन से नहीं होगी। प्रतिस्पर्धा उन लोगों के बीच भी होगी जो एआई को समझते हैं और सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं। साथ ही उन लोगों से जो एआई के बीच उससे दूरी बनाये रखते हैं। 
वास्तव में आज मशीन से मुकाबला नहीं, मशीन के साथ महारत का इम्तिहान देना है। सबसे पहली आदत जिसे आज के किसी इंटर्न को बदलना चाहिए, वह है एआई से डरना। यदि कोई टूल किसी काम को पांच मिनट में कर सकता है, तो उससे यह साबित नहीं होता कि इंसान की ज़रूरत खत्म हो गई। इसका अर्थ ये है कि इंसान को अपने समय का इस्तेमाल अब ज्यादा मूल्यवान कामों के लिए करना है। वास्तव में यहीं से आज की इंटर्नशिप सेल्फ इम्प्रूवमेंट का प्रैक्टिकल कोर्स बन जाती है, विशेषकर तब जब वहां इंटर्नशिप का मौका मिले, जहां काम में एआई का इस्तेमाल होता है। क्याेंकि एक अच्छा इंटर्न एआई से काम पूरा करवाने की बजाय उससे अपने काम में सहयोग लेगा। जैसे- किसी को अपने में इम्प्रूव करने के लिए कहीं से बना, बनाया कोई जवाब उतारकर नहीं रखना बल्कि प्रक्रिया को सीखते हुए जवाब तैयार करना है। इसलिए आज खुद का इम्पू्रवमेंट करने का तरीका ये है कि कंटेंट इंटर्न एआई से विषयों की सूची और शुरुआती रिसर्च तो ले सकता है, लेकिन तथ्य जांचना, उसमें भारतीय संदर्भ जोड़ना, भाषा को स्वाभाविक और जीवंत बनाना तथा अपने कहे गये में अंतिम दृष्टिकोण विकसित करना, यह एआई के जिम्मे का काम नहीं है। इसे आपको खुद अपने इम्प्रूवमेंट के तौर पर विकसित करना होगा।
इसी तरह कोडिंग इंटर्न एआई से कोड का आरंभिक मसौदा बनवा सकता है। लेकिन सेल्फ इम्प्रूवमेंट के लिए यह ज़रूरी है कि कोड काम कैसे कर रहा है और उससे गलती कहां हो सकती है, इसको खुद पहचानना, इसलिए एआई के दौर में इंटर्नशिप सिर्फ अपने काम का शुरुआती पाठ सीखनाभर नहीं है बल्कि अपने में ज़रूरी इम्प्रूवमेंट करना भी है। क्योंकि इस एआई के दौर में जानकारी भर होना पर्याप्त नहीं है। यह भी जानना ज़रूरी है कि जानकारी न हो तो उसे हासिल कैसे किया जाए? ..और यहीं प्रॉम्ट लिटरेसी महत्वपूर्ण हो जाती है, जिसे इंटर्न के तौर पर नहीं, अपने आपके इम्प्रूवमेंट के लिए सीखना ज़रूरी है। अगर आप एआई को कहेंगे एक लेख लिखो, तो वह उस विषय पर कोई भी चलता-फिरता लेख लिख देगा। लेकिन जब आप एआई को विषय बताएंगे, उसके पाठक वर्ग को बताएंगे, विषय का उद्देश्य बताएंगे, शब्द सीमा देंगे, भाषा का तेवर तय करेंगे, टोन निर्धारित करेंगे और एआई से तथ्यात्मक अपेक्षाओं की उम्मीद रखेंगे, तो वह सामान्य लेख नहीं होगा, उसमें आपकी समझ और आपका इम्प्रूवमेंट भी शामिल होगा। इसलिए इंटर्न को कुछ समय एआई से बेहतर प्रश्न पूछने का अभ्यास अपने इम्प्रूवमेंट के तौर पर करना चाहिए। 
सेल्फ इम्प्रूवमेंट के तौर पर किसी इंटर्न को एआई से जो दूसरा सबक ज़रूर सीखना चाहिए और इसे अपने इम्प्रूवमेंट के तौर पर लेना चाहिए, यह सोच कि जो मैं कर सकता हूं, वो एआई नहीं कर सकता। मसलन एआई तकनीकी रूप से शब्दों को जोड़कर कोई लेख तो लिख सकता है, लेकिन वह उसे जीवंत नहीं बना सकता। एआई फटाफट कोई प्रजेंटेशन तो तैयार कर सकता है, लेकिन क्रम से स्लाइड सजा देना पर्याप्त कौशल नहीं होता। किसी इंटर्न को एआई से सीखना चाहिए कि वह जितना एआई उसके लिए कर रहा है, उसके आगे का खुद करे। अगर एआई कोड तैयार कर सकता है, तो केवल कोड टाइप करना उसकी विशेषता नहीं रहेगी। इंटर्न को करना चाहिए कि वह उसमें मानवीय निर्णय शामिल करे, जो एआई की क्षमताओं से आगे हो। मसलन आपको एआई के जरिये यह सीखना चाहिए कि सही और गलत सूचनाओं में क्या अंतर होता है यानी समस्या का वास्तविक कारण समझकर समाधान निकालना ज्यादा ज़रूरी है। कम्युनिकेशन यानी अपनी बात स्पष्ट ढंग से रखना और कही गई बात में एक निश्चित विचार पैदा करना, यह आपका कौशल होगा, जो आपको एआई से आगे ले जायेगा। इसलिए आज के एआई के दौर में हर इंटर्न को इससे कहीं आगे सीखना है। इमोशनल इंटेलीजेंस यानी लोगों, टीम और परिस्थितियों के व्यवहार को समझना बहुत ज़रूरी है। एआई के दौर में यह सब कौशल कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होते जाएंगे। इसलिए एआई के दौर में इंटर्नशिप सिर्फ इंटर्नशिप नहीं है बल्कि जरूरी सेल्फ इम्प्रूवमेंट है। 
किसी रिपोर्ट में अगर एआई ने गलत रिपोर्ट दिया है तो आपके लिए सेल्फ इम्प्रूवमेंट ये है कि उस आंकड़े का मूल स्रोत खोजें। किसी कानून, वैज्ञानिक तथ्य या कंपनी के बारे में जानकारी मिली है, तो विश्वसनीय अनियंत्रित स्रोतों से इसकी पुष्टि करें। यह भी अपने आपको बेहतर बनाना है। एआई के साथ सेल्फ इम्प्रूवमेंट इसलिए बेहतर हो सकता है कि एआई आपको इसके लिए चुनौती देता है। लब्बोलुआब यह है कि आज के दौर में सेल्फ इम्प्रूवमेंट करना, आसान हो गया है बशर्ते हम अपने ह्यूमन स्किल्स को एआई की चुनौती के तौरपर अपग्रेड करें।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर 

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