कैसे हुआ दस्ताने का आविष्कार ?

‘दीदी आज सारे संसार में रबर के दस्ताने का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। चाहे किसी मरीज का ऑपरेशन हो या कोई अन्य जोखिम भरा काम, लोग रबर दस्ताने पहनना नहीं भूलते। रबर के दस्ताने न केवल हमारे हाथों को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि इसका प्रयोग कई आवश्यक कार्यों में किया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि रबर के दस्ताने का आविष्कार कैसे और क्यों हुआ? आइए आपको बताते हैं रबर दास्ताने के आविष्कार की कथा। 
दरअसल रबर के दस्ताने के आविष्कार के पीछे एक प्रेम कहानी है। अमरीका के बाल्टिमोर नगर के जान्स हाप्किन्स अस्पताल में विलियम हाल्स्टेड नाम के एक प्रख्यात डॉक्टर सर्जन का काम करते थे। वे बहुत दयालु और उदार प्रवृति के थे। विलियम अस्पताल में कार्यरत एक नर्स से प्रेम करते थे। वह नर्स ऑपरेशन के समय उनके साथ रहा करती थी। वह नर्स एक सभ्य घराने की थी और पहले नृत्यांगना रह चुकी थी। संक्रामक रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं के अस्तित्व की खोज उन्हीं दिनों हुई थी तथा प्रत्येक नर्स व डॉक्टर को ऑपरेशन के पूर्व अपने हाथ को लाल दवा (पोटेशियम परमेंग्नेट) के गाड़े जीवाणु निरोधक (एंटीसेप्टिक) घोल में मल-मलकर धोने पड़ते थे। यह घोल डा. विलियम की चहेती नर्स के हाथों की कोमल त्वचा में जलन पैदा कर देता था। यह देखकर उनका हृदय व्यथित हो जाता और इसका कोई इलाज उन्हें नहीं सूझ रहा था। 
एक दिन डा. विलियम को एक तरकीब सूझी। उन्होंने उस नर्स को अपने कक्ष में बुलाया और उसके कोमल हाथों को अपने हाथ में ले लिया। यह देखकर नर्स थोड़ा झिझकी, लेकिन अगले ही पल उसे इस बात का एहसास हो गया कि डा. ने गलत नीयत से उसका हाथ अपने हाथ में नहीं लिया है। उन्होंने उसके कोमल हाथों को अलग-अलग प्लास्टर में रखा और उनके सांचे तैयार कर लिए। 
वे उन सांचों को लेकर न्यूयार्क गये। वहां उन्होंने गुड इयर रबर कंपनी को वे सांचे देकर उनके माप के रबर के दास्ताने बनाने की प्रार्थना की। कंपनी उनके आदेशानुसार रबर के दास्ताने तैयार कर दिये।  डा. विलियम उन दास्तानों को नर्स को सौंप दिये। नर्स उन दास्तानों को पहनकर ऑपरेशन के समय उनकी सहायता करने लगी। इस प्रकार अब उसे तेज घोल में हाथ धोने की आवश्यकता नहीं रही। उसके कोमल हाथ अब घोल से नहीं जलते थे। साथ ही विलियम का हृदय भी व्यथित नहीं होता था। और एक दिन नर्स उनके इस अपनापन के भाव से प्रभावित होकर गिरजाघर में जाकर उनसे शादी कर लीं। 
डा. विलियम का यह प्रयोग सफल रहा, तो वे अपने लिए भी दास्ताने बनाने का माप दे आये। फिर तो हर सर्जन और नर्स रबर के दास्ताने का प्रयोग करने लगे। शीघ्र ही वैज्ञानिकों ने यह प्रमाणित कर दिया कि लाल दवा से धुले हुए हाथों की अपेक्षा उबले हुए रबर के दास्ताने अधिक जीवाणु रोधक हैं और उनका प्रयोग रोगी के लिए काफी अधिक लाभप्रद है। इस प्रकार धीरे-धीरे रबर के दास्ताने का प्रयोग सारे संसार में होने लगा।
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